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Dec 30, 2010

महानगरों की भांति सुन्दर हुआ वीरनारायण सिंह परिसर

नवीनीकरण के बाद का परिसर
नवीनीकरण के पहले का परिसर
रायपुर 30 दिसंबर 2010, छत्तीसगढ़ राज्य के 10 वर्ष पूर्ण होने पर रायपुर शहर के बदलते परिवेश में वीरनारायण सिंह परिसर का भी कायाकल्प हो गया है. रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 1994 में निर्मित इस व्यवसायिक भवन को इस वर्ष महानगरों की तर्ज पर एक नया स्वरुप दिया गया है. प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत की पहल पर रायपुर विकास प्राधिकरण ने लगभग 96 लाख की लागत से इसे सुन्दर बनाया है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया के अनुसार भवन निर्माण तकनीक की आधुनिक सामग्रियों के प्रयोग के फलस्वरुप भवनों की सुन्दरता और बढ़ जाती है. इस व्यावसायिक भवन के बाहरी सतह में एल्युमिनियम कॉम्पोजिट सेक्शन अर्थात एसीपी का उपयोग कर इसे आकर्षक बनाया गया है. जिसमें यहां के 75 व्यवसायियों और दुकानदारों की भागीदारी और महत्वपूर्ण योगदान है. भवन के ऊपर की गई रोशनी और भवन में एलईडी लाईट से शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर का नाम जब रात में जगमगाता है तो भवन और भी आकर्षक हो जाता है. भवन के पीछे दुपहिया वाहनों के लिए तथा नगरघड़ी की ओर चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग के लिए मार्किंग की जाएगी.

Dec 8, 2010

तहसीलदार को राजस्व अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार, पाल जनसूचना अधिकारी

रायपुर, 08 दिसंबर 2010. राज्य शासन ने तहसीलदार रायपुर श्री प्रणव सिंह को रायपुर विकास प्राधिकरण के राजस्व अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार श्री प्रणव सिंह, तहसीलदार रायपुर अस्थाई रुप से आगामी आदेश तक अपने वर्तमान कार्य के साथ साथ रायपुर विकास प्राधिकरण के राजस्व अधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में रहेगें. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने श्री सिंह को पूर्वानुसार राजस्व विधि और योजना शाखा का कार्य आवंटित किया है.    
     श्री कटारिया द्वारा प्राधिकरण में जारी एक आदेश के अनुसार लेखाधिकारी श्री एस.एस. पाल अपने वर्तमान कार्य के साथ साथ सूचना के अधिकार के अन्तर्गत जनसूचना अधिकारी का भी कार्य संपादित करेगें. 

Nov 23, 2010

कार्य सहायक श्री विष्‍णुप्रसाद चौबे का निधन

रायपुर, 23 नवंबर 2010. रायपुर विकास प्राधिकरण में कार्य सहायक के पद पर कार्यरत श्री विष्‍णुप्रसाद चौबे (53 वर्ष) का आज आकस्मिक निधन हो गया. उनकी आत्‍मा की शांति के लिए प्राधिकरण कार्यालय में एक शोकसभा आयोजित कर उन्‍हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. इस अवसर पर प्राधिकरण के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

Oct 25, 2010

मेट्रो की तर्ज पर वीरनारायण सिंह परिसर का कायाकल्प

रात में और भी खूबसूरत दिखेगा
रायपुर 25 अक्टूबर 2010, नगरघड़ी के सामने स्थित शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर (अभ्युदय परिसर) को मेट्रो की तर्ज पर कायाकल्प अब अंतिम चरण में हैं. लगभग 96 लाख रुपए की लागत व परिसर के दुकानदारों की सहभागिता से भवन को सुन्दर बनाया जा रहा है. रोशनी की ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि रात में भी भवन खूबसूरत दिखेगा.  
प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री राजेश मूणत की पहल पर रायपुर विकास प्राधिकरण आवंटितियों के सहयोग से भवन का पूर्ण रुप से नवीनीकरण कर रहा है. प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि इस व्यावसायिक भवन के आंतरिक कार्य के अलावा विशेष रुप एलीवेशन का कार्य कर इसे आकर्षक बनाया गया है. भवन की सुरक्षा के लिए बॉऊन्ड्रीवाल, बेहतर एवं साफ सफाई के लिए विट्रीफाईड टाईल्स व कोटा स्टोन फ्लोरिंग के साथ महिलाओं के लिए विशेष रुप से टायलेट का निर्माण भी किया गया है. भवन के ऊपर ऐसी लाईटें लगाई है जिससे यह रात में भी जगमगाएगा. छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीरनारायण सिंह का नाम भवन की दीवार में एलईडी की लाईट से प्रदर्शित किया जाएगा. लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस में नाम दर्ज करा चुकी नगरघड़ी के बगल में होने के कारण शहीद वीरनारायण सिंह व्यावसायिक परिसर का महत्व और भी बढ़ गया है. श्री कटारिया ने कहा कि यहां के 75 व्यवसायियों और दुकानदारों ने शहर के प्रमुख स्थल मे निर्मित भवन को सुन्दर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. यह इस बात को दर्शाता है कि लोग ना केवल अपने शहर को सुन्दर बनाना चाहते है वरन स्वयं भी उसमें भागीदार होना चाहते हैं. 

Oct 23, 2010

नगरघड़ी ने बनाया एक अनोखा ना टूटने वाला रिकार्ड


नगरघड़ी की छत्तीसगढ़ी लोकधुन अब एक मिनट की
24 घंटे 24 धुन के कारण बना एक अद्वितीय 
कभी ना टूटने वाला रिकार्ड
रायपुर 23 अक्टूबर 2010, लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस में अपना नाम दर्ज करा चुकी रायपुर की नगरघड़ी की धुन की अवधि बढ़ा कर अब एक मिनट कर दिया गया है.पहले नगरघड़ी में बजने वाली लोकधुनों की अवधि 25 से 32 सेकेण्ड थी.
रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एस.एस.बजाज और मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया ने बताया कि नगरघड़ी में पहले बजने वाली लोकधुन की अवधि काफी कम थी,चूंकि यह लोगों के आकर्षण का केन्द्र है और दूर दूर से लोग इसे देखने और सुनने आते हैं लोगों ने यह महसूस किया कि धुनों की अवधि काफी कम है. इसलिए नगरघड़ी की स्थापना करने वाली केरल की कंपनी को धुनों की अवधि बढ़ाने को कहा गया था. चूंकि नगरघड़ी में लगने वाली इन्टीग्रेटेड चिप भारत में उपलब्ध नहीं थी इसलिए कंपनी ने इसे ताईवान से मंगाया और काफी समय तक धुनों के संयोजन और उसकी गुणवत्ता पर शोध कर तैयार किया.
रायपुर की नगरघड़ी पूरे भारत की ऐसी पहली संरचना है जिसे हर घंटे बजने वाली छत्तीसगढ़ी धुनों की अवधारणा के कारण इसे लिमका बुक आफ रिकार्ड्स 2009 तथा इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस 2009 में शामिल किया गया है. लिमका बुक के बीसवें संस्करण के मानव कथा अध्याय में नगरघड़ी को गाता हुआ घंटाघर तथा अंग्रेजी संस्करण में सिंगिंग क्लॉक टॉवर शीर्षक से प्रकाशित किया गया. श्री कटारिया ने बताया कि नगरघड़ी में 24 घंटे में 24 छत्तीसगढ़ी धुन बजने का यह एक ऐसा रिकार्ड है जो कभी नहीं टूट सकता. इसका कारण है कि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं यदि कोई 24 से ज्यादा धुन बना भी लेता है तो वह प्रासंगिक नहीं होगा क्योंकि एक दिन में 24से ज्यादा घंटे हो ही नहीं सकते. इसलिए नगरघड़ी का यह रिकार्ड कभी ना टूटने वाला एक अद्वितीय रिकार्ड बन गया है.
19 दिसंबर 1995 को रायपुर के कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने 50 फुट ऊंचे स्तंभ पर नगरघड़ी की स्थापना की गई थी. छह फुट व्यास वाले घड़ी के डायल के पीछे मैकेनिकल पद्धति से चलने वाली घड़ी में हर घंटा पूरा होने के बाद इसके बुर्ज में लगे पीतल के घंटे की आवाज गूंजती थी. इसमें दिन में एक बार चाबी भी भरनी पड़ती थी. मैकेनिकल घड़ी के बार बार तकनीकी खराबी आने के कारण 26 जनवरी 2008 को रायपुर विकास प्राधिकरण ने एक नई इलेक्ट्रॉनिक घड़ी लगाई जो अतंरिक्ष के सेटेलाईट से संकेत प्राप्त कर जी.पी.एस. (ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम) प्रणाली से सही समय बताती है. अब यह हर घंटे छत्तीसगढ़ की एक लोकप्रिय मधुर लोकधुन सुनाती है.
दरअसल जी.पी.एस.पध्दति सही समय जानने की एक नई तकनीक है जो सेना द्वारा अपनाई जाती थी बाद में इसे भारतीय रेल विभाग में भी लागू किया गया ताकि पूरे देश में एक सा समय रहे. रायपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री श्याम बैस ने तत्समय छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को लोकप्रिय बनाने के लिए नगरघड़ी में हर घंटे के बाद बजने वाले घंटे की आवाज के पहले छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को संयोजित करने का निर्णय लिया था ताकि इससे आम आदमी भी लोकधुनों से परिचित हो सके. 26 जनवरी 2008 को नई घड़ी लगने के बाद से नगरघड़ी में हर दिन हर घंटे के बाद एक छत्तीसगढ़ी लोकधुन बजती है. चौबीस घंटे में कुल 24 अलग अलग लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी धुनें बजती है. समय के मनोभावों के अनुरुप इन धुनों का चयन प्रदेश के लोक कलाकारों के विशेषज्ञ समिति के द्वारा किया गया था जिसमें लोक संगीत को पुरोधा माने जाने वाले श्री खुमानलाल साव,लोक गायिका श्रीमती ममता चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक श्री मोहन सुन्दरानी, लोक कला के ज्ञाता श्री शिव कुमार तिवारी और लोक कलाकार श्री राकेश तिवारी ने किया है. समिति की अनुशंसा के फलस्वरुप श्री राकेश तिवारी ने विशेष रुप से लोकधुनें तैयार की.सुबह चार बजे से हर घंटे के बाद लगभग 30सेकेण्ड की यह धुनें नगरघड़ी में बजती हुई छत्तीसगढ़ की लोकधुनों से आम आदमी का परिचय कराती है.\रायपुर की नगरघड़ी में चौबीस घंटे चौबीस धुनें बजती है. सुबह 4:00 बजे जसगीत, 5:00 बजे रामधुनी, 6:00 बजे भोजली, 7:00 बजे - पंथी नाचा, 8:00 बजे ददरिया, 9:00 बजे देवार, 10:00 बजे करमा, 11:00 बजे भड़ौनी, दोपहर 12:00 बजे - सुआ गीत, 1:00 बजे भरथरी, 2:00 बजे - डंडा नृत्य, 3:00 बजे फाग गीत , 4:00 बजे चंदैनी, सांयः 5:00 बजे - पंडवानी, 6:00 बजे राऊत नाचा, 7:00 बजे गौरा, रात 8:00 बजे परब, 9:00 बजे आलहा, 10:00 बजे नाचा, 11:00 बजे कमार, 12:00 बजे सरहुल, 1:00 बजे बांसगीत, 2:00 बजे ढ़ोलामारू , 3:00 बजे - सोहर गीत की धुनें नगरघड़ी से बजती है.

      राजधानी रायपुर के ह्रदय स्थल पर बनी नगरघड़ी का 19 दिसंबर 1995 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह नें लोकार्पण किया था. हर घंटे लोकधुन सुनाने के कारण अब यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति की एक नई पहचान बन गई है.नगरघड़ी का कांक्रीट स्तंभ 50फुट ऊंचा है. आर.सी.सी. संरचना पर आधारित नगरघड़ी की बाहरी दीवारों पर उदयपुर राजस्थान का सफेद संगमरमर तथा ग्रेनाईट लगा है. इसके स्तंभ के चारों दिशाओं में छह फुट व्यास वाले डायल प्लास्टिक एक्रेलिक शीट के हैं. नगरघड़ी का निर्माण 275 दिनों में हुआ था. घड़ी के स्तंभ का निर्माण कार्य एक मार्च 1995 को शुरु कर 30 नवंबर 1995 को पूरा किया गया.नई इलेक्ट्रानिक घड़ी कोचीन,केरल की टूल एंड टाईम इंजीनियरिंग कंपनी ने 90 दिनों में स्थापित क26 जनवरी को 2008 को इसे शुरु किया था. नई इलेक्ट्रानिक घड़ी में जी.पी.एस.आधारित क्लॉक कंट्रोलर, स्टेपर मोटरयुक्त मैकेनिज्म इकाई, डायल, घंटे तथा मिनट के कांटे, एम्पलीफायर, चार लाऊडस्पीकर व बैटरी लगी है. नगरघड़ी में छत्तीसगढ़ की 24 लोकधुनों को संयोजित कर लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में किया गया प्रयास शायद पूरे विश्व में एक अनूठा और कभी ना टूट सकने वाला अनोखा रिकार्ड है. नगरघड़ी में हर घंटे बजने वाली लोकधुन पूरे छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति की अभिव्यक्ति है. 

Oct 22, 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सोच है कमल विहार









कमल विहार के दुष्प्रचार का जनता पर कोई असर नहीं
योजना को व्यापक जनसमर्थन
योजना के बाहर के भूस्वामियों का अपनी भूमि योजना में शामिल करने का आग्रह  
रायपुर 22अक्टूबर 2010,आम आदमी को भूमाफियाओं और बिचौलियों से बचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन व्दारा बनाई जा रही कमल विहार योजना को व्यापक जनसमर्थन मिला है.योजना की कुल 80 प्रतिशत भूमि अब प्राधिकरण को उपलब्ध हो गई है.आलम ये है कि योजना क्षेत्र के बाहर के भूमि स्वामी भी रायपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में संपर्क कर अपनी भूमि को योजना में शामिल करने का आग्रह कर रहे हैं.योजना में कुल 80प्रतिशत भूमि की उपलब्धता से अब योजना में विकास और निर्माण कार्य को हरी झंड़ी मिल गई है.
रायपुर विकास प्राधिकरण ने योजना के संबंध में दुष्प्रचार कर रहे भूमाफियाओं,जमीन के दलालों और स्वार्थी तत्वों को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि वे एक झूठ को सौ बार बोल कर झूठ को सच नहीं बना सकते.वो दिन गए जब वे जनता को जानकारी के अभाव में ठग लेते थे.आज का आम आदमी जानकारी पाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा जागरुक और सचेत है.वहीं दूसरी ओर प्राधिकरण ने भूमाफियाओं,बिचौलियों तथा स्वार्थी तत्वों के तमाम दुष्प्रचार तथा हथकंड़ों के बावजूद जनता को विभिन्न माध्यमों से सही एवं पारदर्शी जानकारी पहुंचा कर योजना के हर पहलू को जनता के सामने रख दिया है. कमल विहार योजना के संबंध में जानकारी चाहने वाले लोगों से सीधे मुलाकात के लिए उपलब्ध रहने वाले मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अमित कटारिया की सहज उपलब्धता से लोग आश्वस्त है कि छत्तीसगढ़ सरकार राजधानी रायपुर में कमल विहार जैसी श्रेष्ठ योजना ला कर लोगों को दिली तौर पर सुकून पहुंचाएगी.
देश की बेहतरीन आवासीय योजनाओं में से एक
प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह रायपुर को नई दिल्ली, बेगलुरु, मुंबई, हैदराबाद, चंडीगढ़ जैसे शहरों से भी बेहतर बनाना चाहते हैं. उऩकी सोच कि सबसे आगे हो हमारा छत्तीसगढ़ उनकी इसी सोच के कारण जनभागीदारी की योजना कमल विहार योजना जैसी सर्वसुविधायुक्त योजना तैयार की गई है. मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के अनुसार विकास की आधुनिक अवधारणा में अधोसंरचना का विकास एक महत्वपूर्ण पहलू है.इसलिए छत्तीसगढ़ शासन जनभागीदारी के साथ शहरों का विकास करने के लिए कृत संकल्पित है.कमल विहार जैसी योजना छत्तीसगढ़ सरकार का सुशासन की दिशा में आगे बढ़ने का एक और प्रयास है. कमल विहार देश की सबसे बड़ी तथा सर्वश्रेष्ठ योजना में एक होगी.
योजना के विरोधी कौन - भूमाफिया, दलाल, स्वार्थी तत्व
प्राधिकरण ने कहा कि योजना के विरोधी कई सालों से भोली भाली जनता को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण कभी निवेश के नाम पर कभी घर का सपना दिखा करा ठगते रहे हैं. अब यही जमीन का व्यवसाय करने वाले भूमाफिया और बिचौलिए किस्म के लोग अफवाह फैला कर जनता को गुमराह करने पर तुले हैं.ऐसे लोगों ने ना केवल झूठ का सहारा लिया है वरन मनगढंत व काल्पनिक समाचार छपवा रहें है.ये लोग कुछ स्थानीय पत्र पत्रिकाओं में असत्य और बेबुनियाद खबरों को भी प्रायोजित कर रहे हैं.
प्राधिकरण ने कहा है कि छत्तीसगढ़ शासन झुग्गी बस्ती मुक्त शहर चाहती है वहीं कमल विहार योजना का विरोध गंदी बस्तियों को बढ़ावा देने जैसा है.
 नागरिकों को कैसे ठगते रहे हैं अवैध प्लॉट बेचने वाले भूमाफिया, बिचौलिए
अवैध प्लाटिंग करने वाले भूमाफियों ने रायपुर शहर के आसपास तथा सटे हुए गांवों में किसानों की कई एकड़ कृषि भूमि को सस्ते दामों में खरीद कर उस 5000, 4000, 2500, 2000, 1500, 1000 वर्गफुट के आकार के प्लॉट बना कर बेचते रहे. कई प्रभावित लोगों के अनुसार भूमाफिया, किसान और प्लॉट खरीददार के बीच एक बिचौलिए की भूमिका में होते हैं. ऐसे बिचौलिए आम जनता को प्लॉट (अवैध प्लॉट) बेचने की अपनी योजनाओं का आकर्षक फोल्डर बना कर कुछ ही समय में लोगों को अमीर बनाने के सपने दिखाते रहे. ऐसे अवैध प्लॉटों की आकर्षक योजनाओं में पूंजी निवेश के लिए कई जमीन दलालों के साथ शहर की कई दुकानों में आकर्षक फोल्डर बांटे जाते रहे. एकमुश्त या हर महीने की किश्तों पर बिकने वाले प्लाटों के लिए बिचौलिए हर महीने शहर के बड़े होटलों में ऐसे प्लाटों की लाटरी निकालते रहे. जिस व्यक्ति की लाटरी निकलती थी उसे किश्तें नहीं देनी पड़ती थी पर उससे पूरा विकास शुल्क लिया जाता था. शहर के बड़े और आलीशान होटलों में होने वाली लाटरी मे संभावित ग्राहकों को बढ़िया खाना पीना भी खिलाया जाता था. प्लाटिंग के इस अवैध धंधे में किसानों की जमीन खरीदने के एवज में पहले दस से बीस प्रतिशत बयाना यानि अग्रिम राशि दी जाती थी शेष राशि प्लॉट बिकने पर समय पर दी जाती थी. इस पूरे अवैध धंधे में बिचौलिए अपने नाम पर कोई लेनदेन नहीं करते थे वरन वे किसान की जमीन में बनाए गए प्लॉट की रजिस्ट्री सीधे प्लॉट खरीदने वाले के नाम पर कर देते थे. कई ऐसे पीडित लोग है जिनके नाम पर बिचौलिओं ने प्लॉट की रजिस्ट्री तो करा दी पर आज भी उन्हें मौके पर उनके प्लॉट का कब्जा नहीं दिया गया. लोग जब अपना प्लॉट ढ़ूंढने जाते तो उन्हें अपना प्लॉट ही नहीं मिलता था तब उन्हें पता लगता कि उनके साथ धोखा हो गया है. यदि अपना प्लॉट मिल भी गया तो विकास शुल्क के नाम पर प्लॉट की कीमत का बीस प्रतिशत तक की राशि किश्तों में ले ली जाती थी. ये लोग बिजली पानी सड़क नाली की सुविधा देने में भी आनाकानी करते रहे है. तमाम असुविधाओं के बीच नागरिकों को कभी ऐसे लोगों या स्थानीय निकायों के सामने धरना प्रदर्शन और कोर्ट कचहरी करने जैसी भारी मुसीबतें सहनी पड़ी. इस समस्या से वे आज भी परेशान हैं. रातो रात अमीर बनने का सपना दिखाने वाले ऐसे बिचौलियों आम जनता को ठग कर स्वयं काफी अमीर बन गए. ये बिचौलिए इतने चतुर है कि उन्होंने कभी भी कागजों में अपने नाम पर कोई सबूत नहीं छोड़ा पर प्लॉट्स पर उनका पूरा कब्जा होता था. जनता का गाढ़ी कमाई को लूटने वाले यही बिचौलिए को जब पता चला कि प्राधिकरण रायपुर शहर में ऐसी सात अन्य योजनाएं तैयार कर रहा है तो उनके होश ही उड़ गए और इसलिए वे कमल विहार योजना का विरोध और दुष्प्रचार कर रहे हैं.

अधोसंरचना विकास की मिसाल होगा - कमल विहार
विकास छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानों के अन्तर्गत तैयार की गई कमल विहार योजना सहित रायपुर शहर के अन्य हिस्सों में सात अन्य योजनाएं लाई जा रही हैं. टॉऊन डेव्हलपमेंट स्कीम अर्थात नगर विकास योजना की इन योजनाओं में आधुनिक अधोसंरचना विकास किया जाएगा.वर्तमान में पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसी सुविधाएं कहीं नहीं है जो कमल विहार में होगी. सड़क नाली, बिजली पानी की बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं के साथ केन्द्रीय व्यावसायिक क्षेत्र अर्थात सेन्ट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के अतिरिक्त हर सेक्टर में स्थानीय स्तर का शॉपिंग सेन्टर, खेल के मैदान व उद्यान,नर्सिंग होम तथा स्कूल उपलब्ध होगा.इसके अलावा पूरी योजना में हरियाली के कारण स्वस्थ वातावरण होगा.भूमिगत नालियों के कारण गन्दगी और बारिश के दिनों में पानी भरने की समस्या नहीं होगी.हर सेक्टर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लॉंट की स्थापना कर गंदे पानी का शुध्दिकरण कर उसका पुर्नउपयोग उद्यानों की सिंचाई में किया जाएगा. टेलीफोन व अन्य केबलों के लिए सर्विस डक्ट, चौबीस घंटे पानी और बिजली की उपलब्धता की व्यवस्था होगी. चौड़ी सड़कों के कारण आवागमन एवं यातायात में सुविधा होगी.रिंग रोड व बायपास छह लेन की होगी.इनमें मुख्य सर्विस लेन के अतिरिक्त पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ तथा सायकल के लिए सायकल ट्रैक की व्यवस्था होगी. शिक्षा, स्वास्थ्य, कार्यलय भवनों, सांस्कृतिक केन्द्र, बैंक पोस्ट आफिस व अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए भूखंडों की उपलब्धता होगी. 

सवाल यह है कि रायपुर के नागरिक नियोजित शहरी विकास,सुविधायुक्त आवासीय और नागरिक सुविधाओं से वंचित क्यों हो ?नियम तथा सुविधा जनता के लिए है पर उसे भूमाफिया,बिचौलिए और स्वार्थी तत्वों के माध्यम से देने का हश्र देखा जा चुका है. सरकार का दायित्व लोकहित में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराना है.शहर को धारावी जैसी गंदी बस्ती में तब्दील कर देने वाले लोगों के हाथों में शहर के विकास की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती. छत्तीसगढ़ की राजधानी को सुनियोजित रुप से विकसित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन की योजनाएं जनता के हित में है तथा उसके विकास के लिए शासन पूरी दक्षता व पारदर्शिता के साथ कमल विहार तथा इसके जैसी 7 अन्य बेहतर अधोसंरचना विकास का कार्य कर रहा है.
- कमल विहार के बारे कुछ और जिज्ञासाएँ

क्र
जिज्ञासा
समाधान
1
राविप्रा द्वारा बोरियातालाब को विकसित किए जाने से गांव वालों की निस्‍तारी का क्‍या होगा ?
राविप्रा द्वारा बोरियातालाब को विकसित किए जाने का कार्य गांव वालों की सुविधा के लिए ही किया जा रहा है. इससे गांव वालों की निस्‍तारी पर रोक नहीं लगेगी बल्कि बारहों महीने निस्‍तारी के लिए गांव वालों को पर्याप्त पानी उपलब्‍ध होगा एवं बोरियातालाब के जल स्‍तर में वृद्धि होने से आस-पास के गांव के भू-जल स्‍तर में भी वृद्धि होगी. इससे गांव वालों को गर्मी के मौसम में भी पीने एवं अन्‍य निस्‍तार सुविधाओं हेतु पानी की कमी नहीं होगी.
2
ई.डब्‍ल्‍यू.एस. के लिए 15 प्रतिशत के स्‍थान पर कम जमीन छोड़ी जा रही है ?
ई.डब्‍ल्‍यू.एस. के लिए योजना क्षेत्र के कुल विकसित आवासीय क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत जमीन ही छोड़ी जा रही है.
3
योजना क्षेत्र के रीजनल पार्क की जमीन को सरकारी रेट से कम दर पर बेचे जाने की कार्यवाही भी की जा रही है ?
पार्क एवं खाली मैदान की जमीनों को बेचा ही नहीं जा सकता है. प्राधिकरण द्वारा योजना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रीजनल पार्क एवं सिटी पार्क को इस तरह से विकसित किया जाएगा, जिससे उस क्षेत्र को हरियाली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके.
4
बिना भूमि के स्‍वामित्‍व के नक्‍शा मंजूर किया गया एवं इस नक्‍शे के कुछ हिस्‍सों को संयुक्त संचालक द्वारा मंजूरी देने से इंकार किया गया ?
योजना क्षेत्र में नक्‍शों की मंजूरी दिए जाने का कार्य एवं भूमि के अर्जन का कार्य नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के अंतर्गत दिए गए नियमों एवं प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है. प्राधिकरण द्वारा अधिनियम के धाराओं के अनुसार ही कार्य किया जा रहा है.
5
अनुमोदित नक्‍शे में सहायक यंत्री तथा कार्यपालन यंत्री के हस्‍ताक्षर है किंतु टाऊन प्‍लानर के हस्‍ताक्षर नहीं है ?
कमल विहार योजना के कन्‍सलटेंट बिल्‍डक्राफ्ट द्वारा विधिवत इंस्‍टीट्यूट ऑफ टाऊन प्‍लानर्स ऑफ इंडिया नई दिल्‍ली में रजिस्‍टर्ड टाऊन प्‍लानर के सहयोग से एवं परामर्श से यह योजना बनवाई है एवं उनका नक्‍शे में विधिवत हस्‍ताक्षर भी है. राविप्रा द्वारा परंपरागत प्रक्रिया में जो नक्‍शे टाऊन प्‍लानिंग विभाग में सबमिट करता है, उसमें विभाग के अधिकारियों का ही हस्‍ताक्षर रहता है. ये उन्‍हीं नक्‍शों की कॉपी रहती है, जिन्‍हें राविप्रा अपने कन्‍सलटेंट से प्राप्त करता है.
6
राविप्रा के अध्‍यक्ष श्री एस.एस. बजाज द्वारा 400 एकड़ की योजना को 2300 एकड़ कर अध्‍यक्ष की हैसियत से प्रस्‍ताव पारित किया गया एवं उसी प्रस्‍ताव को विशेष सचिव आवास एवं पर्यावरण की हैसियत से प्रशासनिक स्‍वीकृति प्रदान की जो नियमानुसार नहीं है?
राविप्रा में छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धाराओं के अनुसार कोई भी प्रस्‍ताव पारित करने का अधिकार अध्‍यक्ष को ना दिया जाकर संचालक मंडल को दिया गया है. इसी प्रकार शासन स्‍तर पर भी स्‍वीकृति दिए जाने की कार्यवाही किसी व्‍यक्ति विशेष द्वारा नहीं की जाती है, बल्कि इसके लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए जाने के पश्‍चात ही स्‍वीकृति प्रदान करने की कार्रवाही की जाती है.
7
बड़े लोगों की जमीन योजना से बाहर एवं सेक्‍टर-15सी, जो एक किलोमीटर के दायरे के बाहर है, उसे शामिल क्‍यों किया गया हैं ?
राविप्रा द्वारा गांव की आबादी, घनी रिहायशी बस्‍ती एवं कच्‍चे-पक्के मकानों द्वारा निर्मित क्षेत्रों का सर्वे कराया जाकर सिर्फ इन्‍हीं क्षेत्रों को योजना से बाहर किया गया है. यही कारण है कि सेक्‍टर-15सी जो प्रथम दृष्टिया नक्‍शे में देखने से यद्यपि वह योजना क्षेत्र के एकदम कोने क्षेत्र में स्थित है. इसके बावजूद उपरोक्त मापदण्‍डों में न आने के कारण उसे योजना क्षेत्र में ही यथावत रखा गया है.
8
कमल विहार योजना का क्रियान्‍वयन कब होगा ?
कमल विहार योजना के फील्‍ड पर क्रियान्‍वयन का कार्य शुरू कर दिया गया है. इसके लिए प्रथम चरण में मास्‍टर प्‍लान में दर्शित रिंग रोड-4 के लिए टेण्‍डर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
9
योजना की जानकारी के लिए दावा/आपत्ति आमंत्रित की गई थी, उसका निराकरण नहीं किया गया?
योजना में समस्‍त दावा/आपत्तियों का निराकरण किया गया है.
10
राविप्रा 35 प्रतिशत भूमि देने का वादा कर रहा है लेकिन यह जमीन कहां दी जाएगी, इसका खुलासा नहीं किया गया ?
राविप्रा द्वारा स्‍पष्ट रूप से योजना क्षेत्र के भूमि स्‍वामियों को लिखित में यह जानकारी दे दी गई है कि उन्‍हें विकसित प्‍लाट/ भूखंड का आबंटन कहां किया जाएगा. कुल 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा भू-स्‍वामियों द्वारा उन्‍हें प्राप्त विकसित प्‍लाट के संबंध में अपनी सहमति प्रदान कर दी गई है.
11
राविप्रा द्वारा नहरों पर रोड बनाने की तैयारी की जा रही है. इसमें खेती को सिंचाई का पानी कहां से मिलेगा ?
राविप्रा द्वारा नहरों पर रोड बनाने से पहले सिंचाई विभाग से विधिवत अनुमति ली जाएगी एवं रोड का निर्माण सिंचाई विभाग के शर्तों के अधीन किया जाएगा.
12
राविप्रा द्वारा श्‍मशान एवं मरघट के लिए आरक्षित भूमि में भी प्‍लाट काट दिया गया है ?
राविप्रा द्वारा योजना क्षेत्र में 3.27 हेक्‍टेयर भूमि श्‍मशान भूमि के मद में ही रखी गई है. अतः इस भूमि पर प्‍लाट काटे जाने का प्रश्‍न ही नहीं उठता.
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राविप्रा द्वारा पहले भूमि स्‍वामियों से जमीन का करार करने का वायदा किया गया था, मगर अब सहमति लेने पर जोर दिया जा रहा है ?
जब तक राविप्रा को यह जानकारी नहीं होगी कि कितने लोग योजना में विकसित प्‍लाट लेने के इच्‍छुक है, तब तक उनसे करार किए जाने की कार्यवाही कैसे की जा सकती है ? इसलिए प्राधिकरण द्वारा उनसे सहमति ली जा रही है ताकि करार की कार्यवाही की जा सके.
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राविप्रा को सड़क किस जमीन पर बनाना है, इसके बारे में पता नहीं होने के बावजूद सड़क के लिए टेंडर जारी कर दिया गया ?
राविप्रा के संचालक मंडल के द्वारा योजना से संबंधित स्‍वीकृत किए गए नक्शे में ना सिर्फ मास्‍टर प्‍लान की सड़कें कहां बनेगी, इसका उल्‍लेख है साथ ही सेक्‍टर लेवल की सड़कों का भी उल्‍लेख किया गया है.
|| नगर विकास योजना – 04 कमल विहार योजना में भूमि पुनर्गठन का विवरण ||
कमल विहार योजना में भूमि का वितरण (योजना व सेक्टर स्तर पर)
विवरण
क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
  • योजना का कुल अधिसूचित क्षेत्र
  • कृषि भूउपयोग का क्षेत्र
  • आबादी का क्षेत्र
  • कामर्शियल (मंडी)
                            योजना का कुल क्षेत्रफल
879.22           


110.50

111.36

9.52

             647.84
भूमि का उपयोग
(1) आमोद-प्रमोद उपयोग हेतु क्षेत्र
  (अ) क्षेत्रीय उद्यान (बोरिया तालाब सहित)
  (ब) नगर उद्यान

103.98
25.43
(2) योजना क्षेत्र में अन्य तालाब का क्षेत्र
0.83
(3) श्मशान भूमि का क्षेत्र
3.27
(4) सड़कों का क्षेत्र  
 () आरडीपी सड़क (मास्टर प्लॉन में प्रस्तावित)
 () टीडीएस सड़क (कमल विहार में प्रस्तावित)

54.12
19.50
(5) व्यावसायिक क्षेत्र
 () सीबीडी
 () व्यावसायिक पट्टी

8.02
2.31
(6) अनुमोदित अभिन्यास / वर्तमान निर्माण क्षेत्र
37.38
(7) स्थानीय एवं सुविधाजनक बाजार केन्द्र
5.83
(8) शैक्षणिक प्रयोजन क्षेत्र
  () नर्सरी स्कूल () प्राईमरी स्कूल () हाई स्कूल
5.75
(9) स्वास्थ्य प्रयोजन क्षेत्र
    () स्वास्थ्य केन्द्र (डिस्पेन्सरी, नर्सिंग होम, पॉली क्लीनिक)  
2.40
(10) बस स्टैन्ड
0.32
(11) योजना के आंतरिक मार्ग                   
94.61
(12) उद्यान खेल मैदान     
38.52
कुल उपलब्ध विकसित प्लॉटों का क्षेत्रफल
(आवासीय, मिश्रित,पी.एस.पी. एवं ईडब्लूएस)
(अ)    पुनर्गठित विकसित भूखंडों का कुल रकबा
(आ)  आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के लिए (ईडब्लूएस भूखंड)
     213.42 हेक्टेयर का 15% = 32.01 हेक्टेयर
245.57
213.42
32.15