* रायपुर शहर विकास की संस्था * * 1963 से कार्यरत संस्था * * लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस * * इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस से सम्मानित
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Dec 31, 2009
रायपुरा - बोरियाखुर्द फ्लैट्स की राशि जमा करने की अंतिम तिथि 8 जनवरी तक बढ़ी
Nov 9, 2009
Nov 6, 2009
रायपुरा फ्लैट्स की लॉटरी से दमके चेहरे
Nov 5, 2009
गरीबों के मकान की लॉटरी कल - परसों शहीद स्मारक भवन में
देवेन्द्रनगर के आठ भूखंडों पर अवैध निर्माण हटे
Nov 4, 2009
कमल विहार शासन की योजना – श्री राजेश मूणत
Nov 3, 2009
रायपुर विकास प्राधिकरण की नई टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम - कमल विहार -
• शहर विस्तार से समस्याएं भी बढ़ी हैं.
• रायपुर शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए पहले जो नगर विकास योजनाएं बनाई गई थी उन योजनाओं का सही दिशा में क्रियान्वयन नहीं हो पाया. इस कारण राययपुर का समुचित विकास नहीं हो सका.
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• शहर में ऐसी हैं समस्याएं
• रायपुर शहर के खमतराई, भनपुरी, रामनगर जैसे कई नए क्षेत्र आज सकरी सड़कों, अव्यवस्थित बसाहट होने, पानी एवं नालियों के अभाव और गंदगी के कारण काफी बदतर स्थिति में हैं.
• आवासीय, कृषि एवं अन्य उपयोग की भूमि पर अवैध तथा सुविधाहीन कालोनियों के निर्माण से नागरिकों की समस्याएं बढ़ी हैं.
• राजधानी बनने के बाद से रायपुर की आबादी तेजी से बढ़ी है.
• बढ़ती आबादी के अनुपात में आवासीय, व्यावसायिक एवं सार्वजनिक एवं सामाजिक सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं.
• सुविधाएं नहीं बढ़ने से नागरिकों की परेशानियां विकराल स्वरूप में उभर रही है.
• इन्हीं समस्याओं के निराकरण की दिशा में रायपुर विकास प्राधिकरण 8 टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम तैयार कर रहा है.
• रायपुर विकास प्राधिकरण जनभागीदारी से शहर का विकास करना चाहता है.
• इस दिशा में तैयार की गई टॉऊन डेव्लपमेंट स्कीम एक जांची परखी योजना है.
• योजना की डिजाइन एवं वित्तीय आंकलन हेतु कई स्तरों पर विशेषज्ञों द्वारा व्यापक अध्ययन किया गया है ताकि योजना का स्वरुप व्यवहारिक हो.
एक नई पहल
• रायपुर विकास प्राधिकरण शहर विकास की दिशा में टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम अर्थात नगर विकास योजना के माध्यम से विकास की दिशा में एक नई पहल कर रहा है.
• प्राधिकरण द्वारा इन योजनाओं को छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 में दिए गए प्रावधानों के अनुरुप प्रस्तावित किया गया है.
• रायपुर विकास प्राधिकरण शहर विकास के लिए 8 नई योजनाएं तैयार कर रहा है. इनमें से सबसे पहले कमल विहार इन्टीग्रेटेड टॉऊनशिप योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है. ये योजनाएं रायपुर विकास योजना पुनर्विलोकित 2021 अर्थात मास्टर प्लॉन के अनुसार तैयार की जा रही हैं.
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• रायपुर शहर की सुव्यवस्थित एवं सुविधायुक्त बसाहट के लिए बनाई जा रही 8 नगर विकास योजनाओं में से पहली पायलट योजना के रुप में प्राधिकरण द्वारा टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम – 04
विकास योजना की प्रक्रिया
प्रक्रिया – 02 : योजना की सीमा निर्धारण
प्रक्रिया – 03 :
(अ) खसरा सीमा का अकंन एवं सूची तैयार करना.
(ब) खसरा क्षेत्रफल की गणना.
(स) प्रकाशन के लिए प्रारुप योजना तैयार करना.
प्रक्रिया – 04 : योजना क्षेत्र में मास्टर प्लॉन के अनुसार सड़कों का अकंन.
प्रक्रिया – 05 :
(अ) योजना क्षेत्र में नए मुख्य मार्गो का प्रस्ताव
(ब) सेक्टरों की सीमा का निर्धारण
प्रक्रिया – 06 : सेक्टरों में आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत,सामाजिक एवं आमोद – प्रमोद व अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए योजना का आंकल्पन.
प्रक्रिया – 07 : भूखंडों का पुनर्गठन
(अ) प्रत्येक भूस्वामी की भूमि के बदले दिए जाने वाले भूखंड की गणना कर सूची तैयार करना.
(ब) सेक्टर का अभिन्यास तैयार कर भूस्वामियों को दिए जाने वाले भूखंड का अकंन (मूल भूमि अथवा उसके नजदीक)
प्रक्रिया – 08 : सेक्टर अभिन्यास तैयार कर खसरा नक्शे में चिन्हांकन.
प्रक्रिया – 09 : सेक्टर का विस्तृत अभिन्यास
ग्रिड पध्दति पर आधारित अभिन्यास
अधिक्तम भू उपयोग का अभिन्यास.
सुविधाजनक परिचालन पथ.
प्रमुख मार्गों से सीधे प्रवेश के बदले अन्य सुरक्षित मार्गों से प्रवेश.
• अभिन्यास की स्वीकृति के साथ ही भू स्वामियों को उनकी मूल भूमि के बदले 35 %विकसित भूखंड दिया जाएगा.
• सभी भूस्वामी को दिए जाने वाले आवासीय भूखंड को सीधे सड़क उपलब्ध होगी.
• आमोद – प्रमोद, हरित क्षेत्र एवं सार्वजनिक व अर्ध्द सार्वजनिक क्षेत्र के भूस्वामियों को भी आवासीय भूखंड दिए जाएंगे.
• मूल भूमि का उपयोग व्यावसायिक होने पर भूस्वामी को 35% व्यावसायिक भूमि का भूखंड दिया जाएगा.
• योजना क्षेत्र - ग्राम डूंडा,टिकरापारा,बोरियाखुर्द, देवपुरी तथा डूमरतराई के भाग
• सेक्टर की संख्या - 15
• अनुमानित लागत - लगभग 900 करोड रुपए
• योजना अवधि - 5 वर्ष
• भूखंड का न्यूनतम आकार - 40 वर्गमीटर (430 वर्गफुट)
योजना स्तर पर
(1) योजना क्षेत्र में मास्टर प्लान में प्रस्तावित समस्त मार्ग रिंग रोड नं. 4 एवं बायपास मार्ग.
(2) जल प्रदाय हेतु फिल्टर प्लांट, राइजिंग मेन एवं ओवर हैड टैंकों निर्माण
(3) समस्त मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था.
(4) आमोद-प्रमोद हेतु आरक्षित लगभग 245 एकड़ क्षेत्र (बोरिया तालाब सहित) का विकास कार्य.
सेक्टर स्तर पर
(1) सड़कों का निर्माण.
(2) नाली, पुलियों एवं सर्विस डक्ट का निर्माण.
(3) पेयजल व्यवस्था.
(4) बाह्य विद्युतीकरण सब स्टेशन निर्माण सहित.
(5) विकेन्द्रीकृत ट्रीटमेंट प्लांट सीवर लाइन सहित.
(6) उद्यानों का विकास.
(ब) योजना क्षेत्र के भूस्वामियों से विकास के मद में यथासंभव न्यूनतम राशि ली जाना प्रस्तावित है.
(ब) विकसित भूखण्डों का मूल्यांकन योजना क्षेत्र की भूमियों के औसत दर एवं लोकेशन के आधार पर किया जा रहा है.
(2) योजना क्षेत्र में पूर्व से निर्मित संरचनाओं से एवं अनुमोदित कॉलोनियों के स्वामियों से आंशिक विकास शुल्क लिया जाना प्रस्तावित है
(2) बडे़ भूस्वामियों को भूखंडों को विकसित करते समय अथवा भवन निर्माण के समय आर्थिक रुप से कमजोर (EWS) वर्ग के लिए भूमि एवं सामुदायिक खुले क्षेत्र छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी.
(3) नगर विकास योजना के क्रियान्वयन से भूमिस्वामियों को उनके विकसित भूखण्डों की कीमतों में लगभग तीन से चार गुना या उससे भी ज्यादा वृद्धि होने की संभावना है.
(4) योजना के अंतर्गत भूस्वामियों को यथासंभव उनकी मूल भूमि के समीप पुनर्गठित विकसित भूखंड उपलब्ध कराया जाएगा. हर भूखंड को सड़क उपलब्ध होगी.
(5) भूमिस्वामियों को प्राप्त होने वाले विकसित भूखण्ड पूर्णतः फ्रीहोल्ड होंगे.
(6) भूस्वामियों को प्राप्त होने वाले भूखंड पर आसानी से ऋण उपलब्ध होगा.
(7) योजना का क्षेत्र सुव्यवस्थित एवं नागरिक सुविधायुक्त होगा.
(2) आमोद – प्रमोद के लिए 245 एकड़ (वृहद स्तर ) का भूमि प्रावधान.
(3) सार्वजनिक व अर्ध्दसावर्जनिक उपयोग हेतु 57 एकड़ भूमि का प्रावधान.
(4) भूखंड का पूर्णतः फ्रीहोल्ड होना.
(5) उच्च स्तरीय अधोसंरचना विकास .
(6) छ्त्तीसगढ़ शासन द्वारा स्वीकृत योजना.
• रायपुर विकास प्राधिकरण अपने दायित्व के अनुसार देश की सबसे बेहतर टॉऊन डेव्हलमेंट योजना का क्रियान्यवन कर नागरिकों को बेहतर जीवन के लिए नागरिक सुविधाएं देने तत्पर है.
• आप नागरिकों का सहयोग रायपुर को बेहतर व्यस्थित और सुन्दर बनाएगा.
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Nov 2, 2009
कमल विहार योजना के भूखंड फ्रीहोल्ड रहेंगे
Oct 31, 2009
आरडीए के अधीक्षक गणेशराम यदु सेवानिवृत
Oct 30, 2009
कमल विहार में सीबीडी सहित कई नागरिक सुविधाएं
Oct 29, 2009
गरीबों के फ्लैट्स की लाटरी 6 व 7 को शहीद स्मारक भवन में
ट्रांसपोर्टनगर में विशेष शिविर की अवधि दो दिन बढ़ी 31 अक्टूबर तक निर्माण करे अन्यथा आवंटन रद्द होगा
कमल विहार के भूस्वामियों के साथ आरडीए का संवाद 3 नंवबर को शहीद स्मारक भवन में
Oct 28, 2009
900 करोड की होगी कमल विहार योजना
विवरण अहमदाबाद अरबन रायपुर
भूस्वामियों को दिए जाने 50 35
गरीबों के लिए आरक्षित भूखंड 5 15
Oct 26, 2009
31 अक्टूबर तक ट्रांसपोर्टनगर में निर्माण शुरु नहीं करने पर भूखंड निरस्त होंगे
Oct 23, 2009
एलपीजी शवदाह गृह का संचालन करेगा बढ़ते कदम
- जनभागीदारी बढ़ाने आरडीए का निर्णय
- बढ़ते कदम करेगा एलपीजी शवदाह गृह संचालन
कमल विहार योजना का प्रारुप तैयार
Oct 3, 2009
किशोर कुमार सहगल का निधन
Sep 17, 2009
ब्याज दर में कमी का लाभ हितग्राहियों को देगा आरडीए
सृष्टि के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर आरडीए ने की पूजा
Aug 28, 2009
इन्द्रप्रस्थ में बनते हुए मकान को देख सकेगें पंजीयनकर्ता
अवलोकन और लेगा सुझाव
प्राधिकरण प्रशासन के अनुसार जिन पंजीयनकर्ताओं ने रायपुरा में निर्माणाधीन 302फ्लैट्स का पंजीयन कराया है उन्हें अपने मकान के निर्माण की गुणवत्ता देखने और भावनात्मक रुप से जोड़ने के लिए यह कदम उठाया है.डुप्लेक्स मकानों की इस योजना के निर्माण स्थल पर सहायक अभियंता हर शनिवार प्रातः 11 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक स्थल पर उपलब्ध रहेंगे. पंजीयनकर्ता अवलोकन के दौरान अपने अभिमत व सुझाव स्थल पर उपलब्ध पंजी में नोट भी कर सकेंगे.
उल्लेखनीय है कि रायपुरा के 46एकड़ भूमि में प्राधिकरण की पहली डुप्लेक्स योजना इन्द्रप्रस्थ के अन्तर्गत 302 भवनों का निर्माण किया जा रहा है. प्रथम आया – प्रथम पाया के आधार पर पंजीयन किए गए 302 भवनों में से 81 भवन आरक्षित श्रेणी के लिए है तथा शेष 221 भवन सामान्य वर्ग के लिए है. आठ श्रेणियों में तीन से पांच कमरों वाले डुप्लेक्स भवनों की लागत लगभग 16.52 लाख रुपए से 30.64 लाख रुपए है. 1097 से 1958 वर्गफुट क्षेत्र में निर्मित होने वाले डुप्लेक्स भवनों की इस योजना में चौड़ी सड़के, उच्च स्तरीय जलागार, रेन वाटर हारवेस्टिंग, विद्युत सब स्टेशन, संपूर्ण योजना में हर भवन की बाऊन्ड्रीवाल तथा आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण तथा सुन्दर उद्यान का भी प्रावधान किया गया है.
Aug 21, 2009
नगरघड़ी लिमका बुक और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में शामिल

नगरघड़ी ने बनाया कभी ना टूटने वाला रिकार्ड
रायपुर, 21 अगस्त 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 1995 में निर्मित नगरघड़ी को दोहरा अवार्ड मिला है. भारत की जानी - मानी लिमका बुक ऑफ रिकार्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस ने इसे अपनी पुस्तक में शामिल किया है. रायपुर की नगरघड़ी पूरे भारत की ऐसी पहली संरचना है जिसे हर घंटे बजने वाली छत्तीसगढ़ी धुनों की अवधारणा के कारण इसे लिमका बुक आफ रिकार्ड्स 2009 तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस 2009 में शामिल किया गया है. लिमका बुक के बीसवें संस्करण के मानव कथा अध्याय में नगरघड़ी को “ गाता हुआ घंटाघर ” तथा अंग्रेजी संस्करण में “ सिंगिंग क्लॉक टॉवर ” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है जबकि इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस के आगामी अक्टूबर के अंक में इसे शामिल किया जाएगा. इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस ने गत 16 अगस्त को नई दिल्ली के एयरफोर्स आडिटोरियम में आरडीए को एक ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया है.
प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार नगरघड़ी का लिमका बुक ऑफ रिकार्ड तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में शामिल होना पूरे छत्तीसगढ़ और राजधानी के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग के अन्तर्गत निगमित निकाय के रुप में कार्यरत संस्था रायपुर विकास प्राधिकरण की यह उपलब्धि प्रदेश को पूरे देश में गौरवान्वित करेगी. उन्होंनें कहा कि नगरघड़ी में 24 घंटे में 24 छत्तीसगढ़ी धुन बजने का यह एक ऐसा रिकार्ड है जो कभी नहीं टूट सकता. इसका कारण है कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं यदि कोई 24 से ज्यादा धुन बना भी लेता है तो वह प्रासंगिक नहीं होगा क्योंकि एक दिन में 24 से ज्यादा घंटे हो ही नहीं सकते. इसलिए नगरघड़ी का यह रिकार्ड कभी ना टूटने वाला रिकार्ड बन गया है. उल्लेखनीय है कि लिमका बुक ऑफ रिकार्डस भारत के आश्चर्यजनक और असाधारण उपलब्धियों वाले रिकार्डस की ऐसी पुस्तक है जिसे भारत में विश्व प्रसिद्ध गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त है. 1990 में पहली बार इसे मुंबई में प्रकाशित किया गया था. पुस्तक का उद्देश्य आम भारतीय लोगों की उपलब्धियों और आश्चर्यजनक कारनामों को एक मंच प्रदान करना है. हर वर्ष प्रकाशित होने वाली इस पुस्तक के अब तक इसके 20 अंक प्रकाशित हो चुके हैं. इस पुस्तक में हर वर्ष देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली व्यक्तियों के नामों को घोषणा की जाती है. साथ ही मानव कथा, साहसिक कार्य, शिक्षा, संचार, रेडियो, टेलीविजन, साहित्य, चित्रकला, नृत्य एवं संगीत, चलचित्र एवं रंगमंच, सरकार, परिवहन, चिकित्सा विज्ञान, विकास, प्रकृति एवं कृषि, पशु क्ल्याण, खेलकूद जैसे विषयों पर भारत में बने कई रिकार्ड और आश्चर्यजनक जानकारियां उपलब्ध है. यह पुस्तक अंग्रेजी, हिन्दी तथा मलयालम में भी छपती है. जबकि इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस गिनीज बुक ऑफ रिकार्डधारी मेमोरी गुरु श्री विश्वस्वरुपराय चौधरी का प्रकाशन है जो हाल के कुछ वर्षो से प्रकाशित हो रही है.
19 दिसंबर 1995 को रायपुर के कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने 50 फुट ऊंचे स्तंभ पर नगरघड़ी की स्थापना की गई थी. छह फुट व्यास वाले घड़ी के डायल के पीछे मैकेनिकल पद्धति से चलने वाली घड़ी में हर घंटा पूरा होने के बाद इसके बुर्ज में लगे पीतल के घंटे की आवाज गूंजती थी. इसमें दिन में एक बार चाबी भी भरनी पड़ती थी. मैकेनिकल घड़ी के बार – बार तकनीकी खराबी आने के कारण 26 जनवरी 2008 को रायपुर विकास प्राधिकरण ने एक नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाई जो अतंरिक्ष के सेटेलाईट से संकेत प्राप्त कर जी.पी.एस. (ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम) प्रणाली से सही समय बताती है. अब यह हर घंटे छत्तीसगढ़ की एक लोकप्रिय मधुर लोकधुन सुनाती है
दरअसल जी.पी.एस.पध्दति सही समय जानने की एक नई तकनीक है जो सेना द्वारा अपनाई जाती थी बाद में इसे भारतीय रेल विभाग में भी लागू किया गया ताकि पूरे देश में एक सा समय रहे. रायपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस ने तत्समय छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को लोकप्रिय बनाने के लिए नगरघड़ी में हर घंटे के बाद बजने वाले घंटे की आवाज के पहले छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को संयोजित करने का निर्णय लिया था ताकि इससे आम आदमी भी लोकधुनों से परिचित हो सके. 26 जनवरी 2008 को नई घड़ी लगने के बाद से नगरघड़ी में हर दिन हर घंटे के बाद एक छत्तीसगढ़ी लोकधुन बजती है. चौबीस घंटे में कुल 24 अलग – अलग लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी धुनें बजती है. समय के मनोभावों के अनुरुप इन धुनों का चयन प्रदेश के लोक कलाकारों के विशेषज्ञ समिति के द्वारा किया गया है जिसमें लोक संगीत को पुरोधा माने जाने वाले श्री खुमानलाल साव, लोक गायिका श्रीमती ममता चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक श्री मोहन सुन्दरानी, लोक कला के ज्ञाता श्री शिव कुमार तिवारी और लोक कलाकार श्री राकेश तिवारी ने किया है. समिति की अनुशंसा के फलस्वरुप श्री राकेश तिवारी ने विशेष रुप से लोकधुनें तैयार की है. सुबह चार बजे से हर घंटे के बाद लगभग 30 सेकेण्ड की यह धुनें नगरघड़ी में बजती हुई छत्तीसगढ़ की लोकधुनों से आम आदमी का परिचय कराती है. रायपुर की नगरघड़ी में चौबीस घंटे चौबीस धुनें बजती है. सुबह 4:00 बजे – जसगीत, 5:00 बजे – रामधुनी, 6:00 बजे – भोजली, 7:00 बजे - पंथी नाचा, 8:00 बजे – ददरिया, 9:00 बजे – देवार, 10:00 बजे – करमा, 11:00 बजे – भड़ौनी, दोपहर 12:00 बजे - सुआ गीत, 1:00 बजे – भरथरी, 2:00 बजे - डंडा नृत्य, 3:00 बजे – फाग गीत , 4:00 बजे – चंदैनी, सांयः 5:00 बजे - पंडवानी, 6:00 बजे – राऊत नाचा, 7:00 बजे – गौरा, रात 8:00 बजे – परब, 9:00 बजे – आलहा, 10:00 बजे – नाचा, 11:00 बजे – कमार, 12:00 बजे – सरहुल, 1:00 बजे – बांसगीत, 2:00 बजे – ढ़ोलामारू , 3:00 बजे - सोहर गीत की धुनें नगरघड़ी से बजती है.
राजधानी रायपुर के ह्रदय स्थल पर बनी नगरघड़ी का 19 दिसंबर 1995 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह नें लोकार्पण किया था. हर घंटे लोकधुन सुनाने के कारण अब यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति की एक नई पहचान बन गई है. नगरघड़ी का कांक्रीट स्तंभ 50 फुट ऊंचा है. आर.सी.सी. संरचना पर आधारित नगरघड़ी की बाहरी दीवारों पर उदयपुर राजस्थान का सफेद संगमरमर तथा ग्रेनाईट लगाया गया है. इसके स्तंभ के चारों दिशाओं में छह फुट व्यास वाले डायल प्लास्टिक एक्रेलिक शीट के हैं. नगरघड़ी को बनाने में 275 दिन का समय लगा था. घड़ी के स्तंभ का निर्माण कार्य एक मार्च 1995 को शुरु कर 30 नवंबर 1995 को पूरा किया गया. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी कोचीन, केरल की टूल एंड टाईम इंजीनियरिंग कंपनी ने 90 दिनों में स्थापित की है. कंपनी ने 29 अक्टूबर 2007 को काम शुरु कर 26 जनवरी को 2008 को काम पूरा किया. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी में जी.पी.एस.आधारित क्लॉक कंट्रोलर, स्टेपर मोटरयुक्त मैकेनिज्म इकाई, डायल, घंटे तथा मिनट के कांटे, एम्पलीफायर, चार लाऊडस्पीकर व बैटरी लगी है.
नगरघड़ी में छत्तीसगढ़ की 24 लोकधुनों को संयोजित कर लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में किया गया प्रयास शायद पूरे विश्व में एक अनूठा और कभी ना टूट सकने वाला अनोखा रिकार्ड है. नगरघड़ी में हर घंटे बजने वाली लोकधुन पूरे छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति है. नगरघड़ी में नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाने की अवधारणा एवं स्थापना में पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस के नेतृत्व में पूर्व उपाध्यक्षव्दय श्री श्रीचंद सुन्दरानी व श्री वर्धमान सुराना, पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एम.डी.दीवान, कार्यपालन अभियंता श्री पी.आर.नारंग, सहायक यंत्री श्री योगेशचन्द्र साहू, उपअभियंता श्री अजीत सिंह जब्बल तथा जनसंपर्क अधिकारी श्री तेजपाल सिंह हंसपाल की विशेष भागीदारी रही है.
Aug 4, 2009
आरडीए ने रायपुरा में आम के 17 वृक्षों को क्रेन से दूसरे स्थान पर लगाया



प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया की पहल पर वृक्षों को काटने की बजाय उसे चौड़ी सड़क के किनारे लगाने का निर्णय लिया गया था. रायपुरा में प्राधिकरण की पहली डुप्लेक्स योजना इन्द्रप्रस्थ के अन्तर्गत 302 भवनों का निर्माण किया जा रहा है. प्राधिकरण के सहायक उद्यान अधीक्षक श्री डी.पी. वर्मा ने वृक्षों को स्थानांतरित करने के संबंध में बताया कि इन्द्रप्रस्थ योजना में साढ़े 18 एकड़ क्षेत्र आमोद प्रमोद के लिए आरक्षित है. योजना के इस क्षेत्र की 80 फुट चौड़ी सड़क के किनारे स्थानांतरित किए गए आम के वृक्ष 5 साल पुराने हैं तथा इनकी ऊंचाई 10 से 12 फुट है. आम के यह वृक्ष लंगड़ा, दशहरी, बैगनफली व सुन्दरजा प्रजाति के हैं. वृक्षों के स्थानांतरण के लिए प्राधिकरण द्वारा पिछले तीन हफ्ते से तैयारी की जा रही थी. 5 फुट लंबे चौड़े और 4 फुट गहरे नए गढड़ों में वृक्षों को लगाने के बाद गोबर की डी कम्पोस्ट खाद डाली जा रही है. श्री वर्मा के अनुसार बागवानी की तकनीक के आधार पर यह कहा जा सकता है कि सभी वृक्ष पूर्ण रुप से एक माह में पोषित हो जाएगें.
उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण की साढ़े 46 एकड़ में बन रही इस डुप्लेक्स योजना में भवनों की लागत लगभग 16.52 लाख रुपए से 30.64 लाख रुपए है. योजना में चौड़ी सड़के, उच्च स्तरीय जलागार, रेन वाटर हारवेस्टिंग, विद्युत सब स्टेशन, संपूर्ण योजना के साथ हर भवन की बाऊन्ड्रीवाल तथा आकर्षक प्रवेश द्वार का निर्माण तथा सुन्दर उद्यान का प्रावधान किया गया है.
हीरापुर के फ्लैट्स में चल रही दो दुकानें व 12 फ्लैट्स सील

Jul 28, 2009
न्यू राजेन्द्रनगर से आरडीए ने 17 लाख वसूले 3 फ्लैट्स सील


जिनके फ्लैट्स सील किए गए उनमें नताशा लाहेजा, सोनू सिंह व अमितेश ठक्कर शामिल हैं. प्राधिकरण की इस योजना में बकायादारों से लगभग 43 लाख रुपए की राशि लेना बाकी है. प्राधिकरण का अमला कल पुनः इस योजना में फिर वसूली करेगा. इसके बाद कटोरातालाब योजना के मैथिलीशरण गुप्त अपार्टमेंट और शैलेन्द्रनगर योजना के पंकज विक्रम अपार्टमेंट और इंदिरा मार्केट (बॉम्बे मार्केट) में वसूली दल जाएगा.
Jul 27, 2009
हीरापुर में 17 फ्लैट्स पर आरडीए ने लगाए ताले
रायपुर, 27 जुलाई 2009. बकाया राशि वसूली अभियान के अन्तर्गत रायपुर विकास प्राधिकरण ने आज हीरापुर के 17 बकायादारों के फ्लैट्स सील कर दिए. शनिवार को 14 फ्लैट्स के बाद आज सतरह बकायादारों पर की गई कार्रवाई से आवंटितियों ने राशि जमा करना शुरु कर दिया है.
वसूली के लिए हीरापुर पहुंचे प्राधिकरण के कर्मचारियों ने बकायादारों से डेढ़ लाख रुपए की वसूली की. कुछ लोगो ने प्राधिकरण कार्यालय में जाकर भी राशि जमा कराई. आज राजेन्द्रकुमार मारकंड़े, मोहम्मद एजाज अहमद, सुरेन्द्र शर्मा, शेख हुसैन, अशफाक हुसैन, राजेन्द्र कुमार वैष्णव, नजमा बेगम, श्रीमती गुरमीत कौर, अमित मिश्रा, तारकेश्वरी, सतेन्द्र रंगशाही, श्रीमती राधादेवी, तरुण कुमार, गुरुचरण सिंह, मोहम्मद जलीम हुसैन, सुधीर शर्मा, जहरुल हसन के फ्लैट्स में ताला लगाकर सील किया गया. प्राधिकरण को हीरापुर के चार सौ फ्लैट्स से लगभग 75 लाख रुपए वसूल करना है. कल प्राधिकरण के राजस्व कर्मचारियों का दल न्यू राजेन्द्रनगर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे आवास योजना के 108 फ्लैट्स के आवंटितियों से बकाया राशि की वसूली करेगा.
Jul 25, 2009
आरडीए ने हीरापुर में 14 फ्लैट्स सील किए

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न्यू राजेन्द्रनगर व इंदिरा मार्केट में अगले सप्ताह होगी कार्रवाई
प्राधिकरण के राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने आज डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना हीरापुर पहुंचने पर पाया गया कि वहां के कई फ्लैट्स में ताला लगा हुआ है तथा पूर्व में चस्पा की गई नोटिस लगी हुई है. इसके बावजूद बकायादारों ने राशि जमा नहीं की है. इसलिए ऐसे बंद पड़े 14 फ्लैट्स में ताला लगा कर उसे सील कर दिया गया. आज सुब्रत कुमार कश्यप, गिरधारीलाल परमार, शाकिर अहमद, बद्रीप्रसाद शर्मा, पम्मी दम्मोहे, सिध्दार्थ कानखेड़े, नीलेश नेमा, कविता रीतेश गोहिल, श्रीमती नसीमा बानों, विनिता अनुरागी, रमेश कुमार अग्रवाल, अमित गोयल, कौसर अली, श्रीमती बरखा रानी के फ्लैट्स सील किए गए. राजस्व विभाग के अनुसार हीरापुर के लगभग 4 सौ फ्लैट्स पर लगभग 75 लाख रुपए बकाया है. इसी प्रकार कुशाभाऊ ठाकरे आवास योजना न्यू राजेन्द्रनगर के फ्लैट्स मालिकों से लगभग 70 लाख रुपए तथा इंदिरा मार्केट के व्यावसायियों से लगभग 24 लाख रुपये की वसूली किया जाना है.उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने ट्रांसपोर्टनगर के बकायादारों द्वारा राशि जमा नहीं करने पर 31 जुलाई के बाद भूखंड निरस्त करने की कार्रवाई कर राशि राजसात करने तथा भूखंडों को पुनः नियमानुसार विक्रय करने की कार्रवाई करने के भी निर्देश राजस्व शाखा को दिया है.
Jul 24, 2009
वसूली के लिए आरडीए की कालोनियों में लगेगें कैम्प
बकाया न देने पर फ्लैट्स पर लगेगें ताले, भूखंड होगें निरस्त
रायपुर, 24 जुलाई 2009. आरडीए अब बकायादारों से राशि वसूलने अपनी कालोनियों में कैम्प लगाकर वसूली करेगा. प्राधिकरण प्रशासन ने बार बार सूचना देने के बावजूद राशि जमा नहीं करने वाले बड़े बकायादारों के मकानों को सील करने तथा ट्रांसपोर्टनगर के बकायादारों द्वारा राशि जमा नहीं करने पर 31 जुलाई के बाद भूखंड निरस्त करने के निर्देश राजस्व विभाग को दिए है।
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने कल राजस्व शाखा की एक समीक्षा बैठक के दौरान बकाया राशि वसूलने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन आवंटितियों ने बकाया राशि का भुगतान निर्धारित समय के बावजूद नहीं किया है उनसे पूरी राशि सरचार्ज सहित वसूली जाए. बैठक में बताया गया कि आंवटितियों को कई बार राशि जमा करने की लिखित सूचना और समय दिया गया है किन्तु उनके द्वारा राशि जमा नहीं की जा रही है।
हीरापुर में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अन्तर्गत कई फ्लैट्स मालिकों ने लंबे समय से राशि जमा नहीं की है तथा आवंटितियों के फ्लैट्स भी बंद पड़े हैं. इसलिए ऐसे आंवटितियों के फ्लैट्स को ताला लगा कर सील कर दिया जाएगा. रावांभाठा ट्रांसपोर्टनगर में कई भूखंड़धारियों ने कई बार सूचना देने के बावजूद राशि जमा नहीं की है इसलिए उनके भूखंड 31 जुलाई के बाद निरस्त कर राशि राजसात कर ली जाएगी तथा इन भूखंडों को पुनः नियमानुसार विक्रय करने की कार्रवाई की जाएगी.
Jul 15, 2009
आरडीए के खाली भूखंड़ो के विक्रय पर प्रतिबंध
रायपुर, 14 जुलाई 2009. आरडीए के खाली भूखंडो को विक्रय की अब अनुमति नहीं दी जाएगी. 31 अक्टूबर तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं करने पर ऐसे भूखंड निरस्त कर पुनर्प्रवेश की कार्रवाई की जाएगी. भूखंडों को फ्रीहोल्ड करने के मामले में तैयार किया गया प्रस्ताव राज्य शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा. आठ नई टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम तथा टाटीबंध में ट्रांसपोर्टनगर योजना के संबंध में राज्य शासन से अनुमति ली जाएगी. यह निर्णय कल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज ने की.
संचालक मंडल द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार प्राधिकरण की योजनाओं में खाली पड़े भूखंड़ों पर 31 अक्टूबर 2009 तक का निर्माण नहीं करने पर भूखंड का आवंटन निरस्त कर उस पर पुनर्प्रवेश कर लिया जाएगा. योजनाओं में खाली पड़े भूखंडों को विक्रय की अब अनुमति नहीं दी जाएगी.
प्राधिकरण की कालोनियों के भूखंड को फ्रीहोल्ड करने के मामले में संचालक मंडल ने तैयार किए गए प्रस्ताव को राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया. प्रस्ताव के अनुसार भूखंडों को 30 वर्ष के स्थान पर अब 99 वर्ष की लीज अवधि पर दिया जाएगा तथा बची अवधि पर वर्तमान दर पर भू भाटक निर्धारित कर एक मुश्त राशि ली जाएगी. शासकीय भूमि को भी फ्रीहोल्ड करने के संबंध में शासन से अनुरोध किया जाएगा.
संचालक मंडल ने आठ नई टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम तथा टाटीबंध में ट्रांसपोर्टनगर योजना हेतु अनुशंसा करते हुए शासन से स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है. इसके अनुसार लगभग 14 हजार एकड़ में आठ सेक्टरों पर टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत भूखंड़ो का पुनर्गठन किया जाएगा. टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत सेक्टर एक में टाटीबंध, सरोना एवं रायपुरा, सेक्टर दो में भाठागांव, चंगोराभाठा एवं मठपुरैना, सेक्टर तीन में बोरियाखुर्द, मठपुरैना व डूंडा, सेक्टर चार में डूंडा, टिकरापारा, बोरियाखुर्द, देवपुरी व डूमरतराई, सेक्टर पांच में देवपुरी, डुमरतराई, फुंडर एवं अमलीडीह, सेक्टर छह में लाभांडीह, जोरा, तेलीबांधा, एवं शंकरनगर, सेक्टर सात में मोवा, दलदल सिवनी एवं सड्ढू तथा सेक्टर आठ में कचना, पिरदा व सकरी को शामिल किया गया है. टाटीबंध में लगभग 200 एकड़ पर मास्टर प्लान में भूउपयोग के अनुसार ट्रांसपोर्टनगर विकसित किया जाएगा. टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम हेतु प्रस्ताव को शासन से अनुमति मिलने के बाद राजपत्र में इसका प्रकाशन कराया जाएगा. इन स्कीमों के अन्तर्गत सबसे पहले सेक्टर चार में शामिल डूंडा, टिकरापारा, बोरियाखुर्द, देवपुरी व डूमरतराई को सबसे पहले पायलेट परियोजना के अन्तर्गत शुरु किया जाएगा.
संचालक मंडल की इस बैठक में प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस. बजाज, मुख्य कार्यपालन अधिकारी व नगर निगम रायपुर के आयुक्त श्री अमित कटारिया,नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक श्री वी.पी. मालवीय व के.पी.वाजपेयी तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के अधीक्षण अभियंता श्री एच. के. चन्दनिहा उपस्थित थे.
Jul 8, 2009
कॉलोनी नहीं टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम बना रहा है आरडीए – श्री कटारिया
रायपुर, 08 जुलाई 2009. रायपुर विकास प्राधिकरण ने कहा है कि वह किसी एक कालोनी का निर्माण नहीं कर रहा है वरन मास्टर प्लॉन के अनुसार रायपुर शहर के लिए टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम पर कार्य कर रहा है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने कहा है कि प्राधिकरण शहर विकास के लिए बनाए गए मास्टर प्लॉन में दिए गए भूउपयोग के प्रावधानों के अनुरुप टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के माध्यम से राजधानी के सुव्यवस्थित बसाहट की दिशा में काम कर रहा है. इसके लिए किसी की भूमि अर्जित नहीं की जाएगी.
श्री कटारिया ने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के अनुसार टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम के अन्तर्गत प्राधिकरण प्लॉटों का पुनर्गठन कर भूमि के निर्धारित उपयोग के अनुसार विकास का कार्य करेगा. प्राधिकरण नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 49 व 50 के अन्तर्गत नगर विकास स्कीम के क्रियान्वयन का कार्य कर रहा है. इन धाराओं के अन्तर्गत भूमि के पुनर्गठन का स्पष्ट प्रावधान है. इसके अन्तर्गत भवनों, मार्गों, नालियों, मल वहन लाइनों तथा अन्य वैसी सुख-सुविधाओं के प्रयोजन के लिए प्लाटों का पुनर्गठन का कार्य राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से आरंभ किया जा सकता है.
प्लाटों का पुनर्गठन हेतु प्राधिकरण द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, रायपुर से अभिन्यास अनुमोदित करवाया जाएगा. इसके साथ ही भूस्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर अनुबंध कर सड़क, नाली, पेयजल व विद्युत की बुनियादी सुविधाओं सहित उद्यान, खुले क्षेत्र व अन्य अधोसंरचनाओं का विकास किया जाएगा. अधोसंरचना के विकास के लिए राशि की व्यवस्था योजना की व्यावासायिक व अन्य भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि मे से किया जाएगा. शेष बची विकसित भूमि भूस्वामियों को बिना विकास शुल्क लिए वापस कर दी जाएगी जो कम से कम तीस प्रतिशत तक होगी. छत्तीसगढ़ शासन के नियम के अनुसार ऐसे अभिन्यास में आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए भूखंड अथवा निर्मित मकान देने का भी प्रावधान है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि योजना में गरीबों को भी भूमि मिलेगी. भू उपयोग के अनुसार योजना की व्यावसायिक भूमि के विक्रय से प्राप्त राशि से अधोसंरचना का विकास किया जाएगा.
श्री कटारिया ने कहा कि गुजरात के अहमदाबाद शहर के विकास के लिए 1979 से नगर विकास स्कीम का क्रियान्वयन किया जा रहा है और वहां लगभग ऐसी एक सौ टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम पूर्ण हो चुकी है. अहमदाबाद में टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम भी मूलतः भूखंडों के पुनर्गठन से संबंधित है. वहां विकास प्राधिकरण ने भूस्वामियों की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया है. स्कीम में भूस्वामियों से अनुबंध कर पूरे क्षेत्र का विकास करते हुए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है तथा भूस्वामियों से उनको वापस दिए जाने वाले भूखंड के लिए विकास शुल्क लिया जाता है. प्लॉटों के पुनर्गठन के इस कार्य को वहां की जनता ने बड़े ही हर्ष से स्वीकार किया है. वहां के अधिकारी बताते हैं कि भूस्वामी स्वयं उनके पास आते हैं और अपनी भूमि प्राधिकरण को देते हैं ताकि उनकी भूमि नगर विकास स्कीम के अन्तर्गत शामिल हो जाए तथा क्षेत्र का विकास होने से उन्हें भी आर्थिक लाभ हो. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम में शामिल भूस्वामियों पर इस बात का कोई बंधन नहीं होगा कि वे अपनी भूमि किसी को नहीं बेच सकते वरन वे इस बात के लिए स्वतंत्र होंगे कि वे किसी को भी अपनी भूमि का विक्रय कर सकें तथा उसमें मास्टर प्लॉन में उल्लेखित भूउपयोग के अनुसार मानचित्र सक्षम अधिकारी से अनुमोदित करवा कर अपने भूखंड का विकास और उस पर निर्माण कर सकें.
छत्तीसगढ़ शासन का नगर तथा ग्राम निवेश विभाग नगर विकास की योजना अर्थात मास्टर प्लॉन तैयार करने का कार्य करता है. जबकि नियम के अनुसार रायपुर विकास प्राधिकरण का गठन स्थानीय प्राधिकारी के रूप में मास्टर प्लॉन को क्रियान्वित करने के लिए किया गया है. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का भी यह मानना है कि रायपुर नगर में बुनियादी अधोसंरचनाओं के विकास नहीं होने शहर का अनियमित रुप से विकास हुआ है. इसलिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सुव्यवस्थित और बेहतर जीवन के लिए टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम का क्रियान्वयन आवश्यक हो गया है. इसलिए गुजरात के शहरी विकास के अनुभव के आधार पर रायपुर विकास प्राधिकरण राजधानी रायपुर के सुव्यवस्थित विकास और राज्य़ शासन के सुशासन की नीति के आधार पर टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम क्रियान्वयन की दिशा में कार्य कर रहा है जो लोकहित में है तथा एक कल्याणकारी योजना है.