Search This Blog

Sep 26, 2013

रमन सरकार का लीज होल्ड प्लॉट को फ्री होल्ड करना और अवैध कॉलोनियों को राजसात करने का निर्णय ऐतिहासिक – श्री सुनील सोनी


रायपुर, 26 सितंबर 2013, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सोनी ने कहा है कि लीज होल्ड प्लॉट को फ्री होल्ड करना और अवैध कालोनियों को राजसात करने का निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का एक ऐतिहासिक निर्णय है जिसके दूरगामी परिणाम होगें.
श्री सोनी ने कहा कि प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में हजारों आवासीय भूखंड व भवन आवंटित किए गए हैं. ये सभी 30 वर्षों पर लीज अर्थात पट्टे पर यानि एक प्रकार के किराये पर थे.  डॉ. रमन सिंह की सरकार ने ऐसे सभी आवासीय संपत्तियों को लीज से मुक्त करा कर भूखंड व भवन के स्वामियों को प्लॉट का मालिक बना दिया है. फ्रीहोल्ड होने से न तो भूभाटक देना पडेगा और न ही संपत्तियों को विक्रय करने के लिए कोई अनुमति लेनी पडेगी. उन्होंने कहा कि फ्रीहोल्ड करने के लिए राजस्व संबंधी तमाम दिक्कतें थी जिन्हें छतीसगढ़ भूमि धारण (विधिमान्यकरण) अधिनियम 2013 (वैलिडेशन एक्ट) बना और उसे विधानसभा में पारित कर कानूनी स्वरुप दिया गया है. छत्तीसगढ़ के राजपत्र में प्रकाशन के बाद भवन व भूखंडधारी अब अपनी संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण में अपना आवेदन प्रस्तुत करने लगे हैं.
प्राधिकरण की कमल विहार योजना के अधिसूचित क्षेत्र में आने वाले स्वागत विहार की कालोनी में अवैध रुप से शासकीय भूमि पर कब्जा कर बेचे जाने के मामले में पीडितों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कैबिनेट में निर्णय लेकर एक बड़ी राहत दी है. छत्तीसगढ़ शासन का यह निर्णय अवैध कालोनी निर्माण के मामले में पूरे देश में शायद इकलौता निर्णय है जिससे पीडितों को सीधा न्याय मिला है. फर्जी तरीके से अवैध प्लॉट बेच कर जनता को परेशान करने वाले ऐसे लोगों की अवैध कालोनी और कालोनी बनाने वालों की संपत्ति को राजसात करने का  निर्णय भी अपने आप में अनूठा है.
श्री सोनी ने कहा कि स्वागत विहार में सरकारी भूमि पर लोगों को अवैध रुप से प्लॉट काट कर बेचे गए है. ऐसे पीडित लोग अपनी मेहनत की कमाई से खरीदे गए भूखंड़ों को आज तक देखने तक के लिए भटक रहे हैं. अवैध कालोनी बनाने वालों ने न सिर्फ अवैध प्लॉट बेच कर जनता को धोखा दिया वरन उनको लूटने का भी काम किया है. राज्य शासन का यह फैसला ऐसे लोगों के लिए खुशियां लेकर आया है. इससे पूरे राज्य में अवैध कालोनियों के निर्माण की प्रवृति पर रोक लगेगी.

Sep 25, 2013

अवैध कॉलोनी पर रोक लगाकर डॉ. रमन ने पीड़ितों को दिया सीधा न्याय – श्री सुनील कुमार सोनी

रायपुर, 25 सितंबर 2013, फर्जी तरीके से अवैध प्लॉट बेच कर जनता को परेशान करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के कैबिनेट के निर्णय का रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सोनी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके कैबिनेट नें जनहित में निर्णय ले कर यह बता दिया है कि राज्य सरकार जनता को न्याय दिलाने में कभी पीछे नहीं हटेगी. इसके लिए उन्होंने डॉ. रमन सिंह को साधुवाद दिया हैं.
श्री सोनी ने कहा कि सरकार रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना के अधिसूचित क्षेत्र में स्थित स्वागत विहार में सैकड़ों लोगों के साथ धोखा हुआ है. सरकारी भूमि पर लोगों को अवैध प्लॉट काट कर बेचे गए है. ऐसे पीडित लोग अपनी मेहनत की कमाई से खरीदे गए भूखंड़ों को देखने तक के लिए आज तक भटक रहे हैं. अवैध कालोनी बनाने वालों ने अवैध प्लॉट बेच कर न सिर्फ जनता को धोखा दिया गया है वरन उनको लूटने का भी काम किया है. यह फैसला ऐसे लोगों के लिए खुशियां लेकर आया है. राज्य शासन के इस निर्णय से उनको काफी राहत मिलेगी. 
श्री सोनी ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अवैध प्लाटिंग से पीड़ितों को सीधे न्याय दिया है जो उनकी दूर की सोच को परिलक्षित करता है.. राज्य शासन के निर्णय से पूरे राज्य में अवैध कालोनियों के निर्माण की प्रवृति पर रोक लगेगी. अवैध प्लॉट बेचने वाले भूमाफियाओं और दलाल किस्म के लोगों की संपत्तियों को अधिग्रहित करने से वे अब लोगों को मूर्ख बनाने का काम नहीं कर सकेगें फलस्वरुप जनता को राहत मिलेगी. 

Sep 23, 2013

विकसित होते ही और लोकप्रिय होगा कमल विहार - श्री अनिमेष चौहान

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यपालक निदेशक का कमल विहार दौरा

 रायपुर, 23 सितंबर 2013, कमल विहार के विकास के साथ ही जैसे - जैसे लोग इसे समझने लगेगें यह योजना और लोकप्रिय होती जाएगी, कोई भी योजनाएं अपने कार्यों और गुणवता के कारण ही लोकप्रिय होती है. रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना की अवधारणा, विकास और निर्माण की प्रगति देख कर सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यपालक निदेशक श्री अनिमेष चौहान ने उक्त बातें कही.
   
 कमल विहार योजना के विकास और निर्माण के लिए 550 करोड़ रुपए का ऋण देने वाले सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यपालक निदेशक श्री चौहान ने आज योजना स्थल का दौरा कर विकास कार्यों का जायजा लिया. योजना सलाहकार बिल्ट क्रॉफ्ट ने पावर पांईट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से कमल विहार की अवधारणा, योजना का प्रस्ताव तथा भूअर्जन की प्रक्रिया की जानकारी दी. श्री चौहान ने योजना में खासी दिलचस्पी लेते हुए कई सवाल भी पूछे. उन्होंने जानना चाहा कि नया रायपुर और कमल विहार योजना में क्या अन्तर है ? इस पर प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री जे.एस. भाटिया ने बताया कि नया रायपुर में संपूर्ण भूमि का अर्जन कर विकास किया जा रहा है जबकि कमल विहार जनभागीदारी की योजना है जिसमें भूस्वामियों को उनकी मूल भूमि के बदले 35 प्रतिशत तक विकसित भूखंड निशुल्कः दिया जा रहा है. श्री चौहान को योजना में गरीबों के लिए बनाए जाने वाले 3276 ईडब्लूएस फ्लैट्स निर्माण के प्रस्ताव की भी जानकारी दी. उन्हें बताया गया कि कमल विहार क्षेत्र की एक मुख्य सड़क में आने वाले एक शासकीय स्कूल को नया भवन बना कर दिया गया है जो किसी भी निजी स्कूल के मामले में काफी बेहतर है. योजना में अधोसंरचना का विकास कर रही निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो ने अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए छात्र - छात्राओं के लिए पूरे स्कूल का फर्नीचर उपलब्ध कराया है.
श्री चौहान ने कमल विहार की प्रगति के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे इतनी अच्छी योजना को देखने बार बार आते रहेगें. इस अवसर पर प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री जे.एस. भाटिया, अधीक्षण अभियंता श्री पी.आर. नारंग, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जोनल मैनेजर श्री डी.एस.शाही, रीजनल मैनेजर श्री के. शिवानंद, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सदर बाजार शाखा के चीफ मैनेजर श्री गौर, चीफ मैनेजर श्री अवधेश कुमार, सीनियर मैनेजर श्री मनीष त्रिपाठी, प्राधिकरण के वित्तीय सलाहकार श्री बंकिम शुक्ला, कार्यपालन अभियंता श्री पी.एम. कोल्हे, लेखाधिकारी श्री संदीप सिंह पॉल, वैपकास के श्री संजय वर्मा व श्री एन.के. झा, एलएंडटी के श्री पी.के.गुप्ता व विकास गोयल उपस्थित थे.

Sep 18, 2013

श्री सुनील सोनी ने निभाया एक और वादा

न्यू राजेन्द्रनगर के 72 फ्लैट्स को बारिश के पानी से बचाने शुरु किया निर्माण 

रायपुर, 18 सितंबर 2013, न्यू राजेन्द्रनगर स्थित 72 फ्लैट्स के निवासी आज उस समय बेहद उत्साहित थे जब उनके परिसर को बारिश के पानी से डूबने से बचाने के लिए निर्माण कार्य की शुरुआत की गई. रायपुर ग्रामीण के विधायक श्री नंद कुमार साहू और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सोनी ने आज 72 फ्लैट्स परिसर में भरने वाले वारिश के पानी की निकासी के लिए पूरे परिसर की कांक्रीट फ्लोरिंग, 5 ब्लॉक का बाहरी प्लॉस्टर और पुताई के कार्य की शुरुआत की.
 लगभग साढ़े 7 लाख रुपए की लागत से होने वाले कार्य के संबंध में विधायक श्री साहू और प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सोनी ने गत 31 जुलाई को नागरिकों से वायदा किया था कि जैसा उन्होंने देवेन्द्रनगर के साईनगर और चाणक्य फ्लैट्स तथा कटोरातालाब के मैथिलीशरण गुप्त अपार्टमेंट के लोगों के फ्लैट्स की मरम्मत करवा कर उनका जीवन बेहतर बनाया है उसी प्रकार 72 फ्लैट्स के नागरिकों के अच्छी सुविधाएं देगें. टेन्डर की औपचारिकता पूरी कर आज प्राधिकरण ने 72 फ्लैट्स के परिसर में निर्माण कार्य प्रारंभ कर अपना वादा पूरा किया.
इस अवसर पर नगर निगम के पार्षद पूर्व पार्षद संतोष सारथी, न्यू राजेन्द्रनगर के नागरिक गुरदीप सिंह टूटेजा, तोषन साहू, लीलाधर चन्द्राकर,राधाकृष्ण कुकरेजा, सुशील परिहार, सनत कुमार पांडे, दिलीप कुमार राजपाल, रवि ठाकुर, संदीप मिश्रा, दुर्गाशंकर पांडे सहित महिला मंडल की श्रीमती मनीषा, श्रीमती रेशमा छाबड़ा उपस्थित थी.

Sep 17, 2013

सिटी सेन्टर की दुकानों की निविदा दर में संशोधन

निविदा अब 1 अक्टूबर को
रायपुर, 17 सितंबर 2013, रायपुर विकास प्राधिकरण ने देवेन्द्रनगर स्थित छत्तीसगढ़ सिटी सेन्टर के व्दितीय तल पर 5 तथा तृतीय तल पर 6 दुकानों / कार्यालयों के लिए निर्मित स्थल को विक्रय करने के पूर्व प्रस्तावित आफसेट मूल्य में संशोधन किया है. व्दितीय तल में 3046 रुपए प्रति वर्गफुट तथा तृतीय तल में 2746 रुपए प्रति वर्गफुट की वृध्दि की गई है. इससे प्राधिकरण को बुनियादी तौर पर ही लगभग 11 करोड़ 32 लाख रुपए का लाभ होगा. संशोधन के अनुसार व्दितीय तल हेतु न्यूनतम दर 11,103 रुपए प्रति वर्गफुट तथा तृतीय तल हेतु 10,045 रुपए होगी.  
प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े मॉल की दुकानों के विक्रय के लिए गत 17 अगस्त को स्थानीय समाचार पत्रों में निविदा विज्ञापन का प्रकाशन किया था. उसके बाद प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सोनी ने पाया कि निविदा की दर अर्थात ऑफसेट रेट बाजार भाव की तुलना में कम है. तब श्री सोनी ने निविदा की दरों में संशोधन किए जाने का निर्देश दिया. इसके बाद प्राधिकरण स्तर पर पुनः दरों का विश्लेषण कर संशोधित दरें प्रस्तावित कर उसे प्राधिकरण की वेबसाईट आरडीए रायपुर डॉट कॉम पर प्रकाशित कर दिया गया है.
प्राधिकरण ने निविदा की तिथि भी बढ़ा दी है. पहले निविदा की अंतिम तिथि 17 सितंबर थी जिसे अब बढ़ा कर 1 अक्टूबर कर दिया गया है. इच्छुक संस्था या व्यक्ति दुकाने लेने के लिए अपनी दरों का प्रस्ताव प्राधिकरण कार्यालय में 1 अक्टूबर तक प्रस्तुत कर सकते हैं. प्रस्ताव के संबंध में नियम एवं शर्ते प्राधिकरण की वेबसाईट आरडीए डॉट काम पर उपलब्ध है. उल्लेखनीय है कि लगभग पौने छह एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया छत्तीसगढ़ सिटी सेन्टर प्रदेश का सबसे बड़ा मॉल है जो 10 अक्टूबर 2010 को प्रारंभ किया गया था.

Sep 10, 2013


अमित कटारिया आरडीए के सीईओ

रायपुर, 10 सितंबर 2013, नया रायपुर डेव्लेंहपमेट अथारिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने आज रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन प्राधिकरण का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया. राज्य शासन के आदेश के बाद उन्होंने  आवास एवं पर्यावरण विभाग के उपसचिव की जिम्मेदारी भी ले ली है. श्री कटारिया इसके पूर्व में प्राधिकरण में दो साल तक मुख्य कार्यपालन अधिकारी रह चुके हैं.

आधुनिक नहीं अब स्मार्ट शहरों की बारी
- सुनील कुमार सोनी
हमारे पूर्वजों ने लोगों के रहने के लिए शहरों की जो डिजाईऩ की थी वह उस समय की आवश्यकता के अनुरुप बेहतर थी । लेकिन आज के हमारे शहर टेक्नालाजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं ।
संचार और कम्प्यूटर टेक्नॉलाजी ने हमें जीवन के हर क्षेत्र को और बेहतर बना रहा है । कम्प्यूटर और नैनो टेक्नॉलाजी ने आज हमारे जीवन स्तर को तार्किक स्वरुप प्रदान करते हुए कई बेहतर विकल्प सामने ला खड़े किए हैं । ऐप्स, डीआईवाई सेंसर, नैनों चिप्स, स्मार्टफोन तथा वेब की तकनीक शहर निर्माण में अहम भूमिका में आगे आ गई है । अब हम अपनी सुगमता के लिए सिर्फ शहर ही नहीं बना रहे हैं वरन अपनी प्राकृतिक विरासत,संस्कृति, व्यापार और समुदाय के लिए शहर बना रहें हैं।
एक अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी जिससे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर ज़बर्दस्त दबाव होगा । इसलिए अब नए विकल्प के रुप में दुनियाभर में स्मार्ट शहरों का निर्माण शुरू हो चुका है। कहा जा रहा है कि अब जो स्मार्ट शहर बनेगें वे हमारी कल्पनाओं से परे होगें। भविष्य के इन शहरों में बिजली के ग्रिड से लेकर सीवर पाइप, सड़कें, कारें और इमारतें हर चीज़ एक एक नेटवर्क से जुड़ी होगी। यहां की इमारतें अपने आप बिजली बंद करेगी, स्वचालित कारें खुद अपने लिए पार्किंग ढूंढेंगी और यहां तक कि कूड़ादान भी स्मार्ट होगा। स्मार्ट शहर का मतलब होगा कि एक ऐसा शहर जो आपकी ज़रूरतों को अपने आप पूरा करे।
दुनिया की कई जानी मानी तकनीकी कंपनियां अब स्मार्ट शहरों का भविष्य तय कर रही हैं। वे शहर में जल के रिसाव से लेकर वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम तक हर समस्या को सुलझाने के लिए नए नए सॉफ्टवेयर बना कर बेच रही हैं। नए स्मार्ट शहरों का भविष्य शहरों की इमारतों, बिजली के खंभों और पाइप पर लगे सेंसरों व्दारा रखी जाने वाली निगरानी से नियंत्रित होगा। सिंगापुर, स्टॉकहोम और कैलिफोर्निया में एक कंपनी यातायात के आंकड़े जुटा शहरों में लगने वाले जाम की एक घंटे पहले ही भविष्यवाणी कर रही है। वहीं रियोडिजेनेरियो में एक कंपनी ने नासा की तरह एक कंट्रोल रूम बना रखा है जहाँ लगी स्क्रीनें पूरे शहर में लगे संवेदकों और कैमरों से आंकड़े जुटाती हैं। डबलिन में एक कंपनी ने सिटी काउंसिल के साथ मिलकर मोबाइल फोन्स के लिए एक पार्कया ऐप्स तैयार किया है जो लोगों को शहर में पार्किंग की जगह ढूंढने में मदद करता है। अमरीकी शहर डुबुक में कंपनी स्मार्ट वाटर मीटर बना रही है जो कम्युनिटी पोर्टल के माध्यम से लोगों को डेटा उपलब्ध करा रही है ताकि वे पानी की अपनी खपत को देख सकें। एक अमरीकी कंपनी का मानना है कि हमें एक ऐसे शहर विकसित करने की ज़रूरत है जो लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। पहले यह संभव नहीं था क्योंकि तब ज्यादा सूचना उपलब्ध नहीं थीं। चीन दर्जनों ऐसे नए शहर बसाने की ओर बढ़ रहा है जिसमें रियोडिजेनेरियो की तरह कंट्रोल रूम स्थापित होंगै। स्मार्ट शहर का भविष्य तय करने के लिए स्मार्टफोन, ऐप्स, डीआईवाई सेंसर तथा वेब इस्तेमाल करने वाले लोग लिख रहे है। डोंट फ्लश मी एक छोटा डीआईवाई सेंसर और ऐप है जो अकेले दम पर न्यूयॉर्क की पानी से जुड़ी समस्याओं को सुलझा रहा है। इसी तरह सेंसर नेटवर्क एग लोगों को शहर की समस्याओं के प्रति सचेत कर रहा है।
एक शोध के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में हर साल 20 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है शहरों में बढ़ती भीड़भाड़ के कारण यह समस्या और बदतर हो रही है। इस समस्या के आंकलन के लिए एक कंपनी सस्ते सेंसर बेचकर वायु की गुणवत्ता के बारे में आंकड़े जुटा रहा है। ताकि लोग इन सेंसरों को अपने घरों के बाहर लगाकर हवा में मौजूद ग्रीन हाउस गैसों, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड के स्तर का पता लगा सकते हैं। इन आंकड़ों को इंटरनेट पर भेज कर एक नक्शे में जोड़कर दुनियाभर में प्रदूषण के स्तर को दिखाया जाता है। सेंटर फॉर एडवांस स्पेशिएल एनालिसिस लंदन के निदेशक हडसन स्मिथ के अनुसार  शहरों की स्थिति सुधारने में लोगों की भागीदारी बेहद अहम है। उनकी टीम में लंदन को स्मार्ट बनाने के लिए एक सिटी डैशबोर्ड विकसित किया है। रियोडिजेनेरियो के कंट्रोल रूम की तरह डैशबोर्ड प्रदूषण, मौसम और नदी के जल स्तर से संबधित आंकड़ों को समाहित करता है। साथ ही यह ट्विटर और शहर की खुशहाली पर भी नजर रखता है।
इन दिनों स्मार्ट शहरों के बारे में विकसित देशों में काफी चर्चा है लेकिन उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे वास्तव में लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। पर यह उम्मीद जरूर है कि अगले पांच सालों में चीजें स्मार्ट हो जाएंगी। तब शहर का डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनों और सड़कों की तरह अहम हो जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हम अपने शहरों कि बेहतर बनाने के चक्कर में उनकी सबसे बड़ी धरोधर को खो भी सकते हैं ? लेकिन यह बात तो तय है कि बेहतर सोच वाले स्मार्ट लोग ही स्मार्ट शहर बनाएंगे।
रायपुर विकास प्राधिकरण भी दुनिया की ऐसी कल्पनाओं को साथ ले कर चल रहा है। इसी दिशा में कमल विहार की कल्पना जो एक आम आदमी की योजना तो है पर हर किसी की कल्पना से परे... इसमें आम से खास सभी लोगों के सारे सपने गढ़ने का काम उनकी सोच से पहले कर दिया है ताकि आगे आने वाली टेक्नॉलाजी के लिए विकास के सभी रास्ते खुले रहें । हिन्दुस्तान के स्मार्ट शहर होने की दिशा में अग्रसर होते हुए हम अब रायपुरवासियों के सपने पूरे करने के लिए वचनबध्द है।
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
-          सुनील कुमार सोनी, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं

Sep 6, 2013

कमल विहार में पारदर्शिता, कोई भी कागज-फाईल दिखाने को तैयार - सुनील कुमार सोनी

जिनकी सहमति उन्हें भूखंड दिया, जिन्होंने नहीं दी उन्हें मुआवजा

रायपुर, 6 सितंबर 2013, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील कुमार सोनी ने पूर्व शिक्षा मंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा के कमल विहार योजना के संबंध में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि श्री शर्मा जी पिछले दो सालों में कुछ भी नहीं बोले और अब जब चुनाव आ रहा है तो उन्हें कमल विहार याद आ रहा है. 


श्री सोनी ने कहा कि कमल विहार योजना पूरे नियमों के अन्तर्गत बनाई गई एक पारदर्शी योजना है. हम श्री शर्मा जी को योजना के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए तैयार हैं वे जो फाईल या कागज देखना चाहें प्राधिकरण कार्यालय में उन्हें दिखा दिया जाएगा. इसके लिए उन्हें सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने और समय खराब करने की भी जरूरत नहीं है. श्री सोनी ने आगे कहा कि कमल विहार योजाना में यदि कोई खोट या गल्ती होती तो बिलासपुर हाईकोर्ट भूस्वामियों की याचिका खारिज नहीं करता. हाईकोर्ट का निर्णय यह साबित करता है कि कमल विहार संवैधानिक रुप से एक सही और जनहित में बनाई जा रही आम आदमी की योजना है.
       श्री सोनी ने कहा कि कमल विहार में जिन भूस्वामियों ने विकसित भूखंड चाहे उन्हें उनकी सहमति के आधार पर अनुबंध कर प्लॉट दिए गए हैं. जिन्हें भूखंड नहीं चाहिए था उन्हें प्राधिकरण ने कलेक्टर गाईड लाईन के आधार पर मुआवाजा दिया. श्री सोनी ने कहा कि यह कहा जा रहा है कि 800 परिवारों को भूखंड नहीं दिया जा रहा है यह गलत है प्राधिकरण में 543 भूस्वामियों ने विकसित भूखंड लेने के लिए अपनी सहमति नहीं दी इसलिए उन्हें मुआवजा दिया जा रहा. मुआवजे की दर प्राधिकरण नहीं तय करता यह तो कलेक्टर व्दारा बनाई गई गाईड लाईन के आधार पर तय होता है. श्री सोनी ने कहा कि प्राधिकरण व्दारा समाचार, विज्ञापनों और नोटिस के माध्यम से कई बार भूस्वामियों को विकसित भूखंड और अनुबंध करने की सूचना दी गई है और यह सब रिकार्ड में दर्ज है. गत 4 जुलाई को श्री चुन्नीलाल प्रजापति को प्राधिकरण कार्यालय में मुआवजे का चेक दिया गया है. इसके बाद जो भी मुआवाजा लेने आएगा उसे पांच दिनों में मुआवजा की राशि दे दी जाएगी.
      प्राधिकरण के अध्यक्ष ने बताया कि 543 भूस्वामियों व्दारा कमल विहार योजना में विकसित भूखंड लेने की सहमति नहीं दिए जाने के कारण उनकी भूमि अर्जित की गई है. प्राधिकरण ने इस हेतु पिछले साल जुलाई को भू-अर्जन अधिकारी को राशि भी दे दी है. श्री सोनी ने बताया कि अवैध प्लॉटिंग में रोड रास्ते की भूमि के लिए छोड़ी गई भूमि की जांच राजस्व अधिकारी व्दारा की जा रही है.
  800 सौ परिवारों को जिनकी बात कही जा रही है उनमें जिनकी भूमि 2900 वर्गफुट से अधिक थी उन्हें शासन के आदेश से एक स्लैब ऊपर की अतिरिक्त भूमि का आवंटन किया गया है. यह आवंटन कमल विहार में अधोसंरचना विकास के मद में आरक्षित रखी गई 10 प्रतिशत भूमि में से किया गया है. श्री सोनी ने कहा कि श्री सत्यनारायण शर्मा जी का यह कहना की 3500 परिवारों को धमकी दे कर अनुबंध कराया है यह भी पूर्णत निराधार है. भूस्वामियों ने अपनी सहमति से अनुबंध किया है. अनुबंध में स्पष्ट उल्लेख है कि यह प्रोविजनल अनुबंध है स्थल पर कब्जा देते समय अंतिम अनुबंध किया जाएगा. इसके पश्चात ही संबंधित विकसित भूखंड भूस्वामी के नाम से दर्ज होगा. जहां तक भूअर्जन की बात है इसकी कार्रवाई नियमों के अन्तर्गत भूअर्जन अधिकारी रायपुर व्दारा की जाती है रायपुर विकास प्राधिकरण व्दारा नहीं.
      श्री सोनी ने कहा कि श्री शर्मा कभी 3500 परिवारों की बात करते हैं कि उन्हें धमकी दे कर अनुबंध कराया गया है और कभी 800 परिवारों की बात करते हैं कि उन्हें आरडीए भूखंड नहीं दे रहा है. इन दोनों बातों पर वे पहले स्वयं ही आश्वस्त हो लें कि वे क्या कहना और समझना चाहते हैं. 

Sep 5, 2013

आयकर विभाग को आरडीए के बेहतर वित्तीय प्रबंधन देख कर हुआ आश्चर्य


जांच में आयकर कटौती और राशि जमा करने में कोई खामी नहीं
प्राधिकरण का कार्य प्रशंसनीय शीतल सारस्वत, आयकर उपायुक्त  

रायपुर, 5 सितंबर 2013, रायपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय में कल आयकर की कटौती कर उसे विभाग को भेजने के संबंध में आयकर की टीम को यह देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ कि प्राधिकरण की लेखा शाखा का कार्य इतना व्यवस्थित कैसे है कि उनके कार्य में कोई खामी ही नहीं है. प्राधिकरण के 50 सालों के इतिहास में पहली बार आयकर विभाग ने कर भुगतान के संबंध में जांच की है. आयकर विभाग की उपायुक्त आयकर श्रीमती शीतल सारस्वत वर्मा ने प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अलेक्सपॉल मेनन से भी मुलाकात की और प्राधिकरण के वित्तीय प्रबंधन की प्रशंसा करते हुए इसे अनुकरणीय बताया.
कल आयकर विभाग की उपायुक्त के नेतृत्व में आयकर विभाग की टीम ने प्राधिकरण व्दारा किए गए भुगतान किए गए देयकों की जांच की और पाया की सभी देयकों में नियमानुसार आयकर की कटौती कर आयकर विभाग में राशि जमा कराई गई है. दरअसल प्राधिकरण में पिछले कुछ वर्षों में किए गए कम्प्यूटरीकरण के फलस्वरुप तकनीकी, लेखा और राजस्व शाखा में बेहतर ढ़ंग से कार्य हो रहा है. प्राधिकरण के लेखा शाखा व्दारा ठेकेदारों, हितग्राहियों और सलाहकारों को आरटीजीएस प्रणाली से भुगतान किया जा रहा है. इसके अलावा प्राधिकरण  वित्तीय विशेषज्ञों कंपनियों की भी मदद ले रहा है.
आयकर विभाग के अधिकारियों व्दारा की गई यह जांच एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें उनके व्दारा संस्था व्दारा भुगतान किए जाने वाले देयकों में आयकर की कटौती की जांच की जाती है. आयकर विभाग ने प्राधिकरण में पूरी जांच के दौरान एक भी खामी नहीं पाई. आयकर विभाग ने यह पाया की प्राधिकरण व्दारा नियमित रुप से आयकर की कटौती कर विभाग के मद में राशि जमा कराई जा रही है तथा देयकों में कोई कमी नहीं है.