रायपुर 04 अगस्त 2018, नेशनल ग्रीन ट्रॉयब्यूनल, प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना के अंतर्गत पर्यावरणीय अनुमति के संबंध में याचिकाकर्ता राजेन्द्र शंकर शुक्ला व्दारा विरुध्द भारत सरकार, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर विकास प्राधिकरण के विरुद्ध प्रस्तुत याचिका को खारिज कर दिया है.
इस संबंध में प्राधिकरण के अधिवक्ता श्री राजुल कुमार श्रीवास्तव ने माननीय ट्रॉयब्यूनल के समक्ष यह जानकारी प्रस्तुत की थी कि कमल विहार योजना की पर्यावरणीय स्वीकृति भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य स्तर समाघात निर्धारित प्राधिकरण छत्तीसगढ़ के पत्र क्रमांक 868/एस.ई.ए.सी.छ.ग./सी.जी./10 दिनांक 22.01.2018 के अनुसार प्राप्त की जा चुकी है. इस पर माननीय ट्रॉयब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा है कि रायपुर विकास प्राधिकरण ने सूचित किया है कि याचिकाकर्ता के भूखंड पर रायपुर विकास प्राधिकरण ने कोई निर्माण नहीं किया है. वहीं याचिका कर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि प्राधिकरण को पर्यावरण की अनुमति 25.01.2011 को दी गई है. ऐसी अनुमति पर आपत्ति नहीं की जा सकती है. अतः याचिका कर्ता का आवेदन मूलतः खारिज किया जाता है.
इस संबंध में प्राधिकरण के अधिवक्ता श्री राजुल कुमार श्रीवास्तव ने माननीय ट्रॉयब्यूनल के समक्ष यह जानकारी प्रस्तुत की थी कि कमल विहार योजना की पर्यावरणीय स्वीकृति भारत सरकार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य स्तर समाघात निर्धारित प्राधिकरण छत्तीसगढ़ के पत्र क्रमांक 868/एस.ई.ए.सी.छ.ग./सी.जी./10 दिनांक 22.01.2018 के अनुसार प्राप्त की जा चुकी है. इस पर माननीय ट्रॉयब्यूनल ने अपने निर्णय में कहा है कि रायपुर विकास प्राधिकरण ने सूचित किया है कि याचिकाकर्ता के भूखंड पर रायपुर विकास प्राधिकरण ने कोई निर्माण नहीं किया है. वहीं याचिका कर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि प्राधिकरण को पर्यावरण की अनुमति 25.01.2011 को दी गई है. ऐसी अनुमति पर आपत्ति नहीं की जा सकती है. अतः याचिका कर्ता का आवेदन मूलतः खारिज किया जाता है.
उल्लेखनीय है कि राजेन्द्र शंकर शुक्ला एवं अन्य ने रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना के निर्माण के संबंध में सक्षम प्राधिकारी से पर्यावरणीय अनुमति लेने तक भूमि पर विकास कार्य करने पर रोक लगाने व भूखंडों के विक्रय पर रोक लगाने की मांग की थी. जिसे माननीय नेशनल ग्रीन ट्रॉयब्यूनल ने सुनवाई के बाद गत 27 जुलाई को खारिज कर दिया.