रायपुर, 18 फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी ने आज कार्यालय में प्रेस प्रतिनिधियों शहर विकास के संबंध में प्राधिकरण संचालक मंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में प्रेस प्रतिनिधियों से सीधी बात की. इस अवसर पर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वय श्री रतन लाल डागा, श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा व मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया भी उपस्थित थे.
* रायपुर शहर विकास की संस्था * * 1963 से कार्यरत संस्था * * लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस * * इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस से सम्मानित
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Feb 18, 2011
शहर विकास के लिए विचार मंथन
रायपुर, 18 फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण संचालक मंडल की बैठक में आज अध्यक्ष श्री सुनील सोनी की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. इस अवसर पर उपाध्यक्ष द्वय श्री रतन लाल डागा, श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा, उपसचिव छत्तीसगढ़ शासन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी रायपुर विकास प्राधिकरण श्री अमित कटारिया, कलेक्टर के प्रतिनिधि अपर कलेक्टर श्री रमेश शर्मा, संयुक्त संचालक क्षेत्रीय कार्यालय नगर तथा ग्राम निवेश रायपुर श्री के.पी. वाजपेयी, संयुक्त संचालक संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश श्री जाहिद अली तथा आयुक्त नगर निगम के प्रतिनिधि कार्यपालन अभियंता श्री भागीरथ वर्मा उपस्थित थे.
Feb 15, 2011
कमल विहार की स्वीकृति एक ऐतिहासिक कदम
डॉ. रमन सिंह की दूरदृष्टि से छतीसगढ़
अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर
अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर
देश की सबसे बड़ी व सर्वश्रेष्ठ योजना
में से एक होगी कमल विहार
में से एक होगी कमल विहार
रायपुर 15 फरवरी 2011, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके मंत्रिमंडल ने शहर विकास की दिशा में कमल विहार जैसी नगर विकास योजना को स्वीकृति दे कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य शासन के इस निर्णय से कमल विहार देश की सबसे बेहतरीन योजनाओं में से एक साबित होगी. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ग्राम डूण्डा, बोरियाखुर्द, डुमरतराई, देवपुरी एवं टिकरापारा की 1600 एकड़ भूमि पर बनने वाली यह योजना शहर विकास की आधुनिक तकनीक व अवधारणा के आधार पर बनाई गई है. टॉऊन प्लॉनर्स, आर्किटेक्ट, इंजीनियर्स व पर्यावरण विशेषज्ञों ने लगातार कई महीनों की मेहनत के बाद देश की एक बेहतरीन योजना तैयार की है.
जनभागीदारी के साथ विकास की योजना
प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह रायपुर को नई दिल्ली, बेगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, चंडीगढ़ जैसे शहरों से भी बेहतर बनाना चाहते हैं. उऩकी सोच कि सबसे आगे हो हमारा छत्तीसगढ़ उनकी इसी सोच के कारण जनभागीदारी की योजना कमल विहार योजना जैसी सर्वसुविधायुक्त योजना बनाई गई है. मुख्यमंत्री के अनुसार विकास की आधुनिक अवधारणा में अधोसंरचना का विकास एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसलिए छत्तीसगढ़ शासन जनभागीदारी के साथ शहरों का विकास करने के लिए कृत संकल्पित है. कमल विहार जैसी योजना छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन की दिशा में आगे बढ़ने का एक और प्रयास है. कमल विहार देश की सबसे बड़ी तथा सर्वश्रेष्ठ योजना में से एक होगी.
आधुनिक अधोसंरचना का विकास
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि कमल विहार जो सुविधाएं दी जाएंगी वह अभी पूरे छत्तीसगढ़ में नहीं है. सड़क नाली, बिजली – पानी की बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं के साथ केन्द्रीय व्यावसायिक क्षेत्र अर्थात सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के अतिरिक्त हर सेक्टर में स्थानीय स्तर का शॉपिंग सेन्टर, खेल के मैदान व उद्यान, नर्सिंग होम तथा स्कूल उपलब्ध होगा. इसके अलावा पूरी योजना में हरियाली के कारण स्वस्थ वातावरण होगा. भूमिगत नालियों के कारण गन्दगी और बारिश के दिनों में पानी भराव की समस्या नहीं होगी. हर सेक्टर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लॉंट की स्थापना कर गंदे पानी का शुध्दिकरण कर उसका पुर्नउपयोग उद्यानों की सिंचाई में किया जाएगा. टेलीफोन व अन्य केबलों के लिए सर्विस डक्ट, चौबीस घंटे पानी और बिजली की उपलब्धता की व्यवस्था होगी. चौड़ी सड़कों के कारण आवागमन एवं यातायात में सुविधा होगी. रिंग रोड व बायपास छह लेन की होगी. इनमें मुख्य सर्विस लेन के अतिरिक्त पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ तथा सायकल के लिए सायकल ट्रैक की व्यवस्था होगी. शिक्षा, स्वास्थ्य, कार्यालय भवनों, सांस्कृतिक केन्द्र, बैंक – पोस्ट आफिस व अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए भूखंड उपलब्ध होगें.
Feb 10, 2011
एकल खिड़की मील का पत्थर – श्री सुनील सोनी
एकल खिड़की से आरडीए में बदला माहौल
लगातार हो रही साप्ताहिक समीक्षा बैठक से निपटे सारे 3795 प्रकरणकई काम हो रहे समय से पहले
रायपुर फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण में एकल खिड़की प्रणाली लागू करने से आवंटितियों की समस्याएं जैसे समाप्त हो गई है.दो साल पहले लागू की गई इस प्रणाली और उसके लगातार फालोअप के कारण आज की स्थिति में कोई भी पुराना प्रकरण लंबित नहीं है. इन दो सालों में 3795 आवेदन प्रकरणों का निपटारा किया गया है.एकल खिड़की के माध्यम से संपत्तियों के हस्तांरण व नामांतरण, भारहीनता, भवनों के निर्माण व पुनर्निर्माण हेतु अनापत्ति पत्र, नल कनेक्शन, भाड़ाक्रय पर किश्तों का पूर्ण भुगतान, पंजीयन शुल्क की वापसी व अन्य रिफन्ड, सूचना के अधिकार के आवेदन प्रत्र प्राप्त किए जाते हैं. पुराने प्रकरणों के लंबित नहीं होने के संबंध में प्राधिकरण प्रशासन का मानना है कि आज के माहौल में मिलने वाली यह सफलता हर हफ्ते होने वाली बैठकों और लगातार फालोअप के कारण मिली है.
रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा नागरिकों को बेहतर सुविधा देने के लिए 26 जनवरी 2009 से शुरु की गई एकल खिड़की प्रणाली से हितगाहियों और आवेदकों के प्राप्त आवेदनों पर दी गई समय सीमा में तथा कई बार उससे भी पहले निपटारा हो रहा है.प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत ने नागरिकों को पारदर्शी प्रशासन देने की दिशा में एकल खिड़की प्रणाली को प्रभावशाली ढ़ंग से लागू करने की इच्छा व्यक्त की थी.इसके बाद प्राधिकरण में एकल खिड़की शुरु की गई.एकल खिड़की के माध्यम से दिए जाने वाले प्रकरणों के मामले में दरअसल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया द्वारा हर बुधवार को ली जाने वाली समीक्षा बैठक ने निभाई हैं.हर साप्ताहिक बैठक में एकल खिड़की में प्राप्त आवेदनों के निपटारे की चर्चा से ही शुरुआत होती है.आवेदन पत्रों में होने वाली किसी भी परेशानी के संबंध में संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर श्री कटारिया द्वारा दिए जाने वाले निर्देश से समय सीमा के भीतर ही प्रकरणों का निपटारा त्वरित गति हो रहा है.कई प्रकरणों में समय से पहले भी समाधान भी हुआ है. श्री कटारिया इस सफलता का श्रेय प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों को देते है जो लगातार सकारात्मक सोच के साथ कार्य कर रहे हैं.
कैसे काम करती है एकल खिड़की
रायपुर विकास प्राधिकरण में एकल खिड़की में आवेदक एक ही काऊन्टर में अपना आवेदन प्रस्तुत करता है.निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदन पत्र के बाद काऊन्टर लिपिक आवेदक को एक रसीद देता है जिसमें प्रकरण के अनुसार 7,15 तथा 30 कार्य दिवसों में आवेदन के निराकरण की तिथि दी जाती है.इसके बाद एक साथ सभी संबंधित शाखाओं में आवेदन के विभिन्न प्रपत्र भेजे जाते है.एक आवेदन के संबंध में अलग–अलग शाखाओं में प्रपत्रों के जाने से समानान्तर रुप से कार्रवाई होती है.इस बीच आवेदक से यदि कोई बकाया राशि लेना हो अथवा कोई और जानकारी लेना हो आवेदक को प्राधिकरण द्वारा सूचित किया जाता है.इस दौरान हर हफ्ते होने वाली साप्ताहिक बैठकों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया को एकल खिड़की में प्रस्तुत सारे प्रकरणों की लिखित जानकारी दी जाती है.बैठक में प्रायः हर प्रकरण में चर्चा होती है.किसी प्रकरण में यदि कोई परेशानी या कोई जानकारी का अभाव है तो मुख्य कार्यपालन अधिकारी उस बारे में चर्चा कर संबंधित आधिकारियों को दिशा निर्देश देते है.एकल खिड़की प्रणाली में पूरी प्रक्रिया में विभिन्न प्रपत्रों के कारण भी काफी आसानी हुई है.इससे कम समय में प्रकरणों का निराकरण हो जाता है. सूचना के अधिकार के आवेदन पत्र भी एकल खिड़की के माध्यम से लिए जाते है तथा 30दिनों में इसका निराकरण कर दिया जाता है.
एकल खिड़की मील का पत्थर – श्री सुनील सोनी
रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी,उपाध्यक्षद्वय श्री रतन लाल डागा व श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा ने एकल खिड़की की कार्य प्रणाली को हितग्राहियों के लिए लाभप्रद बताया है.उन्होंने कहा कि लोकहित में ऐसे कार्य किसी भी संस्था का विश्वास अर्जित करने में सहायक होते हैं. प्राधिकरण का यह कार्य सुशासन व पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
आरडीए की एकल खिड़की में प्राप्त आवेदन व निराकरण का विवरण
(26 जनवरी 2009 से 31 जनवरी 2011 तक)
समाधान किए गए आवेदनों की संख्या
- संपत्तियों का हस्तांरण / नामांतरण - 525
- भारहीनता - 564
- भवनों के निर्माण / पुनर्निर्माण हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र - 1269
- नल कनेक्शन - 239
- भाड़ाक्रय पर किश्तों का पूर्ण भुगतान - 178
- पंजीयन शुल्क की वापसी व अन्य रिफंड - 591
- सूचना का अधिकार - 429
Feb 5, 2011
चेक बाऊन्स होने पर अब 350 रुपए का डिसऑनर शुल्क
आरडीए में चेक बाऊन्स होने पर देना होगा 350 रुपए का डिसऑनर शुल्क
रायपुर के बाहर के चेक पर कलेक्शन शुल्क
रायपुर, 05 फरवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण में बाहर के चेक से राशि जमा करने पर हितग्राहियों व अन्य राशि जमाकर्ताओं से बैंकों द्वारा निर्धारित कलेक्शन शुल्क देना होगा तथा चेक अनादरित अर्थात डिसॉनर होने पर अब जमाकर्ता से तीन सौ पचास रुपए का डिसआनर शुल्क लिया जाएगा.
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार स्थानीय चेक जमा करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगता है पर रायपुर के बाहर के बैंकों द्वारा जारी आऊट स्टेशन चेक के कलेक्शन पर स्थानीय बैंकों द्वारा शुल्क लिया जाता है. बैंक द्वारा 10 हजार रुपए तक के शुल्क पर 55 रुपए दस हजार से एक लाख रुपए तक 110 रुपए तथा एक लाख रुपए से ज्यादा राशि के चेक पर 165 रुपए शुल्क लिया जाता है. इसलिए अब यह शुल्क जमाकर्ताओं से लिया जाएगा. इसी प्रकार कई बार जमा किए गए चेक कई कारणों यथा खाते में कम राशि, गलत हस्ताक्षर, दिनांक, कांट-छांट के कारण डिसॉनर हो जाते है जिससे अनावश्यक परेशानी होती है. इसलिए प्राधिकरण प्रशासन ने डिसआनर होने वाले चेक पर राशि जमाकर्ता से 350 रुपए का डिसॉनर शुल्क लेने के आदेश लेखा शाखा को दिए है. प्राधिकरण ने राशि जमाकर्ताओं से अपील की है कि वे चेक से राशि जमा करते समय इन बातों का ध्यान रखें तथा यह सुनिश्चित करें कि उनके चेक पूर्ण रुप से सही हो तथा किसी प्रकार से डिसॉनर ना हो इससे उन्हे तथा प्राधिकरण दोनों को सुविधा होगी.