योजना के विकास की सारी औपचारिकताएं पूरी
रायपुर, 29 जनवरी 2011, रायपुर विकास प्राधिकरण की कमल विहार योजना को विकसित करने के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है. छत्तीसगढ़ की स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी द्वारा जारी स्वीकृति आज प्राधिकरण को प्राप्त हुई. इस स्वीकृति के बाद अब कमल विहार योजना में काम शुरु करने के पहले की सारी औपचारिकताएं पूर्ण हो गई है.
प्राधिकरण द्वारा ग्राम डूण्डा, बोरियाखुर्द, डुमरतराई, देवपुरी एवं टिकरापारा के लगभग 1600 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित इस योजना के लिए प्राधिकरण ने पिछले वर्ष 9 नंवबर को स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी को आवेदन प्रस्तुत किया था. प्राधिकरण के आवेदन पर अथारिटी ने योजना के संबंध में कई जानकारिया मंगाई थी. प्राधिकरण ने विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई इस योजना के पहलुओँ की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने स्वयं अथारिटी के समक्ष योजना के संभी पहलुओं की जानकारी देने हेतु 23 दिसंबर को पावर पांईट प्रेजेन्टेशन दिया था. फलस्वरुप स्टेट लेवल इन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथारिटी छत्तीसगढ़ के पर्यावरण विशेषज्ञों नें दिनांक 21 जनवरी 2011 को हुई 18 वीं बैठक में उक्त प्रस्ताव को उपयुक्त मानते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान की.
जनभागीदारी के साथ छत्तीसगढ़ की पहली टॉऊन डेव्हलपमेंट योजना कमल विहार शहर विकास के विशेषज्ञों द्वारा तेयार की गई है. दरअसल यह योजना शहर विकास के लिए भूखंड़ों के पुनर्गठन की प्रक्रिया हैं. जिसे टॉऊन प्लॉनर्स, आर्किटेक्ट व इंजीनियर्स व पर्यावरण विशेषज्ञों ने लगातार कई महीनों की मेहनत के बाद देश की एक बेहतरीन योजना तैयार की. कमल विहार योजना रायपुर के मास्टर प्लान के अनुसार राजधानी को सुव्यवस्थित रुप से विकसित करने की एक सकारात्मक पहल है.
कमल विहार योजना में पर्यावरण के अनुकूल हरियालीयुक्त वातावरण होगा. कुल 15 सेक्टरों में विकसित होने वाली इस योजना के 185 हेक्टेयर क्षेत्र हरित क्षेत्र होगा. योजना में मल – जल शोधन के लिए गंदे पानी के निस्तारण हेतु बेहतर नेटवर्क के साथ भूमिगत नालियों तथा हर सेक्टर में पर्यावरण के अनुकूल विकेन्द्रीकृत आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लॉंट होगा. ट्रीटमेंट प्लॉंट से उपचारित जल का लैंड स्केप व उद्यानों की सिंचाई के लिए पुर्नउपयोग किया जाएगा. योजना क्षेत्र में स्थित बोरिया तालाब का संरक्षण भी किया जाएगा. योजना की अनुमानित लागत लगभग 815 करोड़ रुपए आंकी गई है. योजना को लगभग तीन सालों में पूरा करने का लक्ष्य है. योजना के विकास कार्यों के लिए रायपुर सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया संदर बाजार शाखा ने पहले ही 500 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत कर दिया है.