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Feb 15, 2011

कमल विहार की स्वीकृति एक ऐतिहासिक कदम


डॉ. रमन सिंह की दूरदृष्टि से छतीसगढ़ 
अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर
देश की सबसे बड़ी व सर्वश्रेष्ठ योजना
 में से एक होगी कमल विहार

रायपुर 15 फरवरी 2011, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके मंत्रिमंडल ने शहर विकास की दिशा में कमल विहार जैसी नगर विकास योजना को स्वीकृति दे कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य शासन के इस निर्णय से कमल विहार देश की सबसे बेहतरीन योजनाओं में से एक साबित होगी. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम डूण्डा, बोरियाखुर्द, डुमरतराई, देवपुरी एवं टिकरापारा की 1600 एकड़ भूमि पर बनने वाली यह योजना शहर विकास की आधुनिक तकनीक व अवधारणा के आधार पर बनाई गई है. टॉऊन प्लॉनर्स, आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स व पर्यावरण विशेषज्ञों ने लगातार कई महीनों की मेहनत के बाद देश की एक बेहतरीन योजना तैयार की है.
जनभागीदारी के साथ विकास की योजना
प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह रायपुर को नई दिल्ली, बेगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, चंडीगढ़ जैसे शहरों से भी बेहतर बनाना चाहते हैं. उऩकी सोच कि सबसे आगे हो हमारा छत्तीसगढ़ उनकी इसी सोच के कारण जनभागीदारी की योजना कमल विहार योजना जैसी सर्वसुविधायुक्त योजना बनाई गई है. मुख्यमंत्री के अनुसार विकास की आधुनिक अवधारणा में अधोसंरचना का विकास एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसलिए छत्तीसगढ़ शासन जनभागीदारी के साथ शहरों का विकास करने के लिए कृत संकल्पित है. कमल विहार जैसी योजना छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन की दिशा में आगे बढ़ने का एक और प्रयास है. कमल विहार देश की सबसे बड़ी तथा सर्वश्रेष्ठ योजना में से एक होगी.  
आधुनिक अधोसंरचना का विकास
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि कमल विहार जो सुविधाएं दी जाएंगी वह अभी पूरे छत्तीसगढ़ में नहीं है. सड़क नाली, बिजली पानी की बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं के साथ केन्द्रीय व्यावसायिक क्षेत्र अर्थात सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के अतिरिक्त हर सेक्टर में स्थानीय स्तर का शॉपिंग सेन्टर, खेल के मैदान व उद्यान, नर्सिंग होम तथा स्कूल उपलब्ध होगा. इसके अलावा पूरी योजना में हरियाली के कारण स्वस्थ वातावरण होगा. भूमिगत नालियों के कारण गन्दगी और बारिश के दिनों में पानी भराव की समस्या नहीं होगी. हर सेक्टर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लॉंट की स्थापना कर गंदे पानी का शुध्दिकरण कर उसका पुर्नउपयोग उद्यानों की सिंचाई में किया जाएगा. टेलीफोन व अन्य केबलों के लिए सर्विस डक्ट, चौबीस घंटे पानी और बिजली की उपलब्धता की व्यवस्था होगी. चौड़ी सड़कों के कारण आवागमन एवं यातायात में सुविधा होगी. रिंग रोड व बायपास छह लेन की होगी. इनमें मुख्य सर्विस लेन के अतिरिक्त पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ तथा सायकल के लिए सायकल ट्रैक की व्यवस्था होगी. शिक्षा, स्वास्थ्य, कार्यालय भवनों, सांस्कृतिक केन्द्र, बैंक पोस्ट आफिस व अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए भूखंड उपलब्ध होगें.

Feb 10, 2011

एकल खिड़की मील का पत्थर – श्री सुनील सोनी


एकल खिड़की से आरडीए में बदला माहौल
लगातार हो रही साप्ताहिक समीक्षा बैठक से निपटे सारे 3795 प्रकरण
कई काम हो रहे समय से पहले

रायपुर फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण में एकल खिड़की प्रणाली लागू करने से आवंटितियों की समस्याएं जैसे समाप्त हो गई है.दो साल पहले लागू की गई इस प्रणाली और उसके लगातार फालोअप के कारण आज की स्थिति में कोई भी पुराना प्रकरण लंबित नहीं है. इन दो सालों में 3795 आवेदन प्रकरणों का निपटारा किया गया है.एकल खिड़की के माध्‍यम से संपत्तियों के हस्तांरण व नामांतरण, भारहीनता, भवनों के निर्माण व पुनर्निर्माण हेतु अनापत्ति पत्र, नल कनेक्शन, भाड़ाक्रय पर किश्तों का पूर्ण भुगतान, पंजीयन शुल्क की वापसी व अन्य रिफन्ड, सूचना के अधिकार के आवेदन प्रत्र प्राप्त किए जाते हैं. पुराने प्रकरणों के लंबित नहीं होने के संबंध में प्राधिकरण प्रशासन का मानना है कि आज के माहौल में मिलने वाली यह सफलता हर हफ्ते होने वाली बैठकों और लगातार फालोअप के कारण मिली है.
                रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा नागरिकों को बेहतर सुविधा देने के लिए 26 जनवरी 2009 से शुरु की गई एकल खिड़की प्रणाली से हितगाहियों और आवेदकों के प्राप्त आवेदनों पर दी गई समय सीमा में तथा कई बार उससे भी पहले निपटारा हो रहा है.प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने नागरिकों को पारदर्शी प्रशासन देने की दिशा में एकल खिड़की प्रणाली को प्रभावशाली ढ़ंग से लागू करने की इच्छा व्यक्त की थी.इसके बाद प्राधिकरण में एकल खिड़की शुरु की गई.एकल खिड़की के माध्यम से दिए जाने वाले प्रकरणों के मामले में दरअसल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया द्वारा हर बुधवार को ली जाने वाली समीक्षा बैठक ने निभाई हैं.हर साप्ताहिक बैठक में एकल खिड़की में प्राप्त आवेदनों के निपटारे की चर्चा से ही शुरुआत होती है.आवेदन पत्रों में होने वाली किसी भी परेशानी के संबंध में संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर श्री कटारिया द्वारा दिए जाने वाले निर्देश से समय सीमा के भीतर ही प्रकरणों का निपटारा त्वरित गति हो रहा है.कई प्रकरणों में समय से पहले भी समाधान भी हुआ है. श्री कटारिया इस सफलता का श्रेय प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को देते है जो लगातार सकारात्मक सोच के साथ कार्य कर रहे हैं.

कैसे काम करती है एकल खिड़की
रायपुर विकास प्राधिकरण में एकल खिड़की में आवेदक एक ही काऊन्टर में अपना आवेदन प्रस्तुत करता है.निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन पत्र के बाद काऊन्टर लिपिक आवेदक को एक रसीद देता है जिसमें प्रकरण के अनुसार 7,15 तथा 30 कार्य दिवसों में आवेदन के निराकरण की तिथि दी जाती है.इसके बाद एक साथ सभी संबंधित शाखाओं में आवेदन के विभिन्न प्रपत्र भेजे जाते है.एक आवेदन के संबंध में अलग–अलग शाखाओं में प्रपत्रों के जाने से समानान्तर रुप से कार्रवाई होती है.इस बीच आवेदक से यदि कोई बकाया राशि लेना हो अथवा कोई और जानकारी लेना हो आवेदक को प्राधिकरण द्वारा सूचित किया जाता है.इस दौरान हर हफ्ते होने वाली साप्ताहिक बैठकों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया को एकल खिड़की में प्रस्तुत सारे प्रकरणों की लिखित जानकारी दी जाती है.बैठक में प्रायः हर प्रकरण में चर्चा होती है.किसी प्रकरण में यदि कोई परेशानी या कोई जानकारी का अभाव है तो मुख्य कार्यपालन अधिकारी उस बारे में चर्चा कर संबंधित आधिकारियों को दिशा निर्देश देते है.एकल खिड़की प्रणाली में पूरी प्रक्रिया में विभिन्न प्रपत्रों के कारण भी काफी आसानी हुई है.इससे कम समय में प्रकरणों का निराकरण हो जाता है. सूचना के अधिकार के आवेदन पत्र भी एकल खिड़की के माध्यम से लिए जाते है तथा 30दिनों में इसका निराकरण कर दिया जाता है.
एकल खिड़की मील का पत्थर – श्री सुनील सोनी
रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी,उपाध्यक्षद्वय श्री रतन लाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने एकल खिड़की की कार्य प्रणाली को हितग्राहियों के लिए लाभप्रद बताया है.उन्होंने कहा कि लोकहित में ऐसे कार्य किसी भी संस्था का विश्वास अर्जित करने में सहायक होते हैं. प्राधिकरण का यह कार्य सुशासन व पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

आरडीए की एकल खिड़की में प्राप्त आवेदन व निराकरण का विवरण
(26 जनवरी 2009 से 31 जनवरी 2011 तक)
                                              समाधान किए गए आवेदनों की संख्या
  • संपत्तियों का हस्तांरण / नामांतरण - 525
  • भारहीनता - 564
  • भवनों के निर्माण / पुनर्निर्माण हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र - 1269 
  • नल कनेक्शन - 239 
  • भाड़ाक्रय पर किश्तों का पूर्ण भुगतान - 178
  • पंजीयन शुल्क की वापसी व अन्य रिफंड - 591 
  • सूचना का अधिकार - 429
                                                          कुल संख्या - 3795

Feb 5, 2011

चेक बाऊन्स होने पर अब 350 रुपए का डिसऑनर शुल्क

आरडीए में चेक बाऊन्स होने पर देना होगा 350 रुपए का डिसऑनर शुल्क
रायपुर के बाहर के चेक पर कलेक्शन शुल्क

रायपुर, 05 फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण में बाहर के चेक से राशि जमा करने पर हितग्राहियों व अन्य राशि जमाकर्ताओं से बैंकों द्वारा निर्धारित कलेक्शन शुल्क देना होगा तथा चेक अनादरित अर्थात डिसॉनर होने पर अब जमाकर्ता से तीन सौ पचास रुपए का डिसआनर शुल्क लिया जाएगा.

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार स्थानीय चेक जमा करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगता है पर रायपुर के बाहर के बैंकों द्वारा जारी आऊट स्टेशन चेक के कलेक्शन पर स्थानीय बैंकों द्वारा शुल्क लिया जाता है. बैंक द्वारा 10 हजार रुपए तक के शुल्क पर 55 रुपए दस हजार से एक लाख रुपए तक 110 रुपए तथा एक लाख रुपए से ज्यादा राशि के चेक पर 165 रुपए शुल्क लिया जाता है. इसलिए अब यह शुल्क जमाकर्ताओं से लिया जाएगा. इसी प्रकार कई बार जमा किए गए चेक कई कारणों यथा खाते में कम राशि, गलत हस्ताक्षर, दिनांक, कांट-छांट के कारण डिसॉनर हो जाते है जिससे अनावश्यक परेशानी होती है. इसलिए प्राधिकरण प्रशासन ने डिसआनर होने वाले चेक पर राशि जमाकर्ता से 350 रुपए का डिसॉनर शुल्क लेने के आदेश लेखा शाखा को दिए है. प्राधिकरण ने राशि जमाकर्ताओं से अपील की है कि वे चेक से राशि जमा करते समय इन बातों का ध्यान रखें तथा यह सुनिश्चित करें कि उनके चेक पूर्ण रुप से सही हो तथा किसी प्रकार से डिसॉनर ना हो इससे उन्हे तथा प्राधिकरण दोनों को सुविधा होगी.  

Jan 29, 2011

कमल विहार को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति


योजना के विकास की सारी औपचारिकताएं पूरी

रायपुर, 29 जनवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना को विकसित करने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है. छत्तीसगढ़ की स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी द्वारा जारी स्वीकृति आज प्राधिकरण को प्राप्त हुई. इस स्वीकृति के बाद अब कमल विहार योजना में काम शुरु करने के पहले की सारी औपचारिकताएं पूर्ण हो गई है.
प्राधिकरण द्वारा ग्राम डूण्डा, बोरियाखुर्द, डुमरतराई, देवपुरी एवं टिकरापारा के लगभग 1600 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस योजना के लिए प्राधिकरण ने पिछले वर्ष 9 नंवबर को स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी को आवेदन प्रस्तुत किया था. प्राधिकरण के आवेदन पर अथारिटी ने योजना के संबंध में कई जानकारिया मंगाई थी. प्राधिकरण ने विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई इस योजना के पहलुओँ की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने स्वयं अथारिटी के समक्ष योजना के संभी पहलुओं की जानकारी देने हेतु 23 दिसंबर को पावर पांईट प्रेजेन्टेशन दिया था. फलस्वरुप स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विशेषज्ञों नें दिनांक 21 जनवरी 2011 को हुई 18 वीं बैठक में उक्त प्रस्ताव को उपयुक्त मानते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान की.
जनभागीदारी के साथ छत्तीसगढ़ की पहली टॉऊन डेव्हलपमेंट योजना कमल विहार शहर विकास के विशेषज्ञों द्वारा तेयार की गई है. दरअसल यह योजना शहर विकास के लिए भूखंड़ों के पुनर्गठन की प्रक्रिया हैं. जिसे टॉऊन प्लॉनर्स, आर्किटेक्ट व इंजीनियर्स व पर्यावरण विशेषज्ञों ने लगातार कई महीनों की मेहनत के बाद देश की एक बेहतरीन योजना तैयार की. कमल विहार योजना रायपुर के मास्टर प्लान के अनुसार राजधानी को सुव्यवस्थित रुप से विकसित करने की एक सकारात्मक पहल है.
कमल विहार योजना में पर्यावरण के अनुकूल हरियालीयुक्त वातावरण होगा. कुल 15 सेक्टरों में विकसित होने वाली इस योजना के 185 हेक्टेयर क्षेत्र हरित क्षेत्र होगा. योजना में मल जल शोधन के लिए गंदे पानी के निस्तारण हेतु बेहतर नेटवर्क के साथ भूमिगत नालियों तथा हर सेक्टर में पर्यावरण के अनुकूल विकेन्द्रीकृत आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लॉंट होगा. ट्रीटमेंट प्लॉंट से उपचारित जल का लैंड स्केप व उद्यानों की सिंचाई के लिए पुर्नउपयोग किया जाएगा. योजना क्षेत्र में स्थित बोरिया तालाब का संरक्षण भी किया जाएगा. योजना की अनुमानित लागत लगभग 815 करोड़ रुपए आंकी गई है. योजना को लगभग तीन सालों में पूरा करने का लक्ष्य है. योजना के विकास कार्यों के लिए रायपुर सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया संदर बाजार शाखा ने पहले ही 500 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत कर दिया है.  

Jan 28, 2011

नवनियुक्त पदाधिकारियों ने देखी निर्माणाधीन योजनाएं

रायपुर, 27 जनवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त पदाधिकारियों अध्यश्र श्री सुनील सोनी,उपाध्यक्षव्दय श्री रतन लाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा  ने आज प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया और अन्य अधिकारियों के साथ न्यू राजेन्द्रनगर की कुशाभाऊ ठाकरे व भक्तमाता कर्मा व्यावसायिक परिसर तथा रायपुरा की इन्द्रप्रस्थ डुप्लेक्स योजनाओं का भ्रमण कर विकास कार्यों का अवलोक्न किया.  

Jan 26, 2011

गणतंत्र दिवस पर श्री सुनील सोनी ने फहराया राष्ट्रीय ध्वज


रायपुर 26 जनवरी 2011, गणतंत्र दिवस पर रायपुर विकास प्राधिकरण परिसर में अध्यक्ष श्री सुनील सोनी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस अवसर पर उपाध्यक्षव्दय श्री रतनलाल डागा,श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया सहित रायपुर विकास प्राधिकरण,नगर तथा ग्राम निवेश,नगरीय प्रशासन,राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) व चिप्स के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे.

Jan 25, 2011

शहर की योजनाएं राजधानी के अनुरुप हो - श्री सुनील सोनी


रायपुर, 25 जनवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण की योजनाएं शहर के लिए ही नहीं वरन पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अच्छी योजनाओं के रुप में विकसित हो इस उद्देश्य के साथ सभी को काम करना चाहिए. योजनाएं राजधानी के अनुरुप होनी चाहिए ताकि राज्य का गौरव बढ़े. प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी ने आज प्राधिकरण कार्यालय में अधिकारियों के साथ हुई पहली समीक्षा बैठक में उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि राजधानी की जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ी है इसलिए सर्वसुविधायुक्त आवासीय सुविधा लोगों की जरुरत हो गई है इस देखते हुए हमें त्वरित गति से काम करना है. समीक्षा बैठक में उपाध्यक्षद्वय श्री रतन लाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा तथा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया भी उपस्थित थे.
श्री कटारिया ने समीक्षा बैठक में पावर पाइंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्राधिकरण की वर्तमान योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी. प्राधिकरण के विकास गतिविधियों की जानकारी का अवलोकन करते हुए उपाध्यक्ष श्री रतन डागा ने कहा कि हमें विकास के सकारात्मक कार्य के जरिए जनता का विश्वास अर्जित करना है. उपाध्यक्ष श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने कहा कि प्राधिकरण का कार्य विकास करना है किन्तु आवश्यक्ता इस बात की है कि विकास के कार्य तेजी के साथ किए जाएं.
       प्राधिकरण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना करते हुए श्री सोनी ने कहा कि वे जानते है कि सभी उर्जावान और कार्य में दक्ष है लेकिन राजधानी के बढ़ते स्वरुप के कारण हमारी जिम्मेदारियां और बढ़ गई है इसलिए हमें काफी जवाबदेही के साथ काम करना है. 
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आरडीए में श्री सोनी फहराएंगे राष्ट्रीय ध्वज
रायपुर, 25 जनवरी 2011, गणतंत्र दिवस पर कल प्रातः 8.30 बजे रायपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय परिसर में अध्यक्ष श्री सुनील सोनी ध्वजारोहण करेंगे.इस अवसर पर उपाध्यक्षद्वय श्री रतनलाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया सहित रायपुर विकास प्राधिकरण, नगर तथा ग्राम निवेश, नगरीय प्रशासन, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) व चिप्स के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेगें

Jan 24, 2011

ईमानदारी के साथ हम ऐसे फैसले लेंगे जिससे जनता में विश्वास बढ़ेगा – श्री सुनील सोनी



 श्री सुनील सोनी ने आरडीए अध्यक्ष,श्री डागा और विश्वकर्मा ने उपाध्यक्ष का कार्य संभाला
देश और दुनिया के लोगों के आने से रायपुर का बेहतर विकास जरूरी श्री बृजमोहन अग्रवाल
शहर विकास की कार्य योजनाओं को पूर्ण करने सहयोग देते रहेंगे श्री राजेश मूणत
ईमानदारी के साथ हम ऐसे फैसले लेंगे जिससे जनता में विश्वास बढ़ेगा श्री सुनील सोनी
रायपुर, 24 जनवरी 2010, रायपुर विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री सुनील सोनी ने कहा है कि जिस विश्वास के साथ हमें जिम्मेदारी दी गई है हम आश्वस्त करते हैं कि हम इस संस्था में ईमानदारी के साथ ऐसे फैसले लेंगे जिससे जनता का विश्वास बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि मैं एक छात्र के रुप में प्राधिकरण का दायित्व ले रहा हूं.यहां का कार्य सीखने और समझने के बाद हम ऐसे फैसले लेंगे जो सर्वहित में होंगे.श्री सोनी ने कहा कि विकास दिखना चाहिए इसलिए हम सबके साथ मिल कर समन्वय के साथ कार्य करेंगे ताकि रायपुर शहर की तस्वीर बदल सके.श्री सोनी प्राधिकरण में अध्यक्ष का कार्य ग्रहण करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे.प्राधिकरण में छत्तीसगढ़ शासन व्दारा नियुक्त दो उपाध्यक्षों श्री रतन लाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने भी आज अपना कार्यभार ग्रहण किया.  
इस अवसर पर लोक निर्माण, संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रायपुर पहले एक छोटा शहर था आज वह छत्तीसगढ़ की राजधानी के रुप में है.यहां अब देश और दुनिया से लोग आने लगे हैं. इसलिए इसका बेहतर स्वरुप में विकास किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने जैसा कहा कि शहर विकास के लिए राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी.इसलिए नए पदाधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे शहर विकास के जो काम रुके हुए हैं उसे गति दें ताकि रायपुर राजधानी के अनुरुप बने.
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने कहा कि आज रायपुर की यह आवश्यक्ता है कि शहर व्यवस्थित हो.उन्होंने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि जितनी भी कार्य योजनाएं बनेगी.उसे पूर्ण करने के लिए हम पहले की तरह ही सहयोग देते रहेंगे.श्री मूणत ने कहा कि उनके विभाग ने रायपुर शहर विकास के लिए नगर निगम को अब तक की सबसे ज्यादा राशि दी है इसलिए इसमें तत्काल फैसले लेने की आवश्यक्ता है.श्री मूणत ने कहा कि श्री सुनील सोनी और उनकी टीम ने नगर निगम में रहते हुए जैसा काम किया है वैसा ही काम वे अब रायपुर विकास प्राधिकरण में भी करें.  
प्राधिकरण परिसर में पदाधिकारियों के पद ग्रहण के अवसर पर रायपुर के प्रभारी मंत्री श्री पून्नूलाल मोहिले, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती करुणा शुक्ला, प्रदेश भाजपा अध्य़क्ष श्री रामसेवक पैकरा,संगठन मंत्री श्री रामप्रताप सिंह,खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल,नगर निगम रायपुर के सभापति संजय श्रीवास्तव,कंस्ट्रकशन बोर्ड के अध्यक्ष श्री मोहन एंटी,प्राधिकरण के पूर्व अध्य़क्ष श्री वर्धमान सुराना, पूर्व उपाध्यक्ष श्री श्रीचंद सुन्दरानी,पूर्व संचालक सदस्य श्री खेमराज बैद,श्री गोविंद दुबे, श्रीमती सविता तराटे,सुश्री सुनंदा फणसलकर,जिला भाजपा अध्यक्ष अशोक पांडे,नगर निगम के अनेक पार्षद,प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया,कई अधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन ने प्राधिकरण के तीनो पदाधिकारियों को आगामी 4 वर्षों के लिए नियुक्त किया है.श्री सोनी इससे पहले नगर निगम रायपुर के महापौर तथा श्री रतन लाल डागा और श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा पूर्व में नगर निगम रायपुर के सभापति रहे हैं. श्री विश्वकर्मा वर्तमान में तात्यापारा वार्ड के पार्षद है तथा छत्तीसगढ़ निशक्तजन आयोग के पूर्व आयुक्त हैं.सन 2004में रायपुर विकास प्राधिकरण के पुनर्गठन के बाद श्री सोनी प्राधिकरण के तीसरे अध्यक्ष है.इसके पहले श्री श्याम बैस और श्री वर्धमान सुराना प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा श्री श्रीचंद सुन्दरानी व श्री वर्धमान सुराना उपाध्यक्ष रह चुके हैं.

Jan 3, 2011

आरडीए की वेबसाइट विदेशों में भी देख रहे हैं लोग

हर माह औसतन 432 हिट
अमरीका, ताईवान, कनाडा, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम, मलेशिया,
वियतनाम व संयुक्त अरब अमीरात में नियमित देखी जा रही है वेबसाइट

रायपुर, 03 जनवरी 2011, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विकास की दिशा में क्या काम हो रहा है इस पर विदेशों में भी नजर रखी जा रही है. भारत सहित विदेशों में भी प्राधिकरण की समाचार वेबसाइट आरडीएरायपुर डॉट ब्लॉग डॉट काम (www.rdaraipur.blogspot.com) लगातार देखी जा रही हैं. वेबसाइट में दिए आंकड़ों के अनुसार 11 जनवरी 2009 को समाचार पत्रों एवं जनसूचना के लिए शुरु की गई इस साइट को पिछले दो सालों में 8900 लोगों ने इसे हिट किया अर्थात देखा.
मई 2010 से 1 जनवरी 2011 तक विश्व भर के चौदह देशों में कुल 3458 लोगों ने प्राधिकरण की वेबसाइट को हिट किया. औसत लगाया जाए तो हर माह लगभग 432 लोगों ने वेबसाइट को देखा. इस प्रकार प्रतिदिन लगभग 15 व्यक्ति प्राधिकरण की वेबसाइट देखते हैं. आंकड़े बताते हैं कि वेबसाइट को देखने के लिए 59 प्रतिशत लोगों ने इंटरनेट एक्सपोलरर, 17 प्रतिशत ने गूगल क्रोम, 16 प्रतिशत नें फायर फॉक्स, 2 -2 प्रतिशत ने सफारी और क्रोम फ्रेम का तथा शेष ने जावा, जकार्ता कॉमन्स, सीईएमई तथा कॉमेट बर्ड ब्रॉऊजरों का उपयोग किया है. प्राधिकरण ने अपनी समाचार वेबसाइट में वर्ष 2009 में 52 तथा वर्ष 2010 में कुल 50 समाचार जारी किया. आंकड़ों के अनुसार 3 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010 की अवधि में भारत में 244, नीदरलैण्ड में 31, जापान में 3, संयुक्त राज्य अमेरिका में 2 ने तथा रुस में एक व्यक्ति ने रायपुर विकास प्राधिकरण की समाचार वेबसाइट का अवलोकन किया है. जबकि वर्ष के आखिरी दिन के 24 घंटों में अर्थात 31 दिसंबर 2010 दोपहर 12.30 बजे से 01 जनवरी 2011 सुबह 11.30 बजे तक भारत में 55, जापान में 3 व अमरीका में एक व्यक्ति ने वेबसाइट को हिट किया.
 वेबसाइट देखे जाने देशों की संख्‍या
मई 2010दिसंबर 2010
क्रं.
देश
हिट की संख्या
कुल संख्या
1
भारत
3154
3154
2
संयुक्त राज्य अमेरिका
136
3290
3
कनाड़ा
33
3323
4
नीदरलैण्ड
31
3354
5
इटली
19
3373
6
संयुक्त अरब अमीरात
17
3390
7
बेल्जियम
17
3407
8
वियतनाम
13
3420
9
लिथुआनिया
12
3432
10
मलेशिया
9
3441
11
जापान
3
3444
12
रुस
1
3445
13
ताईवान
12
3457
14
स्वीडन
1
3458
कुल हिट की संख्या
3458

Dec 30, 2010

महानगरों की भांति सुन्दर हुआ वीरनारायण सिंह परिसर

नवीनीकरण के बाद का परिसर
नवीनीकरण के पहले का परिसर
रायपुर 30 दिसंबर 2010, छत्तीसगढ़ राज्य के 10 वर्ष पूर्ण होने पर रायपुर शहर के बदलते परिवेश में वीरनारायण सिंह परिसर का भी कायाकल्प हो गया है. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 1994 में निर्मित इस व्यवसायिक भवन को इस वर्ष महानगरों की तर्ज पर एक नया स्वरुप दिया गया है. प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत की पहल पर रायपुर विकास प्राधिकरण ने लगभग 96 लाख की लागत से इसे सुन्दर बनाया है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार भवन निर्माण तकनीक की आधुनिक सामग्रियों के प्रयोग के फलस्वरुप भवनों की सुन्दरता और बढ़ जाती है. इस व्यावसायिक भवन के बाहरी सतह में एल्युमिनियम कॉम्पोजिट सेक्शन अर्थात एसीपी का उपयोग कर इसे आकर्षक बनाया गया है. जिसमें यहां के 75 व्यवसायियों और दुकानदारों की भागीदारी और महत्वपूर्ण योगदान है. भवन के ऊपर की गई रोशनी और भवन में एलईडी लाईट से शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर का नाम जब रात में जगमगाता है तो भवन और भी आकर्षक हो जाता है. भवन के पीछे दुपहिया वाहनों के लिए तथा नगरघड़ी की ओर चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग के लिए मार्किंग की जाएगी.

Dec 8, 2010

तहसीलदार को राजस्व अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार, पाल जनसूचना अधिकारी

रायपुर, 08 दिसंबर 2010. राज्य शासन ने तहसीलदार रायपुर श्री प्रणव सिंह को रायपुर विकास प्राधिकरण के राजस्व अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार श्री प्रणव सिंह, तहसीलदार रायपुर अस्थाई रुप से आगामी आदेश तक अपने वर्तमान कार्य के साथ साथ रायपुर विकास प्राधिकरण के राजस्व अधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में रहेगें. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने श्री सिंह को पूर्वानुसार राजस्व विधि और योजना शाखा का कार्य आवंटित किया है.    
     श्री कटारिया द्वारा प्राधिकरण में जारी एक आदेश के अनुसार लेखाधिकारी श्री एस.एस. पाल अपने वर्तमान कार्य के साथ साथ सूचना के अधिकार के अन्तर्गत जनसूचना अधिकारी का भी कार्य संपादित करेगें. 

Nov 23, 2010

कार्य सहायक श्री विष्‍णुप्रसाद चौबे का निधन

रायपुर, 23 नवंबर 2010. रायपुर विकास प्राधिकरण में कार्य सहायक के पद पर कार्यरत श्री विष्‍णुप्रसाद चौबे (53 वर्ष) का आज आकस्मिक निधन हो गया. उनकी आत्‍मा की शांति के लिए प्राधिकरण कार्यालय में एक शोकसभा आयोजित कर उन्‍हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. इस अवसर पर प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

Oct 25, 2010

मेट्रो की तर्ज पर वीरनारायण सिंह परिसर का कायाकल्प

रात में और भी खूबसूरत दिखेगा
रायपुर 25 अक्टूबर 2010, नगरघड़ी के सामने स्थित शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर (अभ्युदय परिसर) को मेट्रो की तर्ज पर कायाकल्प अब अंतिम चरण में हैं. लगभग 96 लाख रुपए की लागत व परिसर के दुकानदारों की सहभागिता से भवन को सुन्दर बनाया जा रहा है. रोशनी की ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि रात में भी भवन खूबसूरत दिखेगा.  
प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत की पहल पर रायपुर विकास प्राधिकरण आवंटितियों के सहयोग से भवन का पूर्ण रुप से नवीनीकरण कर रहा है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि इस व्यावसायिक भवन के आंतरिक कार्य के अलावा विशेष रुप एलीवेशन का कार्य कर इसे आकर्षक बनाया गया है. भवन की सुरक्षा के लिए बॉऊन्ड्रीवाल, बेहतर एवं साफ सफाई के लिए विट्रीफाईड टाईल्स व कोटा स्टोन फ्लोरिंग के साथ महिलाओं के लिए विशेष रुप से टायलेट का निर्माण भी किया गया है. भवन के ऊपर ऐसी लाईटें लगाई है जिससे यह रात में भी जगमगाएगा. छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीरनारायण सिंह का नाम भवन की दीवार में एलईडी की लाईट से प्रदर्शित किया जाएगा. लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में नाम दर्ज करा चुकी नगरघड़ी के बगल में होने के कारण शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर का महत्व और भी बढ़ गया है. श्री कटारिया ने कहा कि यहां के 75 व्यवसायियों और दुकानदारों ने शहर के प्रमुख स्थल मे निर्मित भवन को सुन्दर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. यह इस बात को दर्शाता है कि लोग ना केवल अपने शहर को सुन्दर बनाना चाहते है वरन स्वयं भी उसमें भागीदार होना चाहते हैं. 

Oct 23, 2010

नगरघड़ी ने बनाया एक अनोखा ना टूटने वाला रिकार्ड


नगरघड़ी की छत्तीसगढ़ी लोकधुन अब एक मिनट की
24 घंटे 24 धुन के कारण बना एक अद्वितीय 
कभी ना टूटने वाला रिकार्ड
रायपुर 23 अक्टूबर 2010, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में अपना नाम दर्ज करा चुकी रायपुर की नगरघड़ी की धुन की अवधि बढ़ा कर अब एक मिनट कर दिया गया है.पहले नगरघड़ी में बजने वाली लोकधुनों की अवधि 25 से 32 सेकेण्ड थी.
रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि नगरघड़ी में पहले बजने वाली लोकधुन की अवधि काफी कम थी,चूंकि यह लोगों के आकर्षण का केन्द्र है और दूर दूर से लोग इसे देखने और सुनने आते हैं लोगों ने यह महसूस किया कि धुनों की अवधि काफी कम है. इसलिए नगरघड़ी की स्थापना करने वाली केरल की कंपनी को धुनों की अवधि बढ़ाने को कहा गया था. चूंकि नगरघड़ी में लगने वाली इन्टीग्रेटेड चिप भारत में उपलब्ध नहीं थी इसलिए कंपनी ने इसे ताईवान से मंगाया और काफी समय तक धुनों के संयोजन और उसकी गुणवत्ता पर शोध कर तैयार किया.
रायपुर की नगरघड़ी पूरे भारत की ऐसी पहली संरचना है जिसे हर घंटे बजने वाली छत्तीसगढ़ी धुनों की अवधारणा के कारण इसे लिमका बुक आफ रिकार्ड्स 2009 तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस 2009 में शामिल किया गया है. लिमका बुक के बीसवें संस्करण के मानव कथा अध्याय में नगरघड़ी को गाता हुआ घंटाघर तथा अंग्रेजी संस्करण में सिंगिंग क्लॉक टॉवर शीर्षक से प्रकाशित किया गया. श्री कटारिया ने बताया कि नगरघड़ी में 24 घंटे में 24 छत्तीसगढ़ी धुन बजने का यह एक ऐसा रिकार्ड है जो कभी नहीं टूट सकता. इसका कारण है कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं यदि कोई 24 से ज्यादा धुन बना भी लेता है तो वह प्रासंगिक नहीं होगा क्योंकि एक दिन में 24से ज्यादा घंटे हो ही नहीं सकते. इसलिए नगरघड़ी का यह रिकार्ड कभी ना टूटने वाला एक अद्वितीय रिकार्ड बन गया है.
19 दिसंबर 1995 को रायपुर के कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने 50 फुट ऊंचे स्तंभ पर नगरघड़ी की स्थापना की गई थी. छह फुट व्यास वाले घड़ी के डायल के पीछे मैकेनिकल पद्धति से चलने वाली घड़ी में हर घंटा पूरा होने के बाद इसके बुर्ज में लगे पीतल के घंटे की आवाज गूंजती थी. इसमें दिन में एक बार चाबी भी भरनी पड़ती थी. मैकेनिकल घड़ी के बार बार तकनीकी खराबी आने के कारण 26 जनवरी 2008 को रायपुर विकास प्राधिकरण ने एक नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाई जो अतंरिक्ष के सेटेलाईट से संकेत प्राप्त कर जी.पी.एस. (ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम) प्रणाली से सही समय बताती है. अब यह हर घंटे छत्तीसगढ़ की एक लोकप्रिय मधुर लोकधुन सुनाती है.
दरअसल जी.पी.एस.पध्दति सही समय जानने की एक नई तकनीक है जो सेना द्वारा अपनाई जाती थी बाद में इसे भारतीय रेल विभाग में भी लागू किया गया ताकि पूरे देश में एक सा समय रहे. रायपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस ने तत्समय छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को लोकप्रिय बनाने के लिए नगरघड़ी में हर घंटे के बाद बजने वाले घंटे की आवाज के पहले छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को संयोजित करने का निर्णय लिया था ताकि इससे आम आदमी भी लोकधुनों से परिचित हो सके. 26 जनवरी 2008 को नई घड़ी लगने के बाद से नगरघड़ी में हर दिन हर घंटे के बाद एक छत्तीसगढ़ी लोकधुन बजती है. चौबीस घंटे में कुल 24 अलग अलग लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी धुनें बजती है. समय के मनोभावों के अनुरुप इन धुनों का चयन प्रदेश के लोक कलाकारों के विशेषज्ञ समिति के द्वारा किया गया था जिसमें लोक संगीत को पुरोधा माने जाने वाले श्री खुमानलाल साव,लोक गायिका श्रीमती ममता चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक श्री मोहन सुन्दरानी, लोक कला के ज्ञाता श्री शिव कुमार तिवारी और लोक कलाकार श्री राकेश तिवारी ने किया है. समिति की अनुशंसा के फलस्वरुप श्री राकेश तिवारी ने विशेष रुप से लोकधुनें तैयार की.सुबह चार बजे से हर घंटे के बाद लगभग 30सेकेण्ड की यह धुनें नगरघड़ी में बजती हुई छत्तीसगढ़ की लोकधुनों से आम आदमी का परिचय कराती है.\रायपुर की नगरघड़ी में चौबीस घंटे चौबीस धुनें बजती है. सुबह 4:00 बजे जसगीत, 5:00 बजे रामधुनी, 6:00 बजे भोजली, 7:00 बजे - पंथी नाचा, 8:00 बजे ददरिया, 9:00 बजे देवार, 10:00 बजे करमा, 11:00 बजे भड़ौनी, दोपहर 12:00 बजे - सुआ गीत, 1:00 बजे भरथरी, 2:00 बजे - डंडा नृत्य, 3:00 बजे फाग गीत , 4:00 बजे चंदैनी, सांयः 5:00 बजे - पंडवानी, 6:00 बजे राऊत नाचा, 7:00 बजे गौरा, रात 8:00 बजे परब, 9:00 बजे आलहा, 10:00 बजे नाचा, 11:00 बजे कमार, 12:00 बजे सरहुल, 1:00 बजे बांसगीत, 2:00 बजे ढ़ोलामारू , 3:00 बजे - सोहर गीत की धुनें नगरघड़ी से बजती है.

      राजधानी रायपुर के ह्रदय स्थल पर बनी नगरघड़ी का 19 दिसंबर 1995 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह नें लोकार्पण किया था. हर घंटे लोकधुन सुनाने के कारण अब यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति की एक नई पहचान बन गई है.नगरघड़ी का कांक्रीट स्तंभ 50फुट ऊंचा है. आर.सी.सी. संरचना पर आधारित नगरघड़ी की बाहरी दीवारों पर उदयपुर राजस्थान का सफेद संगमरमर तथा ग्रेनाईट लगा है. इसके स्तंभ के चारों दिशाओं में छह फुट व्यास वाले डायल प्लास्टिक एक्रेलिक शीट के हैं. नगरघड़ी का निर्माण 275 दिनों में हुआ था. घड़ी के स्तंभ का निर्माण कार्य एक मार्च 1995 को शुरु कर 30 नवंबर 1995 को पूरा किया गया.नई इलेक्ट्रानिक घड़ी कोचीन,केरल की टूल एंड टाईम इंजीनियरिंग कंपनी ने 90 दिनों में स्थापित क26 जनवरी को 2008 को इसे शुरु किया था. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी में जी.पी.एस.आधारित क्लॉक कंट्रोलर, स्टेपर मोटरयुक्त मैकेनिज्म इकाई, डायल, घंटे तथा मिनट के कांटे, एम्पलीफायर, चार लाऊडस्पीकर व बैटरी लगी है. नगरघड़ी में छत्तीसगढ़ की 24 लोकधुनों को संयोजित कर लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में किया गया प्रयास शायद पूरे विश्व में एक अनूठा और कभी ना टूट सकने वाला अनोखा रिकार्ड है. नगरघड़ी में हर घंटे बजने वाली लोकधुन पूरे छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति है.