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Jun 2, 2015

पब्लिक टॉयलेट पर दोबारा कब्जा कर कम्प्यूटर आफिस चलाने वाले पर होगी सख्त कार्रवाई

आरडीए सीईओ श्री कावरे का औचक निरीक्षण

 रायपुर, 2 जून 2015, पब्लिक टॉयलेट पर एक बार कब्जा हटवाने के बाद पुनः उस पर दोबारा कब्जा कर कम्प्यूटर का ऑफिस चलाने वाले एक कम्प्यूटर सप्लायर पर आरडीए सीईओ श्री एम.डी. कावरे ने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है. वे आज अचानक रायपुर विकास प्राधिकरण की शास्त्री चौक स्थित हनुमान मंदिर योजना का निरीक्षण करने पहुंचे थे. उन्होंने पाया कि टॉयलेट के एक क्षेत्र में कब्जा कर उसमें कम्प्यूटर, टेबल, कुर्सी तथा एयर कंडीशनर लगाया गया है तथा दूसरे क्षेत्र व प्रवेश लॉबी में कम्प्यूटर से संबंधित व अन्य उपयोग का सामान रखा हुआ है.
श्री कावरे ने गत 17 मार्च को स्थल निरीक्षण के दौरान पब्लिक टॉयलेट पर कब्जा कर उपयोग किए जाने पर उसे हटाए जाने के निर्देश तकनीकी अधिकारियो को दिए थे. इसके बाद उसका कब्जा खाली करा कर टायलेट परिसर के व्यवसायियों के उपयोग के लिए खोल कर दिया गया था. किन्तु उसके बाद आज अचानक निरीक्षण पर यह पाया गया कि कम्प्यूटर सप्लायर जिसकी बाजू में दुकान है उसने वहां फिर से अपना कब्जा जमा लिया है तथा उसका निजी उपयोग करना शुरु कर दिया है.

Jun 1, 2015

लगातार बिक रहे हैं कमल विहार के भूखंड

654 प्लॉट बेच चुका है आरडीए
 आवासीय भूखंडों की अच्छी बिक्री, अब बढ़ रही है अन्य भूखंडों की मांग

 
रायपुर 01 जून 2015, रायपुर विकास प्राधिकरण हर दिन प्रायः एक से अधिक भूखंड बेच रहा है. कमल विहार योजना में ही प्राधिकरण विभिन्न आकार व प्रयोजन के 654 भूखंड का विक्रय कर चुका है. प्राधिकरण व्दारा कमल विहार के अतिरिक्त अन्य योजनाओं में रिक्त हुए फ्लैट्स, व्यवासायिक दुकानों व किराये पर दी जाने वाली संपत्तियों के आवंटन पर नियमित रुप प्रचार  प्रसार के कारण प्रदेश के ही नहीं वरन देश से बाहर रहने वाले और अन्य प्रदेशों के नागरिकों भी यहां अपने लिए भूखंड खरीद रहें हैं.
    प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एम. डी. कावरे के अनुसार गत 7 फरवरी 2014 से कमल विहार के आवासीय भूखंडों की लाटरी से आवंटन की प्रक्रिया शुरु की गई थी. इसी बीच लोकसभा चुनाव और नगरीय निकायों के चुनावों के दौरान लगभग 3 माह तक भूखंडों का आवंटन नहीं किया सका किन्तु इसके बावजूद अब प्राधिकरण की संपत्ति लेने के लिए नागरिकों में अच्छा खासा उत्साह है. उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े 15 माह में 654 भूखंडों का विक्रय होना अर्थात हर माह लगभग 42 भूखंडों का विक्रय किया जा रहा है. इसे दूसरे अर्थों में कहा जाए तो प्राधिकरण हर दिन एक से ज्यादा भूखंड का आवंटन कर रहा है. लोग फ्रीहोल्ड भूखंड लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं
        गत मई माह में ही प्राधिकरण के आवासीय, सार्वजनिक व अर्ध्द सार्वजनिक तथा व्यावासायिक के कुल 42 भूखंड विक्रय हुए हैं जिससे प्राधिकरण को 15 करोड़ 71 लाख रुपए मिलेंगे. श्री कावरे के अनुसार हर शुक्रवार को दोपहर बाद प्राधिकरण कार्यालय में निविदा और लाटरी की प्रक्रिया के माध्यम से भूखंडों का आवंटन किया जा रहा है. श्री कावरे के अनुसार कमल विहार में ऐसे निजी भूमि स्वामी जिन्हें प्राधिकरण ने विकसित भूखंडों का आवंटन किया है वे भी अपने - अपने भूखंडों विक्रय कर रहे हैं किन्तु नागरिकों को रायपुर विकास प्राधिकरण पर ही ज्यादा भरोसा है. इसीलिए लोग सीधा प्राधिकरण में संपर्क कर से भूखंड खरीदनें में अपनी रूचि दिखा कर रहे हैं. श्री कावरे के अनुसार लगभग डेढ़ लाख की आबादी के लिए बनी कमल विहार योजना में आवंटिती अपने भवनों के निर्माण के लिए नगर पालिक निगम रायपुर से मानचित्र स्वीकृति के लिए भवन निर्माण अनुज्ञा भी लेने लगे है. निर्माण के लिए प्राधिकरण व्दारा टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई  है. इस बीच कमल विहार के कई सेक्टरों में विकास और निर्माण कार्य पूरा हो गया है तथा अन्य सेक्टरों में विकास और निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है.

May 25, 2015

इन्द्रप्रस्थ रायपुरा के भूखंड कमल विहार के मुकाबले 95 रुपए सस्ते

इन्द्रप्रस्थ के प्लॉट सिर्फ फीहोल्ड, कमल विहार में लीजहोल्ड और फ्रीहोल्ड दोनों
 फ्रीहोल्ड में इन्द्रप्रस्थ 1520 तो कमल विहार 1615
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रायपुर25 मई 2015,  रायपुर विकास प्राधिकरण की इन्द्रप्रस्थ योजना के भूखंड कमल विहार योजना के मुकाबले 95 रुपए प्रति वर्गफुट सस्ते हैं.  इसके अलावा व्यावसायिक,शैक्षणिक, स्वास्थ्य के भूखंडों की ऑफसेट कीमत भी कमल विहार के मुकाबले लगभग 189.50 रुपए से 326 रुपए प्रति वर्गफुट तक कम है.
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एम.डी. कावरे के अनुसार कमल विहार में फ्रीहोल्ड के भूखंडों की दर एक ओर जहां 1615 रुपए प्रति वर्गफुट है वहीं इन्द्रप्रस्थ योजना के फ्रीहोल्ड के भूखंडों की दर 1520 प्रति वर्गफुट है. इस तरह दोनों योजनाओं की दरों में 95 रुपए प्रति वर्गफुट का अन्तर है. इन्द्रप्रस्थ योजना में प्राधिकरण ने सिर्फ फ्रीहोल्ड पर ही भूखंडों का आवंटन किया है. जबकि कमल विहार में लीज होल्ड तथा फ्री होल्ड दोनो पर भूखंडों का आवंटन किया जा रहा हैश्री कावरे के अनुसार यदि कमल विहार से इन्द्रप्रस्थ फेज 2 की आवासीय योजना का तुलना की जाए तो आवासीय में तय की गई दर 95 रुपए प्रति वर्गफुट कम है. जबकि व्यावसायिक में औसतन ऑफसेट दर रुपए 189.50 प्रति वर्गफुट, शैक्षणिक में 326 रुपए प्रति वर्गफुट, स्वास्थ्य में 208 रुपए प्रति वर्गफुट कम है. इसी प्रकार मिश्रित प्रयोजन के भूखंड जिसका व्यावसायिक के साथ साथ आवासीय उपयोग भी किया जा सकता है वह भी कमल विहार योजना के व्यावसायिक भूखंड की ऑफसेट दर से कम है
श्री कावरे ने आगे बताया कि राज्य शासन के नियमों के अनुसार भूखंडो का आवंटन भूखंड व्ययन नियमों के अनुसार ही दरें तय की जाती है. शासन के इस व्ययन नियम के अनुसार  नगर विकास योजनाओं में आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए 15 प्रतिशत आवासीय भूखंड आरक्षित रखे जाते हैं. फलस्वरुप इन्द्रप्रस्थ फेज 2 योजना में भी आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए आवासीय भूखंड का 15 प्रतिशत भूमि आरक्षित रखी गई है. इसका क्षेत्रफल लगभग  5 लाख 54 हजार छह सौ वर्गफुट है.  श्री कावरे ने कहा कि आवासीय भूखंड की दर 1520 रुपए प्रति वर्गफुट तय होने के बाद इसका आवंटन अब लाटरी के माध्यम से ही किया जाएगा. जैसा की कमल विहार योजना में किया गया है. इसके अतिरिक्त अन्य सभी भूखंड जिसमें व्यावसायिकस्वास्थ्य, शैक्षणिक तथा मिश्रित (आवास सह व्यावसायिक) उपयोग के भूखंडों का आवंटन निविदा के माध्यम से किया जाएगा. रायपुर विकास प्राधिकरण व्दारा कुछ दिनों में आवासीय सहित अन्य भूखंडों के आवंटन के लिए विज्ञापन जारी कर प्रस्ताव आमंत्रित किया जाएगा. इन्द्रप्रस्थ रायपुरा फेज 2 की योजना 130 एकड़ में लगभग 115 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जा रही योजना में अधोसंरचना का कार्य काफी तेजी से किया जा रहा है. अधोसंरचना के विकास के लिए यूनियन बैंक ने प्राधिकरण को 75 करोड़ रुपए का ऋण भी उपलब्ध कराया है. 
कमल विहार व इन्द्रप्रस्थ फेज 2 के भूखंडों का तुलनात्मक विवरण
क्रमांक
प्रयोजन
कमल विहार
(फ्रीहोल्ड रुपए में)
इन्द्रप्रस्थ
(फ्रीहोल्ड रुपए में)
अन्तर
(रुपए में)
आवंटन का माध्यम
01
आवासीय
1615
1520
95
निर्धारित दर पर आवंटन लाटरी व्दारा
02
व्यावसायिक (योजना स्तर पर)
2435
2072
189.50

ऑफसेट दर से ऊपर
निविदा के माध्यम
से आवंटन
व्यावसायिक (सेक्टर स्तर पर)
2088
03
शैक्षणिक
696
370
326
04
स्वास्थ्य
1392
1184
208
05
सार्वजनिक व अर्ध सार्वजनिक
1948
-
-
06
मिश्रित (आवासीय सह व्यावसायिक)
-
2072
-


May 13, 2015

इन्द्रप्रस्थ रायपुरा के आवासीय भूखंडों की दर 1520 रुपए प्रति वर्गफुट

रायपुर, 13 मई 2015, रायपुर विकास प्राधिकरण ने कमल विहार योजना के बाद अब इन्द्रप्रस्थ रायपुरा फेज - 2 के आवासीय भूखंडों की दर निर्धारित कर दी है. गत माह निविदा में
आई दरों के औसत के आधार पर आवासीय भूखंड की दर 1520 रुपए प्रति वर्गफुट तय की गई है. अब इस दर पर शेष आवासीय भूखंडों को लाटरी के माध्यम से आवंटित किया जाएगा. जबकि व्यावसायिक, स्वास्थ्य तथा मिश्रित (आवास सह व्यावसायिक) के भूखंडों का आवंटन निविदा के माध्यम से ही होगा.    

प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एम. डी. कावरे के अनुसार छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश विकसित भूमियों, ग्रहों, भवनों तथा अन्य संरचनाओं व्ययन नियमों के अनुसार पिछले माह प्राधिकरण ने इन्द्रप्रस्थ रायपुरा फेज  के आवासीय भूखंडों की दर तय करने के लिए निविदा के माध्यम से दरों का प्रस्ताव आमंत्रित किया गया था. इससे पहले जनवरी में प्राधिकरण संचालक मंडल ने निविदा के लिए ऑफसेट दरों को अपनी स्वीकृति दी थी. जिसमें यह कहा गया था कि आवासीय भूखंडों की अंतिम दरों का निर्धारण कुछ सैम्पल प्लॉटों की निविदा कर औसत दर के आधार तय किया जाए. जबकि अन्य सभी भूखंड निविदा के माध्यम से ही आवंटित किए जाएं.
इन्द्रप्रस्थ रायपुरा फेज 2 की इस योजना में एक मात्र शैक्षणिक प्रयोजन के भूखंड का निविदा के माध्यम से आवंटन किया जा चुका है. अब प्राधिकरण के पास आवासीय के साथ व्यावसायिक, मिश्रित (आवास सह व्यावसायिक) तथा स्वास्थ्य प्रयोजन के भूखंड ही उपलब्ध हैं. जिसके लिए आगामी कुछ दिनों में प्राधिकरण व्दारा विज्ञापन जारी कर प्रस्ताव आमंत्रित किया जाएगा. इन्द्रप्रस्थ रायपुरा फेज 2 की योजना 130 एकड़ में लगभग 115 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जा रही इन्द्रप्रस्थ योजना फेज 2 में अधोसंरचना का कार्य तेजी से किया जा रहा है. अधोसंरचना के विकास के लिए यूनियन बैंक ने प्राधिकरण को 75 करोड़ रुपए का ऋण भी दिया है.

Apr 30, 2015

आरडीए के पूनाराम यादव सेवानिवृत

हर दीपावली में कार्यालय में आकर दीप जलाया
         रायपुर 30 अप्रैल 2015, रायपुर विकास प्राधिकरण में कार्यरत जमादार श्री पूनाराम यादव आज सेवानिवृत हो गए. 39 साल की सेवा के बाद उन्हे रायपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों
और कर्मचारियों ने उनकी सेवाओं का सम्मान करते हुए उन्हें बिदाई दी. आरडीए की अतिरिक्त सीईओ श्री यू.एस. अग्रवाल ने उन्हें श्रीफल व शाल दे कर उनके कार्यों की सराहना की और सम्मानित किया. बेहद अनुशासित और कार्य के प्रति समर्पित पूनाराम को प्राधिकरण से इतना लगाव था कि वे हर दीपावली की रात कार्यालय में आ कर दिया जलाया करते थे. इस अवसर पर प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री जे.एस.भाटिया, अधीक्षण अभियंता श्री पी.आर. नारंग, प्रशासकीय अधिकारी श्री ए.डी. जान, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र सिंह सेंगर सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे.


Apr 29, 2015

आरडीए ने 1700 भूखंड किए फ्रीहोल्ड

30 साल की लीज अवधि पूरी, 800 को भेज रहे सूचना
रायपुर 29 अप्रैल 2015, राज्य शासन व्दारा रायपुर विकास प्राधिकरण की योजनाओं के आवासीय भूखंडों को फ्रीहोल्ड करने की सुविधा देने के बाद से रायपुर विकास प्राधिकरण ने 1700 भूखंड फ्रीहोल्ड कर दिए हैं. वहीं विभिन्न योजनाओं में जिन 800 भूखंडों व भवनों की 30 साल की लीज अवधि समाप्त हो रही है उन्हें लीज नवीनीकरण की सूचना भेजी जा रही है.
आरडीए के सीईओ श्री एम. डी. कावरे ने आज कार्यालय में हुई एक बैठक में राजस्व शाखा को निर्देश दिया है कि वे प्राधिकरण की जिन योजनाओं की भूमि राजस्व रिकार्ड में दर्ज है उनमें आने वाले सभी भूखंडों के फ्रीहोल्ड के आवेदनों का तुरंत निपटारा करें. उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के आधिपत्य की ऐसी भूमि जो नजूल, शासकीय व अन्य भूमि है तथा राजस्व रिकार्ड में किन्ही कारणों से प्राधिकरण के नाम पर दर्ज नहीं हुई है, उसके संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से संपर्क कर आवश्यक कार्रवाई की जाए ताकि प्राधिकरण के नाम पर भूमि दर्ज की जा सके. इससे अन्य आवंटितियों की संपत्ति फ्रीहोल्ड की जा सके. बैठक में बताया गया कि देवेन्द्रनगर, शैलेन्द्रनगर, कटोरातालाब, इन्द्रप्रस्थ रायपुरा, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी आवास योजना के अतंर्गत संपत्तियों को नियमित रुप से फ्रीहोल्ड किया जा रहा है. 
उल्लेखनीय है कि फ्रीहोल्ड का अर्थ है कि आवासीय भूखंड के फ्रीहोल्ड होने पर आवंटितियों को भविष्य में प्राधिकरण को कोई भूभाटक नहीं देना होगा और ना ही उसे अपने भूखंड के विक्रय करने के लिए किसी प्रकार की अनुमति लेनी होगी. फ्रीहोल्ड होने के बाद आवंटिति भूभाटक और विक्रय की अनुमति लेने की औपचारिकता से पूरी तरह से मुक्त हो जाते हैं.

 सन् 1963 से नगर सुधार न्यास और 1977 से रायपुर विकास प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद से आवंटित भूखंड व भवन 30 साल के पट्टे अर्थात लीज पर दिए गए थे. इनमें अधिकांश की लीज अवधि समाप्त हो गई है या समाप्त होने वाली है. प्राधिकरण व्दारा नियमित रुप से आवंटितियों की संपत्ति की लीज का नवीनीकरण कर रहा है. वर्तमान में 800 आवासीय भूखंड तथा भवनों की लीज अवधि पूरी हो रही है. इसलिए ऐसे सभी आवंटितियों को प्राधिकरण लीज नवीनीकरण कराने के लिए सूचनाएं भेज रहा है ताकि वे समय रहते ही लीज का नवीनीकरण करा सकें.   

Apr 28, 2015

रहते शिलांग में प्लॉट खरीदा कमल विहार में

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की छबि देख कर रायपुर में लिया प्लॉट
                           छत्तीसगढ़ पहले कभी नहीं देखा
रायपुर 28 अप्रैल 2015, भारत के उत्तर पूर्व में स्थित राज्य मेघालय की राजधानी है शिलांग. यहां दूरसंचार विभाग में काम करने वाले इंजीनियर असित घोष छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से काफी प्रभावित हैं. इसीलिए उन्होंने राजधानी रायपुर के कमल विहार में अपने लिए एक प्लॉट खरीदा है. रिटायरमेंट के बाद वे अपने परिवार के साथ ही रायपुर में ही रहना चाहते हैं. क्योंकि उन्हें
छत्तीसगढ़ और यहां के लोग काफी अच्छे लगे. यही नहीं वे अपने एक मित्र जो उनके सीनियर भी रहे हैं को तीन बार की लगातार कोशिशों के बाद कमल विहार में एक प्लॉट दिलवाने में सफल रहे हैं. ताजुब्ब की बात यह है कि इन दोनों ने इसके पहले छत्तीसगढ़ का नाम भर सुना था पर वे यहां कभी आए नहीं थेबिलासपुर में रहने वाले एक मित्र ने उन्हें रायपुर में अपने लिए एक बिल्डर से मकान खरीदने की बात बताते हुए सुझाव दिया था कि यदि वे रहने के लिए कोई प्रापर्टी खरीदना चाहते हैं तो रायपुर में ही लें. यहां प्लॉट या मकान खरीदना एक खरा सौदा है.  
श्री घोष के सीनियर रहे श्री अंतिश सेनगुप्ता बीएसएनएल में डिविजनल इंजीनियर थे, वे अब रिटायर हो चुके हैं पर दोनों की अच्छी मित्रता है. शिलांग में रह कर रायपुर जैसे एक अनजान शहर मे उन्होंने प्रापर्टी क्यों ली. इस पर असित कहते हैं कि मैं अकसर पत्र पत्रिकाओं और टेलीविजन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को देखता और सुनता था. मैने यह महसूस किया कि वे छत्तीसगढ़ में काफी अच्छा काम कर रहें हैं और अपने राज्य विकास का काफी काम कर रहे हैं. तभी से मैंने यहां प्लॉट लेने का मन बना लिया था. इस कारण मुझे छत्तीसगढ़ को और जानने की इच्छा हुई. मेरे बिलासपुर वाले मित्र से भी अक्सर बातें होती रहती थी. सो उनके कहने पर मैंने और अंतिश जी ने यह निर्णय लिया कि हम रायपुर में ही अपने लिए प्लॉट लेंगे ताकि रिटायरमेंट के बाद यहां सुकून से रह सकें. वे कहते हैं कि शिलांग आदिवासीवासी बहुल क्षेत्र है और वहां छठी अनुसूची लागू होने के कारण संपत्ति खरीदना काफी मुश्किल है. शिलांग शहर के लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र में ही सामान्य व्यक्ति संपत्ति खरीद सकता है पर वहां जमीन की खरीदी बिक्री बहुत कम होती है. आदिवासी क्षेत्र होने के कारण सामान्य वर्ग वहां भूमि नहीं खरीद सकता. बंगाल में चार भाईयों के नाम पर उनके परिवार का एक बड़ा प्लॉट है लेकिन कोई उनके प्लॉट पर कब्जा न कर बैठे यही डर हमेशा लगता रहता है. चूंकि छत्तीसगढ़ और यहां के लोग काफी अच्छे लगे इसलिए मैंने यहां अपने मित्र के साथ अपने लिए  कमल विहार में एक प्लॉट खरीदा.

दो महीने पहले फोन पर व्हॉट्स अप के माध्यम से जब इन्हें आरडीए के अधिकारियों ने कमल विहार के प्लॉटों की जानकारी भेजी तो दोनों ने एक साथ मिल कर कमल विहार में प्लॉट लेने की सोची और  शिलांग से ही अपना आवेदन रायपुर विकास प्राधिकरण को भेजा. चूंकि प्लॉट का आवंटन लॉटरी से हो रहा था. इसमें असित घोष की लॉटरी तो निकल गई पर अंतिश सेनगुप्ता रह गए उनको कोई प्लॉट नहीं मिला. श्री सेनगुप्ता ने दूसरी और तीसरी बार फिर अपनी किस्मत आजमाई पर इस बार भी वे असफल रहे. इस दौरान वे लगातार प्राधिकरण की वेबसाईट, फेसबुक और अधिकारियों के संपर्क में रहे. लगातार धोखा देती किस्मत के बाद आखिर में दोनों ने यह फैसला किया कि वे स्वयं रायपुर जाकर देखेंगे की लॉटरी कैसे की जा रही है. अप्रैल के पहले सप्ताह में वे दोनों लाटरी के दो दिन पहले रायपुर पहुंचे. पहले उन्होंने कमल विहार देखा और दूसरे दिन नया रायपुर. तीसरे दिन शुक्रवार को वे रायपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय आए. लेकिन वो जिस आकार का प्लॉट लेना चाहते थे वह उपलब्ध नहीं थे. चूंकि वे इस बार प्लॉट लेने के दृढ़ इरादे से आए थे सो उन्होंने आवासीय प्लॉट के बदले सार्वजनिक - अर्ध्द सार्वजनिक उपयोग का प्लॉट लेने का फैसला किया. जिसमें वे नीचे बैंक, कार्यालय या होटल और ऊपर निवास बना सकते थे. सो उन्होंने टेन्डर भरा और इस बार किस्मत ने उनका पूरा साथ दिया और उनको 1500 वर्गफुट का उनकी पसंद का प्लॉट मिल गया. प्लॉट मिलने के बाद उन्होंने बताया कि हमारी जब अधिकारियों से बात होती थी तो ऐसा लगता ही नहीं था कि हमारी किसी सरकारी संस्था के लोगों से बात हो रही है. सबका व्यवहार इतना अच्छा है कि हमें तो शक हो गया था कि शायद हम किसी निजी संस्था वालों से तो बात कर नहीं कर रहे हैं. यहां आकर हमे वाकई अच्छा लगा की किसी सरकारी संस्था के लोग भी इस तरह से अच्छा व्यवहार कर सकते हैं.