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Dec 31, 2009

रायपुरा - बोरियाखुर्द फ्लैट्स की राशि जमा करने की अंतिम तिथि 8 जनवरी तक बढ़ी

रायपुर, 31 दिंसबर 2009, रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना रायपुर, बोरियाखुर्द तथा इन्द्रप्रस्थ डुप्लेक्स आवास योजना रायपुरा के आवंटितियों द्वारा प्रब्याजी राशि जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर को बढ़ा कर 8 जनवरी कर दिया गया है. रायपुरा, बोरियाखुर्द में न्यून निम्न आय वर्ग के लिए क्रमशः 972 व 1800 फ्लैट्स का आंवटन गत माह किया गया था. इसके अलावा रायपुरा में निर्माणाधीन इन्द्रप्रस्थ डुप्लेक्स आवास योजना रायपुरा के आवंटितियों को भी डुप्लेक्स भवनों की किश्तों की राशि जमा करने की तिथि 31 दिसंबर को भी बढ़ा कर 8 जनवरी कर दिया गया है. आरडीए प्रशासन ने कहा है यदि 8 जनवरी 2010 तक आवंटितियों द्वारा प्राधिकरण कोष में राशि जमा नहीं की जाती है तो उनका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा.  

Nov 6, 2009

रायपुरा फ्लैट्स की लॉटरी से दमके चेहरे


कल बोरियाखुर्द के 1800 फ्लैट्स की होगी लाटरी

सुबह 11 बजे से शुरु की गई लाटरी में 1005 वैध पंजीयनकर्ताओं के नाम शामिल थे लॉटरी में आरक्षित श्रेणी के लिए 103फ्लैट्स की लाटरी निकाली गई.प्राधिकरण के अधिकारियों ने लाटरी निकालने के लिए शहीद स्मारक भवन में आए आवेदकों को आमंत्रित कर उनके हाथों से ही लाटरी निकलवाई. 9 शारीरिक विकलांगों को भूतल पर फ्लैट्स देने के लिए लाटरी निकाली गई.इस अवसर पर रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया,कलेक्टर रायपुर के प्रतिनिधि श्री रमेश शर्मा,नगरीय प्रशासन विभाग के श्री जे.पी.सोनी,नगर निगम उपायुक्त श्री श्रीकृष्ण दुबे,नगर तथा ग्राम निवेश के श्री ठाकुर उपस्थित थे.लॉटरी का संचालन प्राधिकरण के सहायक राजस्व अधिकारी रविशंकर दीक्षित, रमेश राव व धर्मेन्द्र सिंह सेंगर ने किया.कल शहीद स्मारक भवन में 11बजे बोरियाखुर्द के पंजीयनकर्ताओं के 1800 फ्लैट्स की लाटरी निकाली जाएगी.
लाटरी निकलते ही खुश हुई महिला लॉटरी के दौरान काफी देर तक अपने परिजनों की लाटरी ना निकलते देख एक महिला मंच पर आई और उसने लाटरी निकालने की इच्छा व्यक्त की.अधिकारियों ने महिला को अवसर दिया तो संयोग से उसके हाथों उसके ही एक परिजन की लाटरी निकली तो वह खुशी से चीख उठी.

Nov 5, 2009

गरीबों के मकान की लॉटरी कल - परसों शहीद स्मारक भवन में

रायपुरा के 972 व बोरियाखुर्द 1800 फ्लैट्स शामिल
रायपुर, 05 नंवबर 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा रायपुरा और बोरियाखुर्द में में गरीबों के लिए बनाए गए फ्लैट्स की लॉटरी 06 व 07 नवंबर 2009 को शहीद स्मारक भवन, रजंबंधा मैदान में सुबह 11 बजे से होगी. डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के नाम से जाने वाली इस फ्लैट्स योजना में रायपुरा के फ्लैट्स की लॉटरी 06 नवंबर को होगी. बोरियाखुर्द के फ्लैट्स की लाटरी 07 नवंबर को होगी.
        गरीबों को छत मुहैया कराने वाली यह राज्य प्रवर्तित योजना है. इसके अन्तर्गत रायपुरा में 972 व बोरियाखुर्द में 1800 फ्लैट्स का निर्माण किया गया है. फ्लैट्स की लाटरी कलेक्टर रायपुर द्वारा नामित प्रतिनिधि की उपस्थिति में होगी. लॉटरी में निकले फ्लैट्स नंबरों के आधार पर वैध पंजीयन वाले आवेदकों को फ्लैट्स का आवंटन किया जाएगा. प्राधिकरण की डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अन्तर्गत कुल 3888 फ्लैट्स का निर्माण किया गया है. इसके पहले हीरापुर में 816, सरोना में 300 फ्लैट्स का आवंटन कर किया जा चुका है. यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने इतनी बड़ी संख्या में गरीबों के लिए 3 सौ वर्गफुट आकार के पक्के मकान बनाएं है.

देवेन्द्रनगर के आठ भूखंडों पर अवैध निर्माण हटे


रायपुर, 05 नंवबर 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण ने देवेन्द्रनगर सेक्टर 2 के आठ भूखंडों पर किए गए अवैध कब्जों की झोपड़ियों को हटा दिया.अवैध रुप से बसे कुछ लोग वहां डेयरी का व्यवसाय कर रहे थे.इसके अलावा भूखंड से लगे अवैध रुप से चल रहे कई ठेलों को भी हटाया गया.कब्जा हटाने गए दल में प्राधिकरण के प्रभारी कार्यपालन अभियंता पी.एम.कोल्हे,संपदा अधिकारी प्रीतपाल सिंह होरा,सहायक अभियंता बी.के.ठाकुर,अनिलगुप्ता,उपअभियंता के.के.अवस्थी,नगर निगम के उप अभियंता के.के.शर्मा, ज्ञानेश त्रिपाठी सहित देवेन्द्रनगर का पुलिस बल शामिल था.

Nov 4, 2009

कमल विहार शासन की योजना – श्री राजेश मूणत

योजना के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी
रायपुर, 04 नंवबर 2009. आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने कहा है कि कमल विहार योजना के क्रियान्वयन के लिए किसी प्रकार राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी.यह योजना छत्तीसगढ़ शासन की है इसलिए किसी को भी किसी प्रकार की शंका नहीं होनी चाहिए.उन्होंने कहा कि रायपुर को मास्टर प्लॉन के अनुसार विकसित करना है.इसलिए कमल विहार जैसी योजना तैयार की गई है तथा इसमें भूस्वामियों को उनकी भूमि के बदले 35प्रतिशत भूखंड दिए जाएंगे. श्री मूणत ने आज होटल बेबीलान में रायपुर विकास प्राधिकरण व नया रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आयोजित निवेशक क्रॉंन्फ्रेंस में अपने संबोधन को दौरान उक्त बातें कही.
श्री मूणत ने कहा कि रायपुर शहर को व्यवस्थित रुप से बसाना है.यहां शैक्षणिक,स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए, इसीलिए कमल विहार योजना के संबंध में जानकारी देने के लिए कल रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुति दी गई. उन्होंने कहा कि यह योजना जनभागीदारी से ही की जा रही है और इसमें हम प्रदेश के निवेशकों, बिल्डर्स को भी जोड़ना चाहतें है इसलिए यह कार्यशाला का आयोजित की गई है.निवेशकों की कार्यशाला को प्रदेश के मुख्य सचिव श्री पी.जॉए.उम्मेन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री बैजेन्द्र कुमार,नया रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एस.एस. बजाज, रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने भी संबोधित किया.
निवेशकों को कमल विहार योजना की जानकारी देते हुए की आरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि योजना क्षेत्र के विकसित होने के साथ ही आगामी पांच वर्षों में योजना क्षेत्र जनसंख्या लगभग 1 लाख 75 हजार से 2 लाख तक बढ़ जाएगी. उन्होंने कहा कि योजना का अभिन्यास व इन्फ्रास्ट्रक्चर आधुनिक शहरी विकास की अवधारणा पर आधारित है.योजना क्षेत्र 15सेक्टरों में विभाजित की गई है.इसमें प्राधिकरण को प्राप्त आवासीय भूमि के अलावा सेक्टर स्तर की व्यवासायिक.शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य उपयोग हेतु भूमि आरक्षित की गई है.योजनास्तर की अधोसंरचना अर्थात ट्रंक इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास रायपुर विकास प्राधिकरण स्वयं करेगा. इसमें फोर लेन रिंग रोड, फ्लॉईओव्हर, बॉयपास रोड, अन्य मुख्य सड़कें, विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था की जाएगी. सेक्टर स्तर पर सड़क – नाली, पुलिया, सर्विस डक्ट, डी सेन्ट्रलाईज्ड ट्रीटमेंट (सीवेज) प्लाटस लैंडस्केपिंग एंव गार्डन का विकास कार्य के लिए योजना में प्राधिकरण को उपलब्ध आवासीय, व्यवसायिक,स्वास्थ्य,शिक्षण की भूमि डेव्हलपर बिल्डर को हस्तांतरित कर उपरोक्त वर्णित अधोसंरचना विकास कराया जाना प्रस्तावित है.इस प्रक्रिया के लिए प्राधिकरण द्वारा डेव्हलपर व बिल्डर्स से निविदाएं आमंत्रित की जाएगी.

Nov 3, 2009

रायपुर विकास प्राधिकरण की नई टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम - कमल विहार -

रायपुर विकास प्राधिकरण की नई टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम

- कमल विहार -
ग्राम डूंडा, टिकरापारा, बोरियाखुर्द, देवपुरी तथा डूमरतराई के
भूस्वामियों के साथ संवाद
03 नवंबर 2009 को शहीद स्मारक भवन, रायपुर में
श्री अमित कटारिया,मुख्य कार्यपालन अधिकारी
रायपुर विकास प्राधिकण द्वारा की गई प्रस्तुति.
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• पिछले कुछ दशकों में रायपुर शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है.
• शहर विस्तार से समस्याएं भी बढ़ी हैं.
• रायपुर शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए पहले जो नगर विकास योजनाएं बनाई गई थी उन योजनाओं का सही दिशा में क्रियान्वयन नहीं हो पाया. इस कारण राययपुर का समुचित विकास नहीं हो सका.
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• शहर में ऐसी हैं समस्याएं
• रायपुर शहर के खमतराई, भनपुरी, रामनगर जैसे कई नए क्षेत्र आज सकरी सड़कों, अव्यवस्थित बसाहट होने, पानी एवं नालियों के अभाव और गंदगी के कारण काफी बदतर स्थिति में हैं.
• आवासीय, कृषि एवं अन्य उपयोग की भूमि पर अवैध तथा सुविधाहीन कालोनियों के निर्माण से नागरिकों की समस्याएं बढ़ी हैं.
• राजधानी बनने के बाद से रायपुर की आबादी तेजी से बढ़ी है.
• बढ़ती आबादी के अनुपात में आवासीय, व्यावसायिक एवं सार्वजनिक एवं सामाजिक सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं.
• सुविधाएं नहीं बढ़ने से नागरिकों की परेशानियां विकराल स्वरूप में उभर रही है.
• इन्हीं समस्याओं के निराकरण की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण 8 टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम तैयार कर रहा है.
• रायपुर विकास प्राधिकरण जनभागीदारी से शहर का विकास करना चाहता है.
• इस दिशा में तैयार की गई टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम एक जांची परखी योजना है.
• योजना की डिजाइन एवं वित्तीय आंकलन हेतु कई स्तरों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यापक अध्ययन किया गया है ताकि योजना का स्वरुप व्यवहारिक हो.
एक नई पहल
• रायपुर विकास प्राधिकरण शहर विकास की दिशा में टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम अर्थात नगर विकास योजना के माध्यम से विकास की दिशा में एक नई पहल कर रहा है.
• प्राधिकरण द्वारा इन योजनाओं को छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में दिए गए प्रावधानों के अनुरुप प्रस्तावित किया गया है.
• रायपुर विकास प्राधिकरण शहर विकास के लिए 8 नई योजनाएं तैयार कर रहा है. इनमें से सबसे पहले कमल विहार इन्टीग्रेटेड टॉऊनशिप योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है. ये योजनाएं रायपुर विकास योजना पुनर्विलोकित 2021 अर्थात मास्टर प्लॉन के अनुसार तैयार की जा रही हैं.
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• रायपुर शहर की सुव्यवस्थित एवं सुविधायुक्त बसाहट के लिए बनाई जा रही 8 नगर विकास योजनाओं में से पहली पायलट योजना के रुप में प्राधिकरण द्वारा टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम – 04
- कमल विहार -
आरंभ की जा रही है.
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विकास योजना की प्रक्रिया
प्रक्रिया – 01 : योजना क्षेत्र का सर्वेक्षण
प्रक्रिया – 02 : योजना की सीमा निर्धारण
प्रक्रिया – 03 :
(अ) खसरा सीमा का अकंन एवं सूची तैयार करना.
(ब) खसरा क्षेत्रफल की गणना.
(स) प्रकाशन के लिए प्रारुप योजना तैयार करना.
प्रक्रिया – 04 : योजना क्षेत्र में मास्टर प्लॉन के अनुसार सड़कों का अकंन.
प्रक्रिया – 05 :
(अ) योजना क्षेत्र में नए मुख्य मार्गो का प्रस्ताव
(ब) सेक्टरों की सीमा का निर्धारण
प्रक्रिया – 06 : सेक्टरों में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत,सामाजिक एवं आमोद – प्रमोद व अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए योजना का आंकल्पन.
प्रक्रिया – 07 : भूखंडों का पुनर्गठन
(अ) प्रत्येक भूस्वामी की भूमि के बदले दिए जाने वाले भूखंड की गणना कर सूची तैयार करना.
(ब) सेक्टर का अभिन्यास तैयार कर भूस्वामियों को दिए जाने वाले भूखंड का अकंन (मूल भूमि अथवा उसके नजदीक)
प्रक्रिया – 08 : सेक्टर अभिन्यास तैयार कर खसरा नक्शे में चिन्हांकन.
प्रक्रिया – 09 : सेक्टर का विस्तृत अभिन्यास
 ग्रिड पध्दति पर आधारित अभिन्यास
 अधिक्तम भू उपयोग का अभिन्यास.
 सुविधाजनक परिचालन पथ.
 प्रमुख मार्गों से सीधे प्रवेश के बदले अन्य सुरक्षित मार्गों से प्रवेश.
• अभिन्यास की स्वीकृति के साथ ही भू स्वामियों को उनकी मूल भूमि के बदले 35 %विकसित भूखंड दिया जाएगा.
• सभी भूस्वामी को दिए जाने वाले आवासीय भूखंड को सीधे सड़क उपलब्ध होगी.
• आमोद – प्रमोद, हरित क्षेत्र एवं सार्वजनिक व अर्ध्द सार्वजनिक क्षेत्र के भूस्वामियों को भी आवासीय भूखंड दिए जाएंगे.
• मूल भूमि का उपयोग व्यावसायिक होने पर भूस्वामी को 35% व्यावसायिक भूमि का भूखंड दिया जाएगा.
- कमल विहार योजना : विवरण -
• योजना का क्षेत्रफल - 879 हेक्‍टेयर (2171 एकड़)
• योजना क्षेत्र - ग्राम डूंडा,टिकरापारा,बोरियाखुर्द, देवपुरी तथा डूमरतराई के भाग
• सेक्टर की संख्या - 15
• अनुमानित लागत - लगभग 900 करोड रुपए
• योजना अवधि - 5 वर्ष
- भूमि का प्रस्ताव -
• योजना क्षेत्र के भूस्‍वामियों को दी जाने वाली भूमि का क्षेत्रफल - उनके मूल रकबे का 35%
• भूखंड का न्यूनतम आकार - 40 वर्गमीटर (430 वर्गफुट)

- कमल विहार योजना का प्रस्ताव -
• प्रस्‍तावित विकास कार्य -
योजना स्‍तर पर
(1) योजना क्षेत्र में मास्‍टर प्‍लान में प्रस्‍तावित समस्‍त मार्ग रिंग रोड नं. 4 एवं बायपास मार्ग.
(2) जल प्रदाय हेतु फिल्‍टर प्‍लांट, राइजिंग मेन एवं ओवर हैड टैंकों निर्माण
(3) समस्‍त मार्गों पर प्रकाश व्‍यवस्‍था.
(4) आमोद-प्रमोद हेतु आरक्षित लगभग 245 एकड़ क्षेत्र (बोरिया तालाब सहित) का विकास कार्य.
सेक्‍टर स्‍तर पर
(1) सड़कों का निर्माण.
(2) नाली, पुलियों एवं सर्विस डक्‍ट का निर्माण.
(3) पेयजल व्‍यवस्‍था.
(4) बाह्य विद्युतीकरण सब स्‍टेशन निर्माण सहित.
(5) विकेन्‍द्रीकृत ट्रीटमेंट प्‍लांट सीवर लाइन सहित.
(6) उद्यानों का विकास.
- विकास कार्य हेतु राशि की व्यवस्था -
(अ) 35% विकसित भूखंड देने व अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए भूमि छोड़ने के पश्चात प्राधिकरण के पास शेष विक्रय योग्य भूमि के विक्रय से प्राप्‍त राशि से यथा संभव समस्‍त विकास कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है.
(ब) योजना क्षेत्र के भूस्‍वामियों से विकास के मद में यथासंभव न्‍यूनतम राशि ली जाना प्रस्‍तावित है.
- भूमि का मूल्‍यांकन -
(अ) योजना क्षेत्र में आने वाली भूमि का मूल्‍यांकन रायपुर के कलेक्‍टर गाईड लाईन में दी गई दरों के आधार पर किया जा रहा है.
(ब) विकसित भूखण्‍डों का मूल्‍यांकन योजना क्षेत्र की भूमियों के औसत दर एवं लोकेशन के आधार पर किया जा रहा है.
- पूर्व निर्मित संरचनाएं -
(1) योजना में सम्मिलित ग्रामों की मूल बस्तियों के क्षेत्र को योजना में सम्मिलित नहीं किया गया.
(2) योजना क्षेत्र में पूर्व से निर्मित संरचनाओं से एवं अनुमोदित कॉलोनियों के स्‍वामियों से आंशिक विकास शुल्‍क लिया जाना प्रस्‍तावित है
- भू स्वामियों को होने वाले लाभ -
(1) छोटे भूस्वामियों को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से भूखंड के अभिन्यास (Layout) के अनुमोदन की आवश्‍यकता नहीं होगी किन्तु उन्हें निर्माण कार्य हेतु सक्षम अधिकारी से भवन अनुज्ञा प्राप्त करनी होगी.
(2) बडे़ भूस्वामियों को भूखंडों को विकसित करते समय अथवा भवन निर्माण के समय आर्थिक रुप से कमजोर (EWS) वर्ग के लिए भूमि एवं सामुदायिक खुले क्षेत्र छोड़ने की आवश्‍यकता नहीं होगी.
(3) नगर विकास योजना के क्रियान्वयन से भूमिस्‍वामियों को उनके विकसित भूखण्‍डों की कीमतों में लगभग तीन से चार गुना या उससे भी ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है.
(4) योजना के अंतर्गत भूस्‍वामियों को यथासंभव उनकी मूल भूमि के समीप पुनर्गठित विकसित भूखंड उपलब्‍ध कराया जाएगा. हर भूखंड को सड़क उपलब्‍ध होगी.
(5) भूमिस्‍वामियों को प्राप्त होने वाले विकसित भूखण्‍ड पूर्णतः फ्रीहोल्‍ड होंगे.
(6) भूस्वामियों को प्राप्त होने वाले भूखंड पर आसानी से ऋण उपलब्ध होगा.
(7) योजना का क्षेत्र सुव्यवस्थित एवं नागरिक सुविधायुक्त होगा.
- योजना के भूखंडों के मूल्य बढ़ने के कारक -
(1) योजना में 42 एकड़ (वृहद स्तर) का सी.बी.डी. अर्थात केन्द्रीय व्यवासायिक क्षेत्र का प्रावधान.
(2) आमोद – प्रमोद के लिए 245 एकड़ (वृहद स्तर ) का भूमि प्रावधान.
(3) सार्वजनिक व अर्ध्दसावर्जनिक उपयोग हेतु 57 एकड़ भूमि का प्रावधान.
(4) भूखंड का पूर्णतः फ्रीहोल्‍ड होना.
(5) उच्च स्तरीय अधोसंरचना विकास .
(6) छ्त्तीसगढ़ शासन द्वारा स्वीकृत योजना.
 जनभागीदारी से शहर का विकास
• छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को राजधानी का स्वरुप देने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है.
• रायपुर विकास प्राधिकरण अपने दायित्व के अनुसार देश की सबसे बेहतर टॉऊन डेव्हलमेंट योजना का क्रियान्यवन कर नागरिकों को बेहतर जीवन के लिए नागरिक सुविधाएं देने तत्पर है.
• आप नागरिकों का सहयोग रायपुर को बेहतर व्यस्थित और सुन्दर बनाएगा.
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Nov 2, 2009

कमल विहार योजना के भूखंड फ्रीहोल्ड रहेंगे

3 को भूस्वामियों से 4 को निवेशकों से संवाद
         रायपुर, 02 नंवबर 2009. छत्तीसगढ़ की पहली टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम कमल विहार के भूखंड फ्री होल्ड होंगे. फ्री होल्ड का आशय है कि भूस्वामियों को उनकी भूमि के बदले जो विकसित भूखंड दिए जाएंगे उन पर किसी प्रकार का भू भाटक नहीं लिया जाएगा.कमल विहार योजना के भूस्वामियों को योजना के विस्तृत जानकारी देने के संबंध में कल 3 नवंबर दोपहर 3 बजे शहीद स्मारक भवन में एक सभा का आयोजन रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है.
         आरडीए कमल विहार योजना के संबंध में 4 नवंबर प्रातः 11 बजे नया रायपुर विकास प्राधिकरण के साथ मिल कर हॉटल बेबीलॉन में निवेशकों तथा बिल्डर्स की एक क्रॉंन्फ्रेस का भी आयोजन कर रहा है.योजना में अधोसंरचना विकास करने हेतु निवेशकों व बिल्डर्स की मदद ली जानी है. इसलिए कॉंन्फ्रेंस में कमल विहार में क्या कार्य किए जाने है तथा इस संबंध में विकास एवं नागरिक सुविधाओं के संबंध निवेशकों व बिल्डर्स की भागीदारी कैसे होगी तथा उनसे क्या अपेक्षाएं है इस संबंध में जानकारी दी जाएगी तथा सुझाव लिए जाएंगे. 
        राजधानी की सबसे बड़ी योजना के रुप में विकसित होने वाली यह योजना ग्राम डूंडा, बोरियाखुर्द, टिकरापारा, देवपुरी तथा डुमरतराई, के क्षेत्र में क्रियान्वित होगी. 2170 एकड़ में बनने वाली टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम अहमदाबाद के अनुभवों से और बेहतर हो इसका प्रयास किया जा रहा है. योजना तैयार करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार जनभागीदारी के साथ यह योजना पांच सालों में पूर्ण करने का लक्ष्य है. रायपुर विकास प्राधिकरण 900 करोड रुपए की इस योजना का नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के अन्तर्गत शीघ्र ही राजपत्र में प्रकाशन कर भू स्वामियों से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित करेगा.

Oct 31, 2009

आरडीए के अधीक्षक गणेशराम यदु सेवानिवृत

1971 में पहला वेतन 272 रुपए आज अंतिम वेतन 21 हजार
रायपुर, 31 अक्टूबर 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण के अधीक्षक श्री गणेशराम यदु 31 साल की नौकरी के बाद आज सेवानिवृत हो गए. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने उन्हें शाल श्रीफल देकर उनकी सेवाओं का सम्मान किया. उन्होंने कहा कि श्री यदु के कार्य की प्रशंसा सुन कर मैं भी उनका प्रशंसक हो गया हूं. मृदु भाषी और अपने कार्यों से प्राधिकरण में लोकप्रिय रहे श्री यदु प्राधिकरण की पहली पीढ़ी के कर्मचारियों में से माने जाते रहे हैं.
1971 में नगर सुधार न्यास, रायपुर में मुद्रलेखक के रुप में नौकरी की शुरुआत करने वाले यदु को आज भी याद था कि उन्हें जो पहला वेतन मिला था वह 272 रुपए थे. आज सेवानिवृत होने पर उनका मासिक वेतन 21 हजार रुपए था. श्री उन्होंने नौकरी के दौरान अपने विभिन्न अवसरों को याद करते हुए बताया कि वे रायपुर नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष श्री राजाराम दुबे के कार्यकाल को सबसे अच्छा मानते हैं. 1971 में श्री दुबे के अधीनस्थ अपनी नौकरी की शुरुआत करने वाले श्री यदु ने बताया कि उस समय नगर सुधार न्यास में कुल 15 कर्मचारी कार्यरत थे. श्री दुबे कर्मचारियों के साथ कंधा से कंधा मिला कर काम करते थे और हर कर्मचारी को प्रोत्साहित करते थे. मुख्य अभियंताओं में श्री यदु को श्री एच. आर. अग्रवाल ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. प्राधिकरण की नौकरी के दौरान अधिकांश समय उन्होंने तकनीकी शाखा में निर्माण कार्यों की कार्यालयीन प्रक्रिया से जुडे कार्यों को बेहतर ढ़ंग से संचालित किया. मृदु भाषी श्री यदु ने जो भी कार्य किया वह पूर्ण निष्ठा से किया. प्राधिकरण में मुद्रलेखक के बाद वे उच्च श्रेणी लिपिक, सहायक अधीक्षक और फिर अधीक्षक बने. श्री यदु की सेवानिवृति के अवसर पर प्रभारी कार्यपालन अभियंता पी.एम.कोल्हे, संपदा अधिकारी प्रीतपाल सिंह होरा, सहायक अभियंता अनवर खान, गुरुचरण सिंह होरा. योगेशचन्द्र साहू, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष धर्मेन्द सिंह सेंगर, अनिल शर्मा, नरेन्द्र जैन, कुमदनी अवधिया, श्रीमती रंजना त्रिपाठी, बी.के. ठाकुर, मन्नूलाल सिन्हा, अशोक मेथानी, के.के.अवस्थी, एम.एस.पांडे उपस्थित थे.

Oct 30, 2009

कमल विहार में सीबीडी सहित कई नागरिक सुविधाएं

टॉऊन डेवलपमेंट स्कीम से अवैध कालोनियों पर लगेगी रोक
रायपुर, 30 अक्टूबर 2009. छत्तीसगढ़ की पहली टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम कमल विहार योजना के प्रारंभिक रुप से तैयार किए प्रस्ताव में सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट सहित कई नागरिक सुविधाओं का प्रावधान रखा गया है.लगभग 2170एकड़ में विकसित होने वाली इस योजना से भूस्वामियों की संपत्ति के मूल्य में कई गुना इजाफा होगा.प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत का मानना है कि कमल विहार जैसी टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम के क्रियान्वयन से राजधानी में अवैध रुप से विकसित होने वाली कालोनियों पर भी रोक लगेगी.
         रायपुर के मास्टर प्लॉन अर्थात रायपुर नगर विकास योजना पुनर्विलोकित 2021 में सड़क निर्माण के प्रस्ताव के अनुसार कमल विहार क्षेत्र में कुल छह प्रमुख मार्गों का निर्माण किया जाना है. इसमें 75 मीटर चौड़ी रिंग रोड, 75 मीटर चौड़ी एक बायपास रोड तथा अन्य मार्ग 45 व 30 मोटर चौड़े होगें. सुगम यातायात के लिए फ्लाई ओव्हर भी होगा. योजना क्षेत्र में जिनकी भूमि आमोद – प्रमोद में आएगी उन्हे भी विकसित आवासीय भूखंड दिए जाएंगे. बोरिया तालाब के क्षेत्र को हरित व मनोरंजन के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा.मास्टर प्लॉन के अनुसार आमोद प्रमोद के लिए कमल विहार में 245 एकड़ भूमि निर्धारित है.
         कमल विहार में एक सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट अर्थात केन्द्रीय व्यावसायिक क्षेत्र का प्रावधान किया गया है जिसका क्षेत्रफल लगभग 42एकड़ होगा.सार्वजनिक व अर्ध्द सार्वजनिक क्षेत्र हेतु जिसमें सामाजिक,सांस्कृतिक,प्रशासनिक,शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए लगभग 57 एकड़ भूमि का प्रावधान किया गया है.
        रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए प्रारंभिक प्रस्ताव में योजना का व्यय लगभग 9 सौ करोड़ रुपए आंका गया है.योजना में भू स्वामियों को उनकी कुल भूमि का 35 प्रतिशत भूमि विकसित भूखंड के रुप में मिलेगा. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार इस योजना के लिए वास्तुविदों व इंजीनियरों की टीम ने कई स्तर पर तकनीकी व वित्तीय आंकलन कर एक बेहतर प्रस्ताव तैयार किया है इसलिए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि राजधानी की यह पहली टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम अहमदाबाद से बेहतर साबित होगी.उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरुप योजना क्षेत्र के भू स्वामियों को कमल विहार के तैयार किए गए प्रस्ताव की जानकारी देने के लिए 03 नंवबर दोपहर 3 बजे को शहीद स्मारक भवन में एक सभा का आयोजन किया गया है.
         श्री कटारिया ने कहा कि कमल विहार योजना क्षेत्र में गरीबों के लिए 15 प्रतिशत तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 10 प्रतिशत भूमि सुरक्षित रखी गई है. योजना में सड़क, नाली, बिजली, पानी की सुविधा दी जाएगी तथा इसके लिए व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि से योजना का विकास किया जाएगा.

Oct 29, 2009

गरीबों के फ्लैट्स की लाटरी 6 व 7 को शहीद स्मारक भवन में


रायपुरा के 972 व बोरियाखुर्द 1800 फ्लैट्स शामिल
रायपुर, 29 अक्टूबर 2009. गरीबों के लिए राज्य प्रवर्तित डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना की लाटरी 6 व 7 नवंबर को शहीद स्मारक भवन में प्रातः 11 बजे से होगी. 6 नवंबर को रायपुरा तथा 7 नवंबर को बोरियाखुर्द के फ्लैट्स की लाटरी कलेक्टर रायपुर द्वारा नामित प्रतिनिधि की उपस्थिति में होगी.रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा इस योजना के अन्तर्गत रायपुरा में 972 फ्लैट्स तथा बोरियाखुर्द में 1800फ्लैट्स बन कर तैयार हो गए हैं.आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत द्वारा शीघ्र ही इन फ्लैट्स की लाटरी कर आवंटन के निर्देश पर प्राधिकरण ने आवेदकों की सूची का प्रकाशन कर दिया है.दो दिन पहले श्री मूणत ने आरडीए के अधिकारियों को कहा था कि शासन की मंशा के अनुरुप गरीबों को छत देने की इस योजना में पूर्ण पारदर्शिता रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि गरीबों को उनका मकान शीघ्र ही मिल जाए.
            आरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि प्राधिकरण में प्राप्त आवेदन पत्रों का पंजीयन कर उसमें वैध व त्रुटिपूर्ण पंजीयनकर्ताओं की एक सूची कलेक्टर कार्यालय, तहसील कार्यालय तथा शास्त्री चौक स्थित रायपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय के सूचना पटल में अवलोकन के लिए लगा दी गई है.प्राधिकरण की सूची के विवरण में यदि किसी व्यक्ति को कोई आपत्ति हो तो वह तीन दिन के भीतर अपनी आपत्ति प्राधिकरण कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है. प्राधिकरण की डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अन्तर्गत कुल 3888 फ्लैट्स का निर्माण पूरी कर लिया है. इसके पहले हीरापुर में 816, सरोना में 300 फ्लैट्स का आवंटन कर किया जा चुका है. यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने इतनी बड़ी संख्या में गरीबों के लिए 3 सौ वर्गफुट आकार के पक्के मकान बनाएं है. न्यून निम्न आय वर्ग के लिए बने इन मकानों की कीमत लगभग 2.05 लाख रुपए है.

ट्रांसपोर्टनगर में विशेष शिविर की अवधि दो दिन बढ़ी 31 अक्टूबर तक निर्माण करे अन्यथा आवंटन रद्द होगा


रावांभाठा ट्रांसपोर्टनगर में दुकानों का निर्माण करने के लिए मानचित्र हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र व नल कनेक्शन हेतु काफी संख्या में आ रहे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के लिए शिविर की अवधि को दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार यह शिविर अब 30 व 31 अक्टूबर को रावांभाठा के नए बस टर्मिनल में 11 बजे से 4 बजे तक जारी रहेगा. विशेष शिविर के दूसरे दिन आज 62 मानचित्र के अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा 52 नल कनेक्शन के आवेदनों को स्वीकृति दी गई.श्री कटारिया ने आज शाम प्राधिकरण कार्यालय में मिलने आए ट्रक ओनर एसोसियेशन के पदाधिकारियों जगदीश मित्तल,हरचरण सिंह साहनी,बनारसी पांडे व परविन्दर सिंह भाटिया को स्पष्ट रुप से कहा कि यदि वे 31अक्टूबर तक दुकानों का निर्माण शुरु नहीं करने पर भूखंड का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि ट्रकों को सड़क पर खड़ा किए जाने पर जिला प्रशासन व पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी.

कमल विहार के भूस्वामियों के साथ आरडीए का संवाद 3 नंवबर को शहीद स्मारक भवन में

रायपुर, 29 अक्टूबर 2009. रायपुर शहर की पहली टाऊन डेव्हल्पमेंट स्कीम कमल विहार योजना कैसी होगी तथा इसकी प्रक्रिया क्या होगी यह बताने के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण ने 3 नंवबर दोपहर 3 बजे शहीद स्मारक भवन में योजना क्षेत्र के भूस्वामियों के साथ संवाद के लिए एक सभा का आयोजन किया है.गत दिनों आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने प्राधिकरण के अधिकारियों को योजना क्षेत्र में आने वाले भूमि के भूस्वामियों को योजना के प्रारुप की जानकारी एक सरल स्वरुप में देने के लिए कहा था.
            प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार ग्राम बोरियाखुर्द, टिकरापारा, देवपुरी, डुमरतराई, डूंडा क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित कमल विहार योजना के विकास के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण ने प्रारुप तैयार कर लिया है.नौ सौ करोड रुपए की कमल विहार योजना में भूस्वामियों को उनकी कुल भूमि का 35 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाना प्रस्तावित है. इसके अलावा गरीबों के लिए 15 प्रतिशत तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 10 प्रतिशत भूमि सुरक्षित रखी जाएगी. योजना में सड़क, नाली, बिजली, पानी की सुविधा दी जाएगी तथा इसके लिए व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि से योजना का विकास किया जाएगा.अधिकारियों ने बताया कि योजना का प्रारुप तैयार करने में सभी विषयों को ध्यान में रखा गया है.मास्टर प्लॉन के अनुसार चौड़ी सड़कों का प्रावधान किया गया है तथा योजना में होने वाले खर्च के साथ सभी विकल्पों व वित्तीय आंकलन के आधार पर एक बेहतर प्रस्ताव तैयार किया गया है.
            श्री कटारिया के अनुसार शीघ्र ही कमल विहार योजना के विकास के संबंध में नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के अनुसार प्रारुप योजना (ड्रॉफ्ट स्कीम)का प्रकाशन कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भू स्वामियों को उक्त सभा में योजना के संबध में जानकारी दी जाएगी.उन्होंने कहा कि टाऊन डेव्लपमेंट स्कीम के अन्तर्गत छत्तीसगढ की यह पहली योजना है.अहमदाबाद में ऐसी सौ से ज्यादा योजनाएं क्रियान्वित हुई है तथा वहां के भूस्वामी स्वयं ऐसी योजनाओं में शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि यह जनभागीदारी की एक सफल एवं परखी हुई योजना है जिसमें भूस्वामी को आर्थिक लाभ होगा तथा राजधानी का सुनियोजित व सुव्यवस्थित विकास होगा.श्री कटारिया ने कहा कि इन्ही कारणों से हम योजना क्षेत्र के भूस्वामियों को जानकारी देने हेतु आमंत्रित कर रहे हैं.

Oct 28, 2009

900 करोड की होगी कमल विहार योजना


कुल भूमि के बदले मिलेगा 35% विकसित भूखंड

रायपुर, 28 अक्टूबर 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण की नई टाऊन डेव्हल्पमेंट स्कीम (टीडीएस) में सभी भूस्वामियों को भूखंड दिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा. योजना में भूस्वामियों को उनकी कुल भूमि का 35 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाएगा. इसके अलावा गरीबों के लिए 15 प्रतिशत तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 10 प्रतिशत भूमि सुरक्षित रखी जाएगी. आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने कल मंत्रालय स्थित कक्ष में प्राधिकरण की कमल विहार योजना के प्रारंभिक रुप से तैयार किए गए प्रारुप का अवलोकन के दौरान उक्त बातें कही.

प्राधिकरण की बोरियाखुर्द, टिकरापारा, देवपुरी, डुमरतराई, डूंडा क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित कमल विहार योजना के संबंध में प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने आवास एवं पर्यावरण मंत्री को पूरे प्रस्ताव की जानकारी दी. अधिकारियों ने अहमदाबाद अरबन डेव्लपमेंट अथारिटी के प्लॉटों को पुनर्गठन के संबंध में क्रियान्वित की जा रही योजना के संबंध में बताया कि अहमदाबाद में भूस्वामियों को उनकी भूमि का लगभग 50 प्रतिशत भूखंड वापस दिया जाता है किन्तु उसमें 50 प्रतिशत विकास शुल्क भी लिया जाता है. इसके अलावा गुजरात शासन टॉऊन प्लॉनिंग के नियमों के अनुसार गरीबों के लिए 5 प्रतिशत भूखंड तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 5 प्रतिशत भूखंड आरक्षित किया जाता है. जबकि छत्तीसगढ़ शासन के नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में गरीबों के लिए 15 प्रतिशत भूखंड तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 10 प्रतिशत भूखंड आरक्षित रखे जाने का प्रावधान है. इस प्रकार गुजरात के मुकाबले छत्तीसगढ़ के नियमों में गरीबों के लिए 10 प्रतिशत अधिक भूखंड तथा उद्यानों एवं खुले मैदानों के उपयोग के लिए 5 प्रतिशत अधिक भूमि आरक्षित किए जाने का प्रावधान है. इस आधार पर आंकलन कर प्राधिकरण ने कमल विहार योजना में कुल भूमि का 35 प्रतिशत विकसित भूखंड देने निर्णय लिया है. इस तरह योजना में सड़क, नाली, बिजली, पानी की सुविधा दी जाएगी तथा इसके लिए व्यावसायिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि से योजना का विकास किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि योजना का प्रारुप तैयार करने में सभी विषयों को ध्यान में रखा गया है. मास्टर प्लॉन के अनुसार चौड़ी सड़कों का प्रावधान किया गया है तथा योजना में होने वाले खर्च के साथ सभी विकल्पों व वित्तीय आंकलन के आधार पर एक बेहतर प्रस्ताव तैयार किया गया है.

प्राधिकरण के अधिकारियों ने बैठक में चर्चा के दौरान बताया कि पुराना धमतरी रोड से नए धमतरी रोड के बीच के क्षेत्र में बनने वाली कमल विहार योजना की प्रारंभिक आंकलन के अनुसार अनुमानित लागत लगभग 900 करोड रुपए आंकी गई है तथा यह योजना पांच सालों में पूर्ण रुप से विकसित हो जाएगी. कमल विहार योजना 15 सेक्टर में विभाजित की गई है. योजना में विकास एवं निर्माण कार्य एक साथ कई डेव्हलपर कंपनियों के माध्यम से कराया जाएगा. आवास मंत्री ने कमल विहार योजना के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त करते हुए शीघ्र ही इसे राजपत्र में प्रकाशन करने तथा नियमानुसार योजना क्षेत्र के भूस्वामियों को इसके प्रारुप से अवगत कराने को कहा. उन्होंने कहा कि भूस्वामियों से सुझाव व आपत्तियां भी आमंत्रित की जाए. उन्होंने कहा जनहित के लिए क्रियान्वित की जाने वाली पूरी योजना का विवरण जनता के समक्ष रखा जाना चाहिए. यदि इसमें कोई बेहतर सुझाव आते है तो उन्हे भी शामिल किया जाना चाहिए. श्री मूणत ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की मंशा है कि प्रदेश के नागरिक सुव्यवस्थित रुप से अच्छी कालोनियों में निवास करें. राजधानी के सुव्यवस्थित विकास से अवैध कालोनी पर रोक लगेगी तथा जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. आवास मंत्री ने आशा व्यक्त की कि टॉऊन डेव्हलेपमेंट योजना से समाज का हर वर्ग लाभान्वित होगा.

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अहमदाबाद व रायपुर की टॉऊन डेव्हल्पमेंट स्कीम का तुलनात्मक विवरण
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विवरण                      अहमदाबाद अरबन                                   रायपुर 
                                  डेव्हलपमेंट अथारिटी                         विकास प्राधिकरण 
                                                (प्रतिशत में)                          (प्रतिशत में)
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भूस्वामियों को दिए जाने                    50                                      35
वाला पुर्नगठित भूखंड
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गरीबों के लिए आरक्षित भूखंड               5                                     15
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उद्यानों एवं खुले मैदानों के 
के उपयोग के लिए आरक्षित भूखंड          5                                     10
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                  कुल                             60                                   60
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Oct 26, 2009

31 अक्टूबर तक ट्रांसपोर्टनगर में निर्माण शुरु नहीं करने पर भूखंड निरस्त होंगे

नक्शा, नल, विद्युत के लिए 28 - 29 को विशेष शिविर
रायपुर, 26 अक्टूबर 2009. रावांभाठा ट्रांसपोर्टनगर में 31 अक्टूबर तक दुकानों का निर्माण न करने वाले भूखंडधारियों के भूखंड निरस्त कर दिए जाएंगे. कलेक्टर रायपुर की अध्यक्षता में दो सप्ताह पूर्व हुई बैठक में भी ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को यह निर्देश दिया गया था कि वे 31अक्टूबर तक ट्रांसपोर्टनगर में आवंटित भूखंडों पर निर्माण शुरु कर दे अन्यथा भूखंडों का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा.प्राधिकरण व बीरगांव नगर पालिका द्वारा योजना में निर्माण,विद्युत व नल कनेक्शन व भारहीनता प्रमाणपत्र हेतु 28 व 29 अक्टूबर को विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है.
         प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार बिलासपुर मार्ग में ट्रकों के खड़े होने से शहर के आवागमन में काफी परेशानी हो रही है.इस संबंध में जनवरी से लगातार व्यवसायियों को डॉ.खूबचंद बघेल ट्रांसपोर्ट नगर रावांभाठा में कारोबार स्थापित करने के लिए आग्रह किया जा रहा है.उन्होंने कहा कि पूर्व में 57व्यवसायियों को भूखंड की प्रीमियम राशि अर्थात प्रब्याजि राशि जमा नहीं करने की सूचना देते हुए राशि जमा नहीं करने पर भूखंड निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई थी. ऐसे सभी आवंटिती जिन्होंने सूचना मिलने के बाद भी पूर्ण राशि जमा नहीं की है उनके भूखंड निरस्त कर दिए गए है.
         श्री कटारिया ने कहा कि रावांभाठा में ट्रांसपोर्ट की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए व्यवसायियों को प्राधिकरण की ओर से पूरा सहयोग दिया जा रहा है.इसी क्रम में भवन निर्माण, नल कनेक्शन, विद्युत कनेक्शन व भारहीनता प्रमाणपत्र जारी करने हेतु नगर पालिका परिषद बीरगांव और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 28 व 29 अक्टूबर को विशेष शिविर अर्थात कैम्प कार्यालय का आयोजन किया गया है. दो दिवसीय विशेष शिविर प्रातः 11 बजे से 4 बजे तक रावांभाठा में नवनिर्मित बस स्टैन्ड परिसर में होगा. कैम्प कार्यालय में एनओसी व स्वीकृति दी जाएंगी. श्री कटारिया के अनुसार राजधानी की यातायात व्यवस्था सुचारु रुप संचालित होती रहे इसके लिए जरूरी है कि ट्रकों का संचालन ट्रांसपोर्टनगर से हो. उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 70 व्यवसायियों ने अपनी दुकानों का निर्माण किया है तथा कुछ ने वहां अपने कारोबार का संचालन शुरु कर दिया है. उल्लेखनीय है कि ट्रांसपोर्टनगर के 1337 भूखंडों में से 1115 भूंखड आवंटित किए जा चुके हैं. इनमें लगभग एक हजार आवंटितियों ने भूखंड की रजिस्ट्री कराई है जिनमें लगभग 700 आवंटितियों ने ही भवन निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल किया है.

Oct 23, 2009

एलपीजी शवदाह गृह का संचालन करेगा बढ़ते कदम

  • जनभागीदारी बढ़ाने आरडीए का निर्णय
  • बढ़ते कदम करेगा एलपीजी शवदाह गृह संचालन
रायपुर, 23 अक्टूबर 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण ने सामाजिक सेवा में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए शहर की गैर सरकारी संगठन बढ़ते कदम को मारवाड़ी श्‍मशान घाट स्थित एलपीजी शवदाह गृह के संचालन व रखरखाव की जिम्‍मेदारी दी है.प्राधिकरण संचालक मंडल की कल हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया.
प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरुप प्राधिकरण ने जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है.उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एलपीजी शवदाह गृह आज एक बेहतर विकल्प है तथा यह सामाजिक रीति रिवाजों के अनुकूल भी है.श्री बजाज ने कहा कि बढ़ते कदम संस्‍था ने एलपीजी शवदाह गृह में शवों के अंतिम संस्‍कार के लिए प्रेरित किया है. इस संस्था ने सामाजिक कार्यों के अन्तर्गत शव वाहन के रुप में स्वर्गरथ, एम्बुलेंस की सुविधा, शवों को सुरक्षित रखने के लिए कॉफिन फ्रिजर तथा देवेन्द्रनगर में मरचुरी की स्थापना का कार्य भी किया है.संस्था के कार्य को देखते हुए प्राधिकरण ने उन्हे मारवाड़ी श्मशानघाट में प्राधिकरण द्वारा विकसित एलपीजी शवदाह गृह के संचालन व रखरखाव की संपूर्ण जिम्मेदारी दी है.
       उल्लेखनीय है प्रदेश के पहले एलपीजी शवदाह गृह का गत वर्ष 01 अक्टूबर को लोकार्पण किया गया था. 25 लाख रुपए की लागत से बने गैसीय शवदाह गृह का निर्माण ठाणे महाराष्ट्र की कंपनी चिरंतन उद्योग ने किया है. यहां इंडियन ऑयल कंपनी शव दहन के लिए रियायती दरों पर सिलेन्डर उपलब्ध करा रही है.

कमल विहार योजना का प्रारुप तैयार

               रायपुर, 23 अक्टूबर 2009. शहर की नई टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत प्लॉटो के पुनर्गठन के संबंध में भूमि स्वामियों को उनकी भूमि के बदले में दिए जाने वाले विकसित भूखंड के क्षेत्रफल के संबंध में रायपुर विकास प्राधिकरण ने प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया है. यह प्रस्‍ताव अब राज्‍य शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. उक्त निर्णय कल प्राधिकरण संचालक मंडल की बैठक में लिया गया. बैठक में देवेन्द्रनगर में बन रहे मल्टीप्लेक्स का नाम छत्तीसगढ़ सिटी सेन्टर किए जाने को भी मंजूरी दी गई. प्राधिकरण के अतिरिक्त निर्माण वाले भूखंडों के विक्रय के संबंध में अनुमति दिए जाने हेतु एक समिति बनाए जाने का निर्णय भी लिया गया जो इस संबंध में परीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी. 
              टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत रायपुर विकास प्राधिकरण ने कमल विहार, डूण्डा की इन्टीग्रेटेड टॉऊनशिप योजना का पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया है.योजना में होने वाले खर्च के साथ पूरा वित्तीय आंकलन व योजना के व्यावहारिक होने का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. शासन के अनुमोदन के उपरांत योजना का प्रारुप अर्थात ड्रॉफ्ट स्कीम का प्रकाशन किया जाएगा.प्रकाशन के बाद आम जनता इसका अवलोकन कर सकेगी तथा भू स्वामियों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएगी. बैठक में जानकारी दी गई कि टॉऊन डेव्हलेपमेंट स्कीम के अन्तर्गत सेक्टर 2, 3 व 5 की योजना तैयार करने हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. बैठक में प्राधिकरण के अध्‍यक्ष श्री एस.एस. बजाज, मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी अमित कटारिया, नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक द्वय श्री वी.पी. मालवीय व श्री के.पी. बाजपेयी तथा सहायक वन संरक्षक श्री विनोद मिश्रा उपस्थित थे.

Oct 3, 2009

किशोर कुमार सहगल का निधन

रायपुर, 03 अक्टूबर 2009, रायपुर विकास प्राधिकरण में कार्यरत श्री किशोर कुमार सहगल का आज सुबह रामकृष्ण अस्पताल रायपुर में निधन हो गया. 54वर्षीय श्री सहगल प्राधिकरण में 1981 से सहायक ग्रेड - 3 के पद पर कार्यरत थे. वे अपने पीछे एक पुत्र और पत्नी छोड़ गए है. दोपहर में उनका मारवाड़ी श्मशानघाट में दाह संस्कार किया गया.रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस. बजाज, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया,कर्मचारी संघ के अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह सेंगर, सचिव अब्दुल आरिफ, प्राधिकरण अभियंता संघ के अध्यक्ष अनिल गुप्ता सचिव व सचिव के.के.अवस्थी ने श्री सहगल के निधन पर शोक व्यक्त किया है.

Sep 17, 2009

ब्याज दर में कमी का लाभ हितग्राहियों को देगा आरडीए

रायपुरा की इन्द्रप्रस्थ आवास योजना में 8.28 लाख से 15.48 लाख का होगा फायदा

रायपुर, 17 सितंबर 2009, राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा गृह त्रृण में ब्याज की कमी का लाभ हितग्राहियों को देने के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण ने रायपुरा में निर्माणाधीन इन्द्रप्रस्थ डुप्लेक्स आवासीय योजना में भुगतान की भाड़ाक्रय प्रणाली के बजाय स्ववित्तीय योजना लागू करने का निर्णय लिया है. इसके फलस्वरुप आठ विभिन्न श्रेणियों के डुप्लेक्स मकानों की कीमत में 20 साल तक की किश्तों में भुगतान करने पर हितग्राहियों को लगभग 8 लाख 28 हजार रुपए से 15 लाख 48 हजार रुपए का फायदा होगा. प्राधिकरण द्वारा अपनी पहली डुप्लेक्स योजना हेतु अगस्त 2008 में 302 मकानों के लिए 246 मकानों का पंजीयन किया था.

गत दिनों प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया द्वारा योजना के लिए पूर्व में हडको से ऋण लेकर निर्माण योजना की समीक्षा की थी. समीक्षा में यह पाया कि निर्माण अवधि के दौरान ऋण राशि पर देय ब्याज की गणना मूलधन में जोडी जाती है तथा हडको से ऋण लेने पर हितग्राहियों को सवा 11 प्रतिशत की दर से मूलधन के साथ ब्याज देना होगा, जबकि राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा ब्याज दर में की गई कमी के फलस्वरुप पहले व दूसरे- तीसरे वर्ष में फिक्सड रेट पर क्रमशः 8 प्रतिशत व साढ़े 8 प्रतिशत व चौथे वर्ष से 20 वर्ष तक फ्लोटिंग रेट पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा जो प्राधिकरण द्वारा हडको से ऋण लेने की स्थिति से सवा 3 से सवा 2 प्रतिशत तक कम है, और इसका सीधा फायदा हितग्राहियों को मिलेगा. इस कारण प्राधिकरण के संचालक मंडल ने इन्द्रप्रस्थ योजना के लिए हडको से ऋण लेकर भाड़ाक्रय प्रणाली के बदले स्ववित्तीय योजना लागू कर हितग्राहियों को आर्थिक लाभ देने का निर्णय लिया है.

उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने पंजीयन के समय आवेदकों से डुप्लेक्स मकान की अनुमानित कीमत की 10 प्रतिशत राशि आवेदन के साथ जमा कराई थी. उस समय योजना के लिए हडको से ऋण लिया जाना था किन्तु बाद में बैंकों द्वारा गृह ऋण के ब्याज में आई कमी का लाभ इन्द्रप्रस्थ योजना के पंजीयनकर्ताओं को देने हेतु समीक्षा की.प्राधिकरण ने इस संबंध में सभी पंजीयनकर्ताओं को अपने इस निर्णय से अवगत करा दिया है.प्राधिकरण ने भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों से भी चर्चा कर पंजीयनकर्ताओं को सरल प्रक्रिया के माध्यम से त्वरित ऋण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था.बैंक के अधिकारियों ने प्रस्ताव पर रुचि दिखाते हुए ऐसे ऋण प्रकरणों पर स्वीकृति देना शुरु कर दिया है.श्री बजाज के अनुसार पंजीयनकर्ता किसी भी वित्तदायी संस्था या बैंक से ऋण ले सकते हैं. पंजीयनकर्ता चाहे तो वे एक मुश्त राशि भी जमा कर सकते हैं. इसमें कोई बंदिश नहीं है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन की मंशा है कि प्राधिकरण बेहतर निर्माण के साथ सुविधाजनक कीमत पर हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराए.श्री बजाज ने बताया कि प्राधिकरण ने निर्माण की गुणवता को बेहतर बनाने तथा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में  इन्द्रप्रस्थ योजना के पंजीयनकर्ताओं को हर शनिवार अपने बनते हुए डुप्लेक्स मकान का स्थल पर अवलोकन करने का अवसर उपलब्ध कराया है. इस हेतु निर्माण स्थल पर योजना के सहायक अभियंता हर शनिवार प्रातः 11 बजे से 3:00 तक पर उपलब्ध रहेंगे.

सृष्टि के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर आरडीए ने की पूजा

रायपुर 17 सितंबर 2009, सृष्टि के शिल्पकार और विश्व के पहले तकनीकी ग्रंथ के रचयिता भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर आज रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा देवेन्द्रनगर सेक्टर एक के स्टोर व कटोरातालाब के स्टोर में विधि विधान के साथ वाहनों व निर्माण से संबंधित उपकरणों की पूजा की गई.

सृष्टि के प्रथम सूत्रधार और शिल्पकार माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा में प्राधिकरण के कार्यपालन अभियंता श्री पी.एम. कोल्हे, सहायक अभियंता श्री गुरुचरण सिंह होरा, श्री अनवर खान, श्री के.पी. देवांगन, अनिल गुप्ता, श्री राजीव अग्रवाल, श्री बी.के. ठाकुर, उपअभियंता श्री के.के.अवस्थी, श्री जी.पी.गजेन्द्र, कार्य सहायक श्री इकबाल हुसैन, श्री राजकुमार अवस्थी, बंसी देवांगन, श्री भरत पटेल सहित यांत्रिकी एवं जलप्रदाय शाखा के कर्मचारी शामिल थे.

Aug 28, 2009

इन्द्रप्रस्थ में बनते हुए मकान को देख सकेगें पंजीयनकर्ता

आरडीए हर शनिवार को कराएगा
अवलोकन और लेगा सुझाव

रायपुर, 28 अगस्त 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण की पहली डुप्लेक्स योजना इन्द्रप्रस्थ,रायपुरा के पंजीयनकर्ता अब हर शनिवार को अपने बनते हुए मकान का अवलोकन कर सकेगें. निर्माण की गुणवता को बेहतर बनाने और प्रक्रिया पारदर्शी हो इसके लिए प्राधिकरण अध्यक्ष श्री एस.एस. बजाज व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने यह कदम उठाया है.
       प्राधिकरण प्रशासन के अनुसार जिन पंजीयनकर्ताओं ने रायपुरा में निर्माणाधीन 302फ्लैट्स का पंजीयन कराया है उन्हें अपने मकान के निर्माण की गुणवत्ता देखने और भावनात्मक रुप से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है.डुप्लेक्स मकानों की इस योजना के निर्माण स्थल पर सहायक अभियंता हर शनिवार प्रातः 11 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक स्थल पर उपलब्ध रहेंगे. पंजीयनकर्ता अवलोकन के दौरान अपने अभिमत व सुझाव स्थल पर उपलब्ध पंजी में नोट भी कर सकेंगे.
       उल्लेखनीय है कि रायपुरा के 46एकड़ भूमि में प्राधिकरण की पहली डुप्लेक्स योजना इन्द्रप्रस्थ के अन्तर्गत 302 भवनों का निर्माण किया जा रहा है. प्रथम आया – प्रथम पाया के आधार पर पंजीयन किए गए 302 भवनों में से 81 भवन आरक्षित श्रेणी के लिए है तथा शेष 221 भवन सामान्य वर्ग के लिए है. आठ श्रेणियों में तीन से पांच कमरों वाले डुप्लेक्स भवनों की लागत लगभग 16.52 लाख रुपए से 30.64 लाख रुपए है. 1097 से 1958 वर्गफुट क्षेत्र में निर्मित होने वाले डुप्लेक्स भवनों की इस योजना में चौड़ी सड़के, उच्च स्तरीय जलागार, रेन वाटर हारवेस्टिंग, विद्युत सब स्टेशन, संपूर्ण योजना में हर भवन की बाऊन्ड्रीवाल तथा आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण तथा सुन्दर उद्यान का भी प्रावधान किया गया है.

Aug 21, 2009

नगरघड़ी लिमका बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में शामिल


















आरडीए द्वारा निर्मित नगरघड़ी को दोहरा एवार्ड
नगरघड़ी लिमका बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में शामिल
नगरघड़ी ने बनाया कभी ना टूटने वाला रिकार्ड

रायपुर, 21 अगस्त 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 1995 में निर्मित नगरघड़ी को दोहरा अवार्ड मिला है. भारत की जानी - मानी लिमका बुक ऑफ रिकार्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस ने इसे अपनी पुस्तक में शामिल किया है. रायपुर की नगरघड़ी पूरे भारत की ऐसी पहली संरचना है जिसे हर घंटे बजने वाली छत्तीसगढ़ी धुनों की अवधारणा के कारण इसे लिमका बुक आफ रिकार्ड्स 2009 तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस 2009 में शामिल किया गया है. लिमका बुक के बीसवें संस्करण के मानव कथा अध्याय में नगरघड़ी को “ गाता हुआ घंटाघर ” तथा अंग्रेजी संस्करण में “ सिंगिंग क्लॉक टॉवर ” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है जबकि इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस के आगामी अक्टूबर के अंक में इसे शामिल किया जाएगा. इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस ने गत 16 अगस्त को नई दिल्ली के एयरफोर्स आडिटोरियम में आरडीए को एक ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया है.
प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार नगरघड़ी का लिमका बुक ऑफ रिकार्ड तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में शामिल होना पूरे छत्तीसगढ़ और राजधानी के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग के अन्तर्गत निगमित निकाय के रुप में कार्यरत संस्था रायपुर विकास प्राधिकरण की यह उपलब्धि प्रदेश को पूरे देश में गौरवान्वित करेगी. उन्होंनें कहा कि नगरघड़ी में 24 घंटे में 24 छत्तीसगढ़ी धुन बजने का यह एक ऐसा रिकार्ड है जो कभी नहीं टूट सकता. इसका कारण है कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं यदि कोई 24 से ज्यादा धुन बना भी लेता है तो वह प्रासंगिक नहीं होगा क्योंकि एक दिन में 24 से ज्यादा घंटे हो ही नहीं सकते. इसलिए नगरघड़ी का यह रिकार्ड कभी ना टूटने वाला रिकार्ड बन गया है. उल्लेखनीय है कि लिमका बुक ऑफ रिकार्डस भारत के आश्चर्यजनक और असाधारण उपलब्धियों वाले रिकार्डस की ऐसी पुस्तक है जिसे भारत में विश्व प्रसिद्ध गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त है. 1990 में पहली बार इसे मुंबई में प्रकाशित किया गया था. पुस्तक का उद्देश्य आम भारतीय लोगों की उपलब्धियों और आश्चर्यजनक कारनामों को एक मंच प्रदान करना है. हर वर्ष प्रकाशित होने वाली इस पुस्तक के अब तक इसके 20 अंक प्रकाशित हो चुके हैं. इस पुस्तक में हर वर्ष देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली व्यक्तियों के नामों को घोषणा की जाती है. साथ ही मानव कथा, साहसिक कार्य, शिक्षा, संचार, रेडियो, टेलीविजन, साहित्य, चित्रकला, नृत्य एवं संगीत, चलचित्र एवं रंगमंच, सरकार, परिवहन, चिकित्सा विज्ञान, विकास, प्रकृति एवं कृषि, पशु क्ल्याण, खेलकूद जैसे विषयों पर भारत में बने कई रिकार्ड और आश्चर्यजनक जानकारियां उपलब्ध है. यह पुस्तक अंग्रेजी, हिन्दी तथा मलयालम में भी छपती है. जबकि इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस गिनीज बुक ऑफ रिकार्डधारी मेमोरी गुरु श्री विश्वस्वरुपराय चौधरी का प्रकाशन है जो हाल के कुछ वर्षो से प्रकाशित हो रही है.
19 दिसंबर 1995 को रायपुर के कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने 50 फुट ऊंचे स्तंभ पर नगरघड़ी की स्थापना की गई थी. छह फुट व्यास वाले घड़ी के डायल के पीछे मैकेनिकल पद्धति से चलने वाली घड़ी में हर घंटा पूरा होने के बाद इसके बुर्ज में लगे पीतल के घंटे की आवाज गूंजती थी. इसमें दिन में एक बार चाबी भी भरनी पड़ती थी. मैकेनिकल घड़ी के बार – बार तकनीकी खराबी आने के कारण 26 जनवरी 2008 को रायपुर विकास प्राधिकरण ने एक नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाई जो अतंरिक्ष के सेटेलाईट से संकेत प्राप्त कर जी.पी.एस. (ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम) प्रणाली से सही समय बताती है. अब यह हर घंटे छत्तीसगढ़ की एक लोकप्रिय मधुर लोकधुन सुनाती है
दरअसल जी.पी.एस.पध्दति सही समय जानने की एक नई तकनीक है जो सेना द्वारा अपनाई जाती थी बाद में इसे भारतीय रेल विभाग में भी लागू किया गया ताकि पूरे देश में एक सा समय रहे. रायपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस ने तत्समय छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को लोकप्रिय बनाने के लिए नगरघड़ी में हर घंटे के बाद बजने वाले घंटे की आवाज के पहले छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को संयोजित करने का निर्णय लिया था ताकि इससे आम आदमी भी लोकधुनों से परिचित हो सके. 26 जनवरी 2008 को नई घड़ी लगने के बाद से नगरघड़ी में हर दिन हर घंटे के बाद एक छत्तीसगढ़ी लोकधुन बजती है. चौबीस घंटे में कुल 24 अलग – अलग लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी धुनें बजती है. समय के मनोभावों के अनुरुप इन धुनों का चयन प्रदेश के लोक कलाकारों के विशेषज्ञ समिति के द्वारा किया गया है जिसमें लोक संगीत को पुरोधा माने जाने वाले श्री खुमानलाल साव, लोक गायिका श्रीमती ममता चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक श्री मोहन सुन्दरानी, लोक कला के ज्ञाता श्री शिव कुमार तिवारी और लोक कलाकार श्री राकेश तिवारी ने किया है. समिति की अनुशंसा के फलस्वरुप श्री राकेश तिवारी ने विशेष रुप से लोकधुनें तैयार की है. सुबह चार बजे से हर घंटे के बाद लगभग 30 सेकेण्ड की यह धुनें नगरघड़ी में बजती हुई छत्तीसगढ़ की लोकधुनों से आम आदमी का परिचय कराती है. रायपुर की नगरघड़ी में चौबीस घंटे चौबीस धुनें बजती है. सुबह 4:00 बजे – जसगीत, 5:00 बजे – रामधुनी, 6:00 बजे – भोजली, 7:00 बजे - पंथी नाचा, 8:00 बजे – ददरिया, 9:00 बजे – देवार, 10:00 बजे – करमा, 11:00 बजे – भड़ौनी, दोपहर 12:00 बजे - सुआ गीत, 1:00 बजे – भरथरी, 2:00 बजे - डंडा नृत्य, 3:00 बजे – फाग गीत , 4:00 बजे – चंदैनी, सांयः 5:00 बजे - पंडवानी, 6:00 बजे – राऊत नाचा, 7:00 बजे – गौरा, रात 8:00 बजे – परब, 9:00 बजे – आलहा, 10:00 बजे – नाचा, 11:00 बजे – कमार, 12:00 बजे – सरहुल, 1:00 बजे – बांसगीत, 2:00 बजे – ढ़ोलामारू , 3:00 बजे - सोहर गीत की धुनें नगरघड़ी से बजती है.
राजधानी रायपुर के ह्रदय स्थल पर बनी नगरघड़ी का 19 दिसंबर 1995 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह नें लोकार्पण किया था. हर घंटे लोकधुन सुनाने के कारण अब यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति की एक नई पहचान बन गई है. नगरघड़ी का कांक्रीट स्तंभ 50 फुट ऊंचा है. आर.सी.सी. संरचना पर आधारित नगरघड़ी की बाहरी दीवारों पर उदयपुर राजस्थान का सफेद संगमरमर तथा ग्रेनाईट लगाया गया है. इसके स्तंभ के चारों दिशाओं में छह फुट व्यास वाले डायल प्लास्टिक एक्रेलिक शीट के हैं. नगरघड़ी को बनाने में 275 दिन का समय लगा था. घड़ी के स्तंभ का निर्माण कार्य एक मार्च 1995 को शुरु कर 30 नवंबर 1995 को पूरा किया गया. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी कोचीन, केरल की टूल एंड टाईम इंजीनियरिंग कंपनी ने 90 दिनों में स्थापित की है. कंपनी ने 29 अक्टूबर 2007 को काम शुरु कर 26 जनवरी को 2008 को काम पूरा किया. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी में जी.पी.एस.आधारित क्लॉक कंट्रोलर, स्टेपर मोटरयुक्त मैकेनिज्म इकाई, डायल, घंटे तथा मिनट के कांटे, एम्पलीफायर, चार लाऊडस्पीकर व बैटरी लगी है.
नगरघड़ी में छत्तीसगढ़ की 24 लोकधुनों को संयोजित कर लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में किया गया प्रयास शायद पूरे विश्व में एक अनूठा और कभी ना टूट सकने वाला अनोखा रिकार्ड है. नगरघड़ी में हर घंटे बजने वाली लोकधुन पूरे छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति है. नगरघड़ी में नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाने की अवधारणा एवं स्थापना में पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस के नेतृत्व में पूर्व उपाध्यक्षव्दय श्री श्रीचंद सुन्दरानी व श्री वर्धमान सुराना, पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एम.डी.दीवान, कार्यपालन अभियंता श्री पी.आर.नारंग, सहायक यंत्री श्री योगेशचन्द्र साहू, उपअभियंता श्री अजीत सिंह जब्बल तथा जनसंपर्क अधिकारी श्री तेजपाल सिंह हंसपाल की विशेष भागीदारी रही है.

Aug 4, 2009

आरडीए ने रायपुरा में आम के 17 वृक्षों को क्रेन से दूसरे स्थान पर लगाया

रायपुर, 04 अगस्त 2009. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण ने आज रायपुरा योजना में 17 आम के वृक्षों को आमोद प्रमोद के लिए सुरक्षित स्थान पर 80 फुट चौड़ी सड़क के किनारे स्थानांतरित किया. सड़कों तथा निर्माणाधीन डुप्लेक्स भवनों के बीच में आने के कारण इन वृक्षों को हटाना जरूरी हो गया था. यहां कुल 34 वृक्षों को स्थानांतरित किया जाएगा. प्राधिकरण की यह पहली योजना है जिसमें लगभग 12 फुट ऊंचे वृक्षों को क्रेन की मदद से जड़ सहित उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर लगाया गया है.

प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया की पहल पर वृक्षों को काटने की बजाय उसे चौड़ी सड़क के किनारे लगाने का निर्णय लिया गया था. रायपुरा में प्राधिकरण की पहली डुप्लेक्स योजना इन्द्रप्रस्थ के अन्तर्गत 302 भवनों का निर्माण किया जा रहा है. प्राधिकरण के सहायक उद्यान अधीक्षक श्री डी.पी. वर्मा ने वृक्षों को स्थानांतरित करने के संबंध में बताया कि इन्द्रप्रस्थ योजना में साढ़े 18 एकड़ क्षेत्र आमोद प्रमोद के लिए आरक्षित है. योजना के इस क्षेत्र की 80 फुट चौड़ी सड़क के किनारे स्थानांतरित किए गए आम के वृक्ष 5 साल पुराने हैं तथा इनकी ऊंचाई 10 से 12 फुट है. आम के यह वृक्ष लंगड़ा, दशहरी, बैगनफली व सुन्दरजा प्रजाति के हैं. वृक्षों के स्थानांतरण के लिए प्राधिकरण द्वारा पिछले तीन हफ्ते से तैयारी की जा रही थी. 5 फुट लंबे चौड़े और 4 फुट गहरे नए गढड़ों में वृक्षों को लगाने के बाद गोबर की डी कम्पोस्ट खाद डाली जा रही है. श्री वर्मा के अनुसार बागवानी की तकनीक के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सभी वृक्ष पूर्ण रुप से एक माह में पोषित हो जाएगें.

उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण की साढ़े 46 एकड़ में बन रही इस डुप्लेक्स योजना में भवनों की लागत लगभग 16.52 लाख रुपए से 30.64 लाख रुपए है. योजना में चौड़ी सड़के, उच्च स्तरीय जलागार, रेन वाटर हारवेस्टिंग, विद्युत सब स्टेशन, संपूर्ण योजना के साथ हर भवन की बाऊन्ड्रीवाल तथा आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण तथा सुन्दर उद्यान का प्रावधान किया गया है.

हीरापुर के फ्लैट्स में चल रही दो दुकानें व 12 फ्लैट्स सील

रायपुर, 04 अगस्त 2009. हीरापुर के आवासीय फ्लैट्स में दुकानें खोलकर व्यवसाय करने वाले दो फ्लैट्स को आज रायपुर विकास प्राधिकरण ने सील कर दिया.बकाया राशि वसूलने गई प्राधिकरण की टीम ने जब देखा की आवासीय उपयोग के दो फ्लैट्स में खिड़की तोड़कर उसमें शटर लगा दिया गया है और उनमें एक में किराना तथा दूसरे में सब्जी की दुकान चलाई जा रही है तब उसे सील कर दिया.दुकान चलाने वाले फ्लैट्स के मालिक लक्ष्मीप्रसाद दुबे और गुरुचरण सिंह अब वहां किसी प्रकार की दुकान नहीं चला सकेगे.उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण ने योजना में व्यावसायिक उपयोग के लिए दुकाने भी बनाई है.
बकाया वसूली अभियान के अन्तर्गत हीरापुर स्थित डॉ.श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अन्तर्गत 12फ्लैट्स मालिकों द्वारा बार-बार नोटिस व मौखिक सूचना के बाद भी राशि जमा नहीं करने के कारण उनके फ्लैट्स सील किए गए.जिन व्यक्तियो के फ्लैट्स सील किए गए हैं उनमें सागर सिंग, अमानत हुसैन, आशुतोष, संतोष मिश्रा, प्रकाश कुमार, श्रीमती पूनम केसवानी, मोहम्मद फजल, श्रीमती शीला चौरसिया, सुलतान अली, शमशेर सिंह, श्रीमती बीना, शैलेश पटेल शामिल हैं. लगातार चल रहे वसूली अभियान के कारण अब बकायादार प्राधिकरण कार्यालय में आकर राशि जमा कराने लगे है.

Jul 28, 2009

न्यू राजेन्द्रनगर से आरडीए ने 17 लाख वसूले 3 फ्लैट्स सील









रायपुर, 28 जुलाई 2009. वसूली अभियान के अन्तर्गत रायपुर विकास प्राधिकरण ने आज साढ़े 17 लाख रुपए की वसूली की. न्यू राजेन्द्रनगर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे फ्लैट्स के बकायादारों ने स्थल पर ही राजस्व शाखा के कर्मचारियों को नगद व चैक के रुप में राशि जमा कराई. तीन आवंटितियों द्वारा राशि जमा नहीं किए जाने के कारण उनके फ्लैट्स में ताला लगा कर सील किया गया.
जिनके फ्लैट्स सील किए गए उनमें नताशा लाहेजा, सोनू सिंह व अमितेश ठक्कर शामिल हैं. प्राधिकरण की इस योजना में बकायादारों से लगभग 43 लाख रुपए की राशि लेना बाकी है. प्राधिकरण का अमला कल पुनः इस योजना में फिर वसूली करेगा. इसके बाद कटोरातालाब योजना के मैथिलीशरण गुप्त अपार्टमेंट और शैलेन्द्रनगर योजना के पंकज विक्रम अपार्टमेंट और इंदिरा मार्केट (बॉम्बे मार्केट) में वसूली दल जाएगा.

Jul 27, 2009

हीरापुर में 17 फ्लैट्स पर आरडीए ने लगाए ताले

कुशाभाऊ ठाकरे फ्लैट्स न्यू राजेन्द्रनगर में कल से वसूली
रायपुर, 27 जुलाई 2009. बकाया राशि वसूली अभियान के अन्तर्गत रायपुर विकास प्राधिकरण ने आज हीरापुर के 17 बकायादारों के फ्लैट्स सील कर दिए. शनिवार को 14 फ्लैट्स के बाद आज सतरह बकायादारों पर की गई कार्रवाई से आवंटितियों ने राशि जमा करना शुरु कर दिया है.
वसूली के लिए हीरापुर पहुंचे प्राधिकरण के कर्मचारियों ने बकायादारों से डेढ़ लाख रुपए की वसूली की. कुछ लोगो ने प्राधिकरण कार्यालय में जाकर भी राशि जमा कराई. आज राजेन्द्रकुमार मारकंड़े, मोहम्मद एजाज अहमद, सुरेन्द्र शर्मा, शेख हुसैन, अशफाक हुसैन, राजेन्द्र कुमार वैष्णव, नजमा बेगम, श्रीमती गुरमीत कौर, अमित मिश्रा, तारकेश्वरी, सतेन्द्र रंगशाही, श्रीमती राधादेवी, तरुण कुमार, गुरुचरण सिंह, मोहम्मद जलीम हुसैन, सुधीर शर्मा, जहरुल हसन के फ्लैट्स में ताला लगाकर सील किया गया. प्राधिकरण को हीरापुर के चार सौ फ्लैट्स से लगभग 75 लाख रुपए वसूल करना है. कल प्राधिकरण के राजस्व कर्मचारियों का दल न्यू राजेन्द्रनगर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे आवास योजना के 108 फ्लैट्स के आवंटितियों से बकाया राशि की वसूली करेगा.

Jul 25, 2009

आरडीए ने हीरापुर में 14 फ्लैट्स सील किए









न्यू राजेन्द्रनगर व इंदिरा मार्केट में अगले सप्ताह होगी कार्रवाई
रायपुर, 25 जुलाई 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण ने आज हीरापुर में फ्लैट्स के बकायादारों द्वारा राशि जमा नहीं किये जाने पर 14 फ्लैट्स को सील कर दिया. प्राधिकरण की राजस्व शाखा ने पहले कई बार इन बकायादारों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने की सूचना दी थी. बार बार सूचना देने के बाद भी राशि जमा नहीं करने पर प्राधिकरण ने कार्रवाई की. बकाया राशि वसूली अभियान में अगले सप्ताह प्राधिकरण द्वारा न्यू राजेन्द्रनगर और इंदिरा मार्केट में वसूली की कार्रवाई की जाएगी.
प्राधिकरण के राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना हीरापुर पहुंचने पर पाया गया कि वहां के कई फ्लैट्स में ताला लगा हुआ है तथा पूर्व में चस्पा की गई नोटिस लगी हुई है. इसके बावजूद बकायादारों ने राशि जमा नहीं की है. इसलिए ऐसे बंद पड़े 14 फ्लैट्स में ताला लगा कर उसे सील कर दिया गया. आज सुब्रत कुमार कश्यप, गिरधारीलाल परमार, शाकिर अहमद, बद्रीप्रसाद शर्मा, पम्मी दम्मोहे, सिध्दार्थ कानखेड़े, नीलेश नेमा, कविता रीतेश गोहिल, श्रीमती नसीमा बानों, विनिता अनुरागी, रमेश कुमार अग्रवाल, अमित गोयल, कौसर अली, श्रीमती बरखा रानी के फ्लैट्स सील किए गए. राजस्व विभाग के अनुसार हीरापुर के लगभग 4 सौ फ्लैट्स पर लगभग 75 लाख रुपए बकाया है. इसी प्रकार कुशाभाऊ ठाकरे आवास योजना न्यू राजेन्द्रनगर के फ्लैट्स मालिकों से लगभग 70 लाख रुपए तथा इंदिरा मार्केट के व्यावसायियों से लगभग 24 लाख रुपये की वसूली किया जाना है.उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने ट्रांसपोर्टनगर के बकायादारों द्वारा राशि जमा नहीं करने पर 31 जुलाई के बाद भूखंड निरस्त करने की कार्रवाई कर राशि राजसात करने तथा भूखंडों को पुनः नियमानुसार विक्रय करने की कार्रवाई करने के भी निर्देश राजस्व शाखा को दिया है.

Jul 24, 2009

वसूली के लिए आरडीए की कालोनियों में लगेगें कैम्प


बकाया न देने पर फ्लैट्स पर लगेगें ताले, भूखंड होगें निरस्त

रायपुर, 24 जुलाई 2009. आरडीए अब बकायादारों से राशि वसूलने अपनी कालोनियों में कैम्प लगाकर वसूली करेगा. प्राधिकरण प्रशासन ने बार बार सूचना देने के बावजूद राशि जमा नहीं करने वाले बड़े बकायादारों के मकानों को सील करने तथा ट्रांसपोर्टनगर के बकायादारों द्वारा राशि जमा नहीं करने पर 31 जुलाई के बाद भूखंड निरस्त करने के निर्देश राजस्व विभाग को दिए है।

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने कल राजस्व शाखा की एक समीक्षा बैठक के दौरान बकाया राशि वसूलने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन आवंटितियों ने बकाया राशि का भुगतान निर्धारित समय के बावजूद नहीं किया है उनसे पूरी राशि सरचार्ज सहित वसूली जाए. बैठक में बताया गया कि आंवटितियों को कई बार राशि जमा करने की लिखित सूचना और समय दिया गया है किन्तु उनके द्वारा राशि जमा नहीं की जा रही है।

हीरापुर में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अन्तर्गत कई फ्लैट्स मालिकों ने लंबे समय से राशि जमा नहीं की है तथा आवंटितियों के फ्लैट्स भी बंद पड़े हैं. इसलिए ऐसे आंवटितियों के फ्लैट्स को ताला लगा कर सील कर दिया जाएगा. रावांभाठा ट्रांसपोर्टनगर में कई भूखंड़धारियों ने कई बार सूचना देने के बावजूद राशि जमा नहीं की है इसलिए उनके भूखंड 31 जुलाई के बाद निरस्त कर राशि राजसात कर ली जाएगी तथा इन भूखंडों को पुनः नियमानुसार विक्रय करने की कार्रवाई की जाएगी.

Jul 15, 2009

आरडीए के खाली भूखंड़ो के विक्रय पर प्रतिबंध

14 हजार एकड़ में 8 टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम को संचालक मंडल की स्वीकृति

रायपुर, 14 जुलाई 2009. आरडीए के खाली भूखंडो को विक्रय की अब अनुमति नहीं दी जाएगी. 31 अक्टूबर तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं करने पर ऐसे भूखंड निरस्त कर पुनर्प्रवेश की कार्रवाई की जाएगी. भूखंडों को फ्रीहोल्ड करने के मामले में तैयार किया गया प्रस्ताव राज्य शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा. आठ नई टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम तथा टाटीबंध में ट्रांसपोर्टनगर योजना के संबंध में राज्य शासन से अनुमति ली जाएगी. यह निर्णय कल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज ने की.
संचालक मंडल द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार प्राधिकरण की योजनाओं में खाली पड़े भूखंड़ों पर 31 अक्टूबर 2009 तक का निर्माण नहीं करने पर भूखंड का आवंटन निरस्त कर उस पर पुनर्प्रवेश कर लिया जाएगा. योजनाओं में खाली पड़े भूखंडों को विक्रय की अब अनुमति नहीं दी जाएगी.
प्राधिकरण की कालोनियों के भूखंड को फ्रीहोल्ड करने के मामले में संचालक मंडल ने तैयार किए गए प्रस्ताव को राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया. प्रस्ताव के अनुसार भूखंडों को 30 वर्ष के स्थान पर अब 99 वर्ष की लीज अवधि पर दिया जाएगा तथा बची अवधि पर वर्तमान दर पर भू भाटक निर्धारित कर एक मुश्त राशि ली जाएगी. शासकीय भूमि को भी फ्रीहोल्ड करने के संबंध में शासन से अनुरोध किया जाएगा.
संचालक मंडल ने आठ नई टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम तथा टाटीबंध में ट्रांसपोर्टनगर योजना हेतु अनुशंसा करते हुए शासन से स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है. इसके अनुसार लगभग 14 हजार एकड़ में आठ सेक्टरों पर टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत भूखंड़ो का पुनर्गठन किया जाएगा. टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत सेक्टर एक में टाटीबंध, सरोना एवं रायपुरा, सेक्टर दो में भाठागांव, चंगोराभाठा एवं मठपुरैना, सेक्टर तीन में बोरियाखुर्द, मठपुरैना व डूंडा, सेक्टर चार में डूंडा, टिकरापारा, बोरियाखुर्द, देवपुरी व डूमरतराई, सेक्टर पांच में देवपुरी, डुमरतराई, फुंडर एवं अमलीडीह, सेक्टर छह में लाभांडीह, जोरा, तेलीबांधा, एवं शंकरनगर, सेक्टर सात में मोवा, दलदल सिवनी एवं सड्ढू तथा सेक्टर आठ में कचना, पिरदा व सकरी को शामिल किया गया है. टाटीबंध में लगभग 200 एकड़ पर मास्टर प्लान में भूउपयोग के अनुसार ट्रांसपोर्टनगर विकसित किया जाएगा. टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम हेतु प्रस्ताव को शासन से अनुमति मिलने के बाद राजपत्र में इसका प्रकाशन कराया जाएगा. इन स्कीमों के अन्तर्गत सबसे पहले सेक्टर चार में शामिल डूंडा, टिकरापारा, बोरियाखुर्द, देवपुरी व डूमरतराई को सबसे पहले पायलेट परियोजना के अन्तर्गत शुरु किया जाएगा.
संचालक मंडल की इस बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस. बजाज, मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री अमित कटारिया,नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक श्री वी.पी. मालवीय व के.पी.वाजपेयी तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के अधीक्षण अभियंता श्री एच. के. चन्दनिहा उपस्थित थे.

Jul 8, 2009

कॉलोनी नहीं टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम बना रहा है आरडीए – श्री कटारिया

रायपुर, 08 जुलाई 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण ने कहा है कि वह किसी एक कालोनी का निर्माण नहीं कर रहा है वरन मास्टर प्लॉन के अनुसार रायपुर शहर के लिए टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम पर कार्य कर रहा है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने कहा है कि प्राधिकरण शहर विकास के लिए बनाए गए मास्टर प्लॉन में दिए गए भूउपयोग के प्रावधानों के अनुरुप टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के माध्यम से राजधानी के सुव्यवस्थित बसाहट की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए किसी की भूमि अर्जित नहीं की जाएगी.

श्री कटारिया ने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के अनुसार टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत प्राधिकरण प्लॉटों का पुनर्गठन कर भूमि के निर्धारित उपयोग के अनुसार विकास का कार्य करेगा. प्राधिकरण नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 49 व 50 के अन्तर्गत नगर विकास स्कीम के क्रियान्वयन का कार्य कर रहा है. इन धाराओं के अन्तर्गत भूमि के पुनर्गठन का स्पष्ट प्रावधान है. इसके अन्तर्गत भवनों, मार्गों, नालियों, मल वहन लाइनों तथा अन्य वैसी सुख-सुविधाओं के प्रयोजन के लिए प्लाटों का पुनर्गठन का कार्य राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से आरंभ किया जा सकता है.

प्लाटों का पुनर्गठन हेतु प्राधिकरण द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, रायपुर से अभिन्यास अनुमोदित करवाया जाएगा. इसके साथ ही भूस्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर अनुबंध कर सड़क, नाली, पेयजल व विद्युत की बुनियादी सुविधाओं सहित उद्यान, खुले क्षेत्र व अन्य अधोसंरचनाओं का विकास किया जाएगा. अधोसंरचना के विकास के लिए राशि की व्यवस्था योजना की व्यावासायिक व अन्य भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि मे से किया जाएगा. शेष बची विकसित भूमि भूस्वामियों को बिना विकास शुल्क लिए वापस कर दी जाएगी जो कम से कम तीस प्रतिशत तक होगी. छत्तीसगढ़ शासन के नियम के अनुसार ऐसे अभिन्यास में आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए भूखंड अथवा निर्मित मकान देने का भी प्रावधान है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि योजना में गरीबों को भी भूमि मिलेगी. भू उपयोग के अनुसार योजना की व्यावसायिक भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि से अधोसंरचना का विकास किया जाएगा.

श्री कटारिया ने कहा कि गुजरात के अहमदाबाद शहर के विकास के लिए 1979 से नगर विकास स्कीम का क्रियान्वयन किया जा रहा है और वहां लगभग ऐसी एक सौ टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम पूर्ण हो चुकी है. अहमदाबाद में टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम भी मूलतः भूखंडों के पुनर्गठन से संबंधित है. वहां विकास प्राधिकरण ने भूस्वामियों की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया है. स्कीम में भूस्वामियों से अनुबंध कर पूरे क्षेत्र का विकास करते हुए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है तथा भूस्वामियों से उनको वापस दिए जाने वाले भूखंड के लिए विकास शुल्क लिया जाता है. प्लॉटों के पुनर्गठन के इस कार्य को वहां की जनता ने बड़े ही हर्ष से स्वीकार किया है. वहां के अधिकारी बताते हैं कि भूस्वामी स्वयं उनके पास आते हैं और अपनी भूमि प्राधिकरण को देते हैं ताकि उनकी भूमि नगर विकास स्कीम के अन्तर्गत शामिल हो जाए तथा क्षेत्र का विकास होने से उन्हें भी आर्थिक लाभ हो. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम में शामिल भूस्वामियों पर इस बात का कोई बंधन नहीं होगा कि वे अपनी भूमि किसी को नहीं बेच सकते वरन वे इस बात के लिए स्वतंत्र होंगे कि वे किसी को भी अपनी भूमि का विक्रय कर सकें तथा उसमें मास्टर प्लॉन में उल्लेखित भूउपयोग के अनुसार मानचित्र सक्षम अधिकारी से अनुमोदित करवा कर अपने भूखंड का विकास और उस पर निर्माण कर सकें.
छत्तीसगढ़ शासन का नगर तथा ग्राम निवेश विभाग नगर विकास की योजना अर्थात मास्टर प्लॉन तैयार करने का कार्य करता है. जबकि नियम के अनुसार रायपुर विकास प्राधिकरण का गठन स्‍थानीय प्राधिकारी के रूप में मास्टर प्लॉन को क्रियान्वित करने के लिए किया गया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का भी यह मानना है कि रायपुर नगर में बुनियादी अधोसंरचनाओं के विकास नहीं होने शहर का अनियमित रुप से विकास हुआ है. इसलिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सुव्यवस्थित और बेहतर जीवन के लिए टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम का क्रियान्वयन आवश्यक हो गया है. इसलिए गुजरात के शहरी विकास के अनुभव के आधार पर रायपुर विकास प्राधिकरण राजधानी रायपुर के सुव्यवस्थित विकास और राज्य़ शासन के सुशासन की नीति के आधार पर टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम क्रियान्वयन की दिशा में कार्य कर रहा है जो लोकहित में है तथा एक कल्याणकारी योजना है.